Akash

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Alumni of University of Allahabad

08/10/2025

आइए जम्मू और कश्मीर से अलग हुए लद्दाख के बारे में कुछ विशेष जानकारी जुटाते हैं -

26 अक्टूबर 1947 में जम्मू और कश्मीर भारत को रक्षा, विदेशी मामले और संचार जैसे विषयों पर केंद्र सरकार को नियंत्रण सौंप कर भारत में विलय होने का फैसला किया।
अन्य मामलों में स्वायत्तता प्रदान की गई जिसे अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A से सुरक्षा प्रदान की गई।
वर्ष 2019 तक केंद्र और राज्य सरकार के परस्पर सहयोग से केंद्र के कई कानून एक-एक करके जम्मू और कश्मीर में लागू होते रहे हैं
वर्ष 2019 में लद्दाख को जम्मू और कश्मीर से अलग करके एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाता है यहां से उन्हें अपनी सरकार चुनने का अधिकार भी खोना पड़ता है अब लद्दाख के सारे फैसले लद्दाख से दूर दिल्ली में बैठी सरकार के अधीन हो गए।
लद्दाख वासियों ने इसके खिलाफ अहिंसक प्रदर्शन किये और अपनी कुछ मांगे केंद्र सरकार के समझ रखी -
१.पूर्ण राज्य का दर्जा
२.छठी अनुसूची में शामिल करना
३.लेह और कारगिल के लिए अलग लोकसभा सीटें
४.सरकारी नौकरियों में स्थानीय आरक्षण
५.लोक सेवा आयोग (PSC) का गठन
६.चीन से जमीन वापसी
सत्ता में बैठी केंद्र सरकार लद्दाख वासियों की इन मांगों को पिछले 6 वर्षों से इग्नोर करती रही समय के साथ-साथ इस प्रदर्शन का स्वरूप और व्यापक होता गया जिसमें रोजगार से जुड़े मामले जैसे कि आउटसोर्सिंग से स्थानीय रोजगार में कमी,अग्निवीर जैसी स्कीम से सेना में रोजगार स्थाई नहीं रहा,पर्यटन उद्योग पर प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बर्फबारी समय पर ना होना,ग्लेशियर का तेजी से पिघलना जिससे पर्यटन उद्योग भी प्रभावित हुआ।
इस शांतिपूर्ण चल रहे प्रदर्शन का नेतृत्व इनोवेटर, एजुकेटर और इन्वायरमेंटलिस्ट सोनम वांगचुक कर रहे थे।
इस आंदोलन का ट्रिगर प्वाइंट अनशन के दौरान दो बुजुर्ग प्रदर्शनकारी के बीमार पड़ने और अस्पताल ले जाए जाने पर LAB की युवा बिंग ने लेह में बंद का आवाहन किया।
लंबे समय का दबा गुस्सा, युवाओं की हताशा और सरकारी प्रतिक्रिया से कुछ प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन से अलग होकर लेह में बीजेपी कार्यालय, सीईसी कार्यालय, पुलिस वाहनों और सीआरपीएफ वाहनों को आग लगा दी। भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई जिसमें पुलिस ने आंसू गैस और गोलाबारी की, परिणाम में चार मौतें (जिसमें एक पूर्व सैनिक त्वेसांग थारचिन भी शामिल) हुई और सैकड़ो लोग घायल हुए, लेह में कर्फ्यू,मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया, सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त कर दिया, वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर NSA लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया।
जिन मांगों को लेकर प्रदर्शन हो रहा था उनका विश्लेषण करते हैं
1. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया गया है कुछ लोग पूर्ण राज्य के दर्जे के खिलाफ तर्क देते हुए वहां की कम आबादी को एक प्रमुख कारण बताते हैं पर अगर आबादी का कम होना लोकतांत्रिक मूल्यों को कम करता है तो यह जनसंख्या नियंत्रण के विपरीत एक कुतर्क होगा, बॉर्डर एरिया होने का तर्क भी उतना मजबूत नहीं क्योंकि उत्तर भारत के अधिकांश राज्य बॉर्डर से जुड़े हुए हैं पर वहां भी बॉर्डर एरिया का प्रशासन और राज्य का प्रशासन समन्वय के साथ काम कर ही रहा है संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से हमें स्थानीय स्वशासन और पूर्ण राज्य देने की ओर आगे बढ़ना चाहिए।
2. भारतीय संविधान की छठी अनुसूची जिसमें असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को जनजातीय क्षेत्र के प्रशासन से संबंधित विशेषाधिकार प्राप्त है पर लद्दाख इससे वंचित है
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 244 (2) और 275(1) के तहत विशिष्ट क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान की व्यवस्था का प्रावधान किया जा सकता है।
अनुच्छेद 371A से अनुच्छेद 371J विशिष्ट परिस्थितियों और आवश्यकताओं के आधार पर विशेष प्रावधान करते हैं जिसके कुछ उदाहरण के तौर पर यह महाराष्ट्र गुजरात नागालैंड असम मणिपुर आंध्र प्रदेश तेलंगाना सिक्किम मिजोरम अरुणाचल प्रदेश गोवा और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में लागू है फिर लद्दाख में इसी तरह कुछ स्पेशल प्रोविजन करने में हर्ज क्या है?
3.राज्य का क्षेत्रफल काफी बड़ा होने से वहां लोकसभा की एक सीट (लद्दाख) के बजाय दो सीट लेह और कारगिल का विचार भी तर्कसंगत ही है।
4.सरकारी नौकरियों में स्थानीय आरक्षण लागू करना भी एक तर्कसंगत मांग है क्योंकि भारत के अधिकांश राज्यों में इस तरह के प्रावधान लागू है।
5.राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों की परीक्षा और नियुक्ति के लिए लोक सेवा आयोग की मांग भी वाजिब है।
6.चीन के अतिक्रमण से भारत की जो जमीन चीन के अधीन हो गई है उसे वापस लेने के लिए भी भारत सरकार को कुछ सकारात्मक कदम उठाने चाहिए ये मांग भी जायज है।

आप लोगों की क्या राय है लद्दाख के इन विषयों पर?

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