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25/03/2026
गौर से ध्यान दे मेरे भाइयों काफिर का अर्थ क्या होता है 🕉️☪️। ✔️ जवाब (सीधा और आसान)
सबसे पहले बात साफ कर लें — क़ुरान की आयतें आधी पढ़ने से गलत मतलब निकलता है।
इसलिए पूरी बात समझना जरूरी है।
1️⃣ “एक इंसान का कत्ल पूरी इंसानियत का कत्ल” — क़ुरान में कहाँ है?
यह बात क़ुरान में साफ लिखी है:
👉 सूरह अल-माइदा (5:32)
“जिसने किसी एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की — तो मानो उसने पूरी इंसानियत की हत्या की, और जिसने एक जान बचाई उसने पूरी इंसानियत को बचाया।”
यानी बिना वजह किसी को मारना इस्लाम में बड़ा गुनाह है।
2️⃣ “जहाँ पाओ काफ़िरों को कत्ल करो” — असली संदर्भ क्या है?
यह आयत अक्सर आधी बताई जाती है।
👉 सूरह अल-बक़रा (2:190) पहले क्या कहती है:
“जो तुमसे लड़ते हैं तुम भी अल्लाह के रास्ते में उनसे लड़ो, लेकिन ज़्यादती मत करो। अल्लाह ज़्यादती करने वालों को पसंद नहीं करता।”
अब जिस आयत का लोग हवाला देते हैं:
👉 सूरह अल-बक़रा (2:191)
“और उनसे लड़ो जहाँ तुम उनसे युद्ध में भिड़ो…”
⚠️ ध्यान दें:
यह युद्ध (war) की बात है, आम लोगों को मारने की नहीं।
यह उस समय उतरी जब मक्का के लोग मुसलमानों को मार रहे थे, घरों से निकाल रहे थे और युद्ध कर रहे थे।
यानी: ✅ युद्ध में लड़ने वालों से लड़ो
❌ शांतिपूर्वक रहने वालों को मारो — ऐसा कहीं नहीं लिखा।
3️⃣ क्या हर गैर-मुस्लिम “मारने योग्य काफ़िर” है?
नहीं।
क़ुरान खुद कहता है:
👉 सूरह अल-काफ़िरून (109:6)
“तुम्हारा धर्म तुम्हारे लिए, मेरा धर्म मेरे लिए।”
👉 सूरह अल-बक़रा (2:256)
“धर्म में कोई ज़बरदस्ती नहीं।”
अगर सबको मारना होता तो “धर्म में ज़बरदस्ती नहीं” क्यों कहा जाता?
4️⃣ “काफ़िर” का असली मतलब
अरबी में काफ़िर का मतलब सिर्फ “गैर-मुस्लिम” नहीं होता।
असल अर्थ: ➡️ सच को जानकर जानबूझकर ढकने या दुश्मनी करने वाला।
क़ुरान में कई जगह यह शब्द युद्ध करने वाले अत्याचारी लोगों के लिए आया है, हर हिंदू, ईसाई या बौद्ध के लिए नहीं।
5️⃣ इस्लाम में गैर-मुस्लिमों के साथ व्यवहार
क़ुरान कहता है:
👉 सूरह अल-मुम्तहिना (60:8)
“जो लोग तुमसे धर्म के कारण लड़ाई नहीं करते, उनके साथ भलाई और इंसाफ करो।”
यानी: ✅ शांति से रहने वालों से अच्छा व्यवहार करो।
✔️ अंतिम बात (सीधा निष्कर्ष)
इस्लाम निर्दोष लोगों की हत्या को हराम कहता है।
लड़ाई सिर्फ युद्ध और आत्म-रक्षा में अनुमति है।
हर गैर-मुस्लिम को मारने का आदेश क़ुरान में नहीं है।
आयतों को संदर्भ से काटकर दिखाया जाता है, इसलिए गलतफहमी होती है।
🚨🇵🇸 ब्रेकिंग: Hamas के पॉलिटिकल ब्यूरो के प्रतिनिधि Mahmud al-Zahar ने उन अरब देशों की आलोचना की है जो Israel के साथ अपने संबंध सामान्य (normalize) कर रहे हैं।
उन्होंने कहा:
"आप सुन्नी मुस्लिम नहीं हैं; आप काफिर, गद्दार, एजेंट और ज़ायनिस्टों के सहयोगी हैं।"
क्या आप उनकी बात से सहमत हैं?
25/03/2026
क्या Donald Trump दुनिया के लिए आतंकवादी हैं?
○ हाँ
○ नहीं
25/03/2026
नाशिक ‘गॉडमैन’ कांड:
Ashok Kharat गिरफ्तार,
58 अश्लील वीडियो से खुला राज;
Rupali Chakankar का इस्तीफा,
महाराष्ट्र में सियासी तूफान
मुंबई: महाराष्ट्र के नाशिक से सामने आया ashok kharat केस अब “maharashtra epstein files” के नाम से चर्चा में है। इस केस में महिलाओं के साथ रेप, ब्लैकमेल, अश्लील वीडियो रिकॉर्डिंग और अंधश्रद्धा के नाम पर शोषण जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
इस पूरे विवाद के बीच rupali chakankar का नाम सामने आने के बाद मामला पूरी तरह ⚡ राजनीतिक रंग ले चुका है।
❇️ कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? (Why & How It Started)
मामले की शुरुआत एक महिला की शिकायत से हुई, जिसने आरोप लगाया कि ashok kharat ने “धार्मिक अनुष्ठान” और “भविष्य सुधारने” के नाम पर उसका विश्वास जीता।
• आरोपी खुद को ज्योतिषी और “देवी शक्ति वाला व्यक्ति” बताता था
• महिलाओं को “समस्या समाधान” के नाम पर बुलाता था
• खाने-पीने में नशीला पदार्थ मिलाकर उनका शोषण करता था
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने कई सालों तक इसी तरीके से महिलाओं को फंसाया।
📅 टाइमलाइन: कब क्या हुआ? (Timeline Of Events)
• 2020–2025: कई महिलाओं का कथित शोषण, शिकायतें सामने नहीं आई
• 2025 (दिसंबर): पहली बार ब्लैकमेल और फोटो वायरल का मामला दर्ज
• 12 मार्च 2026: शिर्डी कनेक्शन से केस खुलना शुरू
• 17 मार्च 2026: नाशिक क्राइम ब्रांच ने आरोपी को गिरफ्तार किया
• 18 मार्च 2026: SIT जांच गठित
• 20 मार्च 2026: मामला मीडिया में बड़ा बना
• 21–23 मार्च 2026: नई FIR और पीड़ित सामने आए
🚔 गिरफ्तारी और पुलिस जांच (Arrest & Evidence)
नाशिक पुलिस और क्राइम ब्रांच ने ashok kharat को गिरफ्तार किया। जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए:
• पेन ड्राइव से 58 अश्लील वीडियो क्लिप बरामद ([the economic times][3])
• कई महिलाओं के साथ रेप और ब्लैकमेल के आरोप
• IT डिवाइस, DVR और दस्तावेज जब्त
• कई जिलों (नाशिक, शिरडी, वावी) में केस दर्ज
sit अब पूरे नेटवर्क और संभावित “हाई प्रोफाइल लिंक” की जांच कर रही है।
• आरोपी के साथ फोटो और संबंध सामने आए
• ट्रस्ट और कार्यक्रमों में मौजूदगी पर सवाल
• महिला आयोग की भूमिका पर सवाल
विपक्ष ने पूछा — “जब महिलाओं का शोषण हो रहा था, तब आयोग क्या कर रहा था?”
🔊 इस्तीफा और राजनीतिक भूचाल
बढ़ते दबाव के बाद Rupali Chakankar ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
(राजनीति)
इसके बाद:
• विपक्ष ने इसे “सरकार की नाकामी” बताया
• NCP के अंदर भी नाराजगी बढ़ी
• उन्हें पार्टी पद से हटाने की भी चर्चा
🔥 राजनीतिक विवाद: ‘Maharashtra Epstein Files’
इस केस को विपक्ष ने “Maharashtra Epstein Case” बताया क्योंकि:
• कई महिलाओं का शोषण
• वीडियो रिकॉर्डिंग
• हाई-प्रोफाइल कनेक्शन
इसने पूरे राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया।
🔎 सरकारी कार्रवाई और SIT जांच
सरकार ने केस की गंभीरता देखते हुए:
(टीवी और वीडियो डिवाइस)
• SIT टीम गठित की
• साइबर फॉरेंसिक जांच शुरू
• आरोपी की संपत्ति और नेटवर्क की जांच
Video in comment section
08/03/2026
03/2026
ईरान का युद्ध उतना सरल नहीं है जितना हमें दिखता है
टीवी और सोशल मीडिया पर हमें अक्सर यह कहानी दिखाई जाती है:
एक तरफ अमेरिका और इज़राइल
दूसरी तरफ ईरान
मिसाइलें चल रही हैं, ड्रोन उड़ रहे हैं, और एयरस्ट्राइक हो रही हैं।
लेकिन अगर थोड़ा गहराई से देखें तो मामला इतना सीधा नहीं है।
यह सिर्फ दो देशों का युद्ध नहीं हो सकता।
इसके पीछे दुनिया की बड़ी ताकतें भी हो सकती हैं।
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ईरान इतने सटीक हमले कैसे कर रहा है?
हाल के हमलों में देखा गया कि ईरान ने कुछ बहुत खास सैन्य ठिकानों और रणनीतिक जगहों को निशाना बनाया।
ऐसी सटीकता के लिए सिर्फ मिसाइलें होना काफी नहीं होता।
इसके लिए ज़रूरी होता है:
• सैटेलाइट से निगरानी
• समुद्र में जहाज़ों की जानकारी
• रडार सिस्टम की लोकेशन
ईरान के पास सीमित सैटेलाइट क्षमता है।
तो कई विशेषज्ञ यह सवाल पूछ रहे हैं:
क्या कोई और देश ईरान को जानकारी दे रहा है?
कई विश्लेषकों का मानना है कि इसमें रूस की भूमिका हो सकती है।
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रूस का संभावित रोल
रूस के पास दुनिया की मजबूत सैन्य खुफिया व्यवस्था है।
कुछ समय पहले यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को ड्रोन दिए थे।
इसलिए कई लोगों का मानना है कि अब दोनों देशों के बीच सहयोग दूसरी दिशा में भी हो सकता है।
सरल शब्दों में समझें तो:
• ईरान मैदान में लड़ रहा है
• रूस जानकारी और रणनीति में मदद कर सकता है
हालांकि यह पूरी तरह सार्वजनिक रूप से साबित नहीं हुआ है, लेकिन चर्चा जरूर है।
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चीन का तरीका थोड़ा अलग होता है
चीन आमतौर पर सीधे युद्ध में नहीं उतरता।
उसकी रणनीति अक्सर शांत और पर्दे के पीछे काम करने की होती है।
जैसे:
• आर्थिक मदद
• कूटनीतिक समर्थन
• तकनीकी सहयोग
• सैन्य उपकरण
चीन शायद सीधे युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर किसी संघर्ष से अमेरिका का प्रभाव कम होता है, तो यह उसके लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।
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यही वजह है कि कई लोग कहते हैं कि यह सिर्फ क्षेत्रीय युद्ध नहीं है।
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इसका असर दुनिया पर भी पड़ रहा है
इस संघर्ष के कारण कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
उदाहरण के लिए:
• मध्य पूर्व की सुरक्षा को लेकर निवेशकों की सोच बदल रही है
• कुछ पैसे और निवेश दूसरी जगहों जैसे सिंगापुर की ओर जा रहे हैं
• ऊर्जा बाज़ार (तेल और गैस) की राजनीति भी बदल रही है
कुछ देशों को जो पहले रूसी तेल न खरीदने को कहा जा रहा था, अब हालात बदलते दिख रहे हैं।
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असली सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है:
जब यह संघर्ष खत्म होगा तो दुनिया कैसी होगी?
इतिहास बताता है कि बड़े युद्ध अक्सर दुनिया की शक्ति संतुलन को बदल देते हैं।
इसलिए यह संघर्ष सिर्फ मिसाइलों का नहीं है।
यह इस बात की लड़ाई भी हो सकती है कि आने वाले समय में दुनिया की दिशा कौन तय करेगा।
07/03/2026
02/2026
▪️इज़राइली पत्रकार अलोन मिज़राही ने ये लिखा है!
“हम इतिहास को अपनी आंखों के सामने घटते हुए देख रहे हैं। सबकी उम्मीदों के ख़िलाफ़, ईरान इस वक़्त अमेरिकी ठिकानों को इतनी गहराई और इतने निर्णायक तरीक़े से तबाह कर रहा है कि दुनिया अभी उसे समझने के लिए तैयार ही नहीं है।
सिर्फ़ चार दिनों में ईरान ने इस पूरे इलाक़े में अपनी फ़ौजी पकड़ का दायरा बढ़ा लिया है। ईरान ने दुनिया के सबसे क़ीमती और सबसे महंगे फ़ौजी ठिकानों, साधनों और उपकरणों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया है। बहरीन, कुवैत, क़तर और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकाने दुनिया के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में गिने जाते हैं। इन्हें बनाने में कई दशकों में खरबों डॉलर खर्च हुए हैं। यानी तीस साल से ज़्यादा के सैन्य ख़र्च का बड़ा हिस्सा अब धुएं में उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
हम देख रहे हैं कि करोड़ों डॉलर की क़ीमत वाले रडार एक ही पल में नष्ट हो रहे हैं। पूरी की पूरी सैन्य छावनियां खाली कर दी गयी हैं, कुछ जला दी गयी हैं और कई पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। मेरे ज्ञान के मुताबिक़, अमेरिका को अपने पूरे इतिहास में ऐसी तबाही कभी नहीं झेलनी पड़ी, शायद पर्ल हार्बर के हमले को छोड़ दें, मगर वह भी एक ही हमला था।
किसी भी सामान्य युद्ध में किसी दुश्मन ने अमेरिकी सेना के साथ वह नहीं किया जो ईरान इस समय कर रहा है। यह बात यक़ीन से परे लगती है। हालात इतने ख़राब हैं कि इस युद्ध से जुड़ी नयी जानकारी लगभग पूरी तरह सेंसरशिप के पीछे छिपा दी गयी है। आपने ग़ौर किया होगा कि हर दिन हमें कम से कम जानकारी दिखायी जा रही है।
पैंतीस साल पहले पहले इराक़ युद्ध के दौरान हमें लगातार वीडियो फुटेज दिखाये जाते थे। उस समय ‘स्मार्ट बम’ और कैमरे नयी चीज़ थे, फिर भी हर रात युद्ध के दृश्य टीवी पर दिखते थे। आज हालात यह हैं कि हमें लगभग कोई वीडियो दिखाई ही नहीं देता।
ज़रा समझिए। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताक़त, जिसकी वायु शक्ति भी दुनिया में सबसे बड़ी मानी जाती है, चार दिनों से हमले की स्थिति में है। दावा किया जा रहा है कि वह ईरानी रक्षा पंक्तियों को तोड़ रही है, लेकिन हमें कहीं भी ईरान के आसमान पर अमेरिकी वर्चस्व का कोई सबूत नहीं दिखता। तेहरान या ईरान के किसी भी हिस्से के ऊपर उड़ते अमेरिकी विमानों की फुटेज कहां है?
अमेरिकी सैनिक ईरान की ज़मीन पर कदम रखने का ख़्वाब भी नहीं देख सकते। इस युद्ध की बेबसी का अंदाज़ा इस बात से लगाइए कि चौथे ही दिन ट्रंप प्रशासन की ओर से अजीबोग़रीब सुझाव सामने आने लगे हैं। वे कह रहे हैं कि फ़ारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल के जहाज़ों को सैन्य सुरक्षा दी जाए। आप सोच भी क्या रहे हैं? आप अमेरिकी जहाज़ों को हज़ारों ईरानी मिसाइलों की मारक सीमा में भेजना चाहते हैं? इस वक़्त कोई भी जहाज़ हॉर्मुज़ के जलडमरूमध्य से सुरक्षित नहीं गुजर सकता।
ईरान ने दशकों तक इसकी तैयारी की है। अब कुछ लोग यह बात कर रहे हैं कि कुर्द मिलिशिया को हथियार देकर ईरान पर हमला कराया जाए। यह कैसी बात है? क्या आपने ईरान का नक़्शा देखा है? लगता है ट्रंप प्रशासन ने कभी ईरान का नक़्शा देखा ही नहीं। आपको पता है वह कितना विशाल देश है? आप कहते हैं ईरान पर हमला कर दो। क्या दस हज़ार लड़ाकों की मिलिशिया ईरान पर क़ब्ज़ा कर लेगी? पचास हज़ार? या एक लाख? ईरान उन्हें निगल जाएगा।
अमेरिका और इस्राइल यह युद्ध पहले ही हार चुके हैं। वे बम गिराकर लाखों आम लोगों को मार सकते हैं, इमारतों को उड़ा सकते हैं, लेकिन वे यह युद्ध नहीं जीतेंगे। ईरान का सैन्य ढांचा और हथियार पूरे देश में ज़मीन के बहुत गहरे नीचे बने हुए हैं। अमेरिकियों के लिए, और निश्चित ही इस्राइलियों के लिए, वहां तक पहुंचना लगभग नामुमकिन है।
उन्होंने ऐसा सिलसिला शुरू कर दिया है जिसे वे ख़त्म करने की ताक़त नहीं रखते। जब यह सब ख़त्म होगा, तो अमेरिका फिर कभी पश्चिमी एशिया में उसी तरह वापस नहीं आ पाएगा। मध्य पूर्व में अमेरिकी मौजूदगी नहीं बचेगी। मैं यह बात पूरे यक़ीन के साथ कह रहा हूं।”
07/03/2026
01/2026
“उन्होंने ऐसा सिस्टम बनाया है जो सिर कट जाने के बाद भी लड़ाई जारी रख सके।”
ईरान इस तरह के युद्ध की तैयारी बहुत पहले से कर रहा था।
अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई सैन्य मुख्यालयों पर हमले किए और उसके कई बड़े सैन्य नेताओं को मार गिराया।
फिर भी ईरान लड़ाई जारी रखे हुए है।
क्यों?
क्योंकि ईरान ने इस स्थिति की तैयारी वर्षों पहले ही कर ली थी।
ईरान ने एक रणनीति बनाई थी जिसे कहते हैं डिसेंट्रलाइज़्ड वॉरफेयर (Decentralized Warfare) —
यानी ऐसा सिस्टम जो बिना किसी केंद्रीय मुख्यालय के भी काम करता रहे।
काफी समय पहले ही अलग-अलग मिसाइल और ड्रोन यूनिट्स को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए थे:
अगर नेतृत्व खत्म हो जाए…
अगर कमांड सिस्टम टूट जाए…
• अपने दम पर काम करो
• किसी केंद्रीय आदेश का इंतज़ार मत करो
• जो मिशन पहले दिया गया है, उसे पूरा करो
न कोई केंद्रीय कमांड।
न किसी आदेश का इंतज़ार।
बस योजना के अनुसार कार्रवाई।
इससे युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है।
परंपरागत सैन्य व्यवस्था में अगर आप कमांड सेंटर को नष्ट कर दें, तो पूरी सेना कमजोर पड़ जाती है।
लेकिन इस मॉडल में कोई एक ऐसा केंद्र ही नहीं है जिसे नष्ट करके युद्ध रोका जा सके।
सैकड़ों अलग-अलग यूनिट्स लड़ाई जारी रख सकती हैं।
एक यूनिट लड़ना बंद कर दे,
तो 300 किलोमीटर दूर दूसरी यूनिट हमला जारी रख सकती है।
और हो सकता है कि उन्हें एक-दूसरे के बारे में पता भी न हो।
यही इस रणनीति का असली मकसद है:
• युद्धक्षेत्र को कई हिस्सों में बाँट देना
• फैसले लेने वालों की संख्या बढ़ा देना
• दुश्मन को एक बड़े खतरे की बजाय सैकड़ों छोटे खतरों से जूझने पर मजबूर कर देना
कई बार तो खुद ईरान को भी यह पता नहीं होता कि किस यूनिट ने कौन-सा हमला किया।
क्योंकि यह पूरी संरचना उसी स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई गई थी —
जब शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया जाए।
अमेरिका और इज़राइल तकनीकी रूप से बहुत शक्तिशाली हैं।
लेकिन ईरान की रणनीति अलग है।
केंद्रीय शक्ति पर निर्भर रहने के बजाय…
उन्होंने ऐसा सिस्टम बनाया है जो सिर कट जाने के बाद भी लड़ाई जारी रख सके।
I got over 140 reactions on one of my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉
06/03/2026
गाजीपुर जनपद के उसिया गाँव की बेटी खान साइमा सेराज अहमद ने एक बार फिर अपनी मेहनत और काबिलियत का शानदार उदाहरण पेश किया है।
वर्तमान में IRS अधिकारी रहते हुए भी उन्होंने UPSC 2025 में 135वीं रैंक हासिल कर गाजीपुर, उत्तर प्रदेश और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
उनकी इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएँ। 🌟
04/03/2026
दुनिया की तारीख़ गवाह है कि अगर किसी एक ख़ानदान को अल्लाह तआला ने सबसे ज़्यादा मक़बूलियत, इज़्ज़त और नबूवत का सिलसिला अता किया, अल्लाह तआला ने आपको इब्राहीम नाम अता फ़रमाया, जिसका मतलब है क़ौमों का बाप। सचमुच, आपकी नस्ल से ऐसी अज़ीम हस्तियाँ पैदा हुईं जिनका नाम क़यामत तक रोशन रहेगा। आपकी दो बीवियाँ थीं, सारा अलैहिस्सलाम और हाजरा अलैहिस्सलाम। हाजरा अलैहिस्सलाम से आपके पहले बेटे पैदा हुए इस्माईल अलैहिस्सलाम, और सारा अलैहिस्सलाम से पैदा हुए इसहाक अलैहिस्सलाम। इसहाक अलैहिस्सलाम के बेटे थे याकूब अलैहिस्सलाम, जिन्हें इसराईल भी कहा जाता है। याकूब अलैहिस्सलाम की नस्ल से एक के बाद एक नबी तशरीफ़ लाए — यूसुफ अलैहिस्सलाम, मूसा अलैहिस्सलाम, दाऊद अलैहिस्सलाम, सुलेमान अलैहिस्सलाम, और यह सिलसिला चलता रहा यहाँ तक कि ईसा अलैहिस्सलाम तक पहुँचा। दूसरी तरफ इस्माईल अलैहिस्सलाम के बारह बेटे हुए, जिनमें से मशहूर हुए कैदार, और उसी नस्ल से आगे चलकर अदनान पैदा हुए। फिर नस्ल दर नस्ल यह सिलसिला चलता रहा — माज़, नज़ार, मुदर, इलियास, मुद्रिका, खुज़ैमा, किना, नज़र, मालिक, और फिर फिहर जिन्हें कुरैश का असल बुज़ुर्ग माना जाता है। इसी मुबारक नस्ल से आगे ग़ालिब, लुआई, काब, मुर्राह, किलाब, कुसई, अब्द मनाफ, हाशिम, अब्दुल मुत्तलिब, अब्दुल्लाह और फिर दुनिया की सबसे अज़ीम हस्ती, इमामुल अंबिया, खातमुन नबीयीन, रहमतुल्लिल आलमीन — मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाए। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तीन बेटे थे — क़ासिम, अब्दुल्लाह और इब्राहीम, और चार बेटियाँ — ज़ैनब, रुकय्या, उम्मे कुलसूम और फ़ातिमा ज़हरा रज़ियल्लाहु अन्हा। यह वह ख़ानदान है जिसे अल्लाह तआला ने नबूवत, रहनुमाई और इज़्ज़त की बुलंदियों से नवाज़ा। अगर यह मालूमात आपको फ़ायदेमंद लगी हो तो इस पैग़ाम को आगे तक ज़रूर पहुँचाइए,और ऐसी ही इल्मी और तारीखी वीडियोज़ के लिए चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।
04/03/2026
अमेरिकी नौसेना (U.S. Navy sailor) के पूर्व जवान और 1967 के USS Liberty हमले के जीवित बचे Philip Tourney ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है!
मई 2025 में ऑबर्न, अलबामा में आयोजित "Revisionist History of War" कॉन्फ्रेंस में दिए गए भाषण में उन्होंने कहा था -
"हमने अपनी ताकत एक विदेशी देश को सौंप दी है!
हमें नियंत्रित करता है!
वे Congress (अमेरिकी पार्टी) को नियंत्रित करते है!
वे Senate को नियंत्रित करते है!
वे हमारे पैसे को नियंत्रित करते है!
हमारा अपना देश अब हमारा नहीं रहा!
Zionist राज्य इसे चलाता है!
मैं इससे तंग आ चुका हूं"
1967 में 8 जून को इज़राइली सेनाओं ने अमेरिकी जासूसी जहाज़ USS Liberty पर हमला किया था, जिसमें 34 अमेरिकी नाविक मारे गए और 171 घायल हुए!
Philip Tourney का आरोप है कि अमेरिकी सरकार ने इस हमले को छिपाया और मदद नहीं भेजी, ताकि इज़राइल की छवि खराब न हो!
बता दूं, USS लिबर्टी सर्वाइवर्स एसोसिएशन लंबे समय से इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है!
इसराइल बहुत पहले से ही अमेरिका को अपनी उंगलियों पर चला रहा है!
Video in comment section......
यह देश के लिए अत्यंत शर्मनाक है
ईरान का जहाज भारत के साथ साझा अभ्यास करने आया था,उस जहाज को अमेरिका ने डूबा दिया है
वो भी हमारी समुद्री सीमा के बॉर्डर पर
क्या हम इतने निर्बल हो गए है कि न्योता दे कर बुलाया गया था उनकी सुरक्षित निकासी भी नहीं करवा सकते
भारत के बुलावे पर ईरान ने अपना ये जहाज भेजा था, मतलब ये हमारे मेहमान थे.
भारत से लौटते हुए अमेरिका ने इसे हिंद महासागर में डुबा दिया.
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