RAMESH SINGH
दुर्गम वन है बड़े घनेरे छाँव की यहां की छलना है
अभी पथिक विश्राम कहां बहुत दूर तक चलना है।
।।जय श्री राम।।
13/09/2025
घने जंगल में, एक ऊँचे पेड़ पर, राजू तोता और कालू कबूतर रहते थे। राजू को अपनी सुंदर हरी पंखों पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कालू का मज़ाक उड़ाता था, जिसकी पंख भूरी और साधारण थीं। एक दिन, अचानक, जंगल में आग लग गई। राजू घबराकर उड़ने लगा, लेकिन धुएँ के कारण उसे रास्ता नहीं दिख रहा था।
तभी कालू ने, जिसने आसपास सब कुछ देखा हुआ था, राजू से कहा, "मेरे पीछे आओ!"
राजू ने उसकी बात मानी। कालू ने बिना डरे, धुएँ से भरे रास्ते से उड़ान भरी और राजू को सुरक्षित बाहर निकाल लाया।
राजू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कालू से माफ़ी माँगी और कहा, "दोस्ती खूबसूरती से नहीं, बल्कि हिम्मत और सच्चे दिल से बनती है।"
Moral of the Story: सच्चा दोस्त वही होता है जो मुश्किल समय में साथ दे।
09/08/2025
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
उपरोक्त श्लोक राखी बांधते समय सुनाया जाता है इसका सरल अर्थ है ..
जिस राखी को दानवों के राजा बली को बांधा गया था, इस राखी को मैं तुम्हें बांधता हूं /बांधती हूं यह हमेशा तुम्हारी रक्षा करेगा ।
रक्षाबंधन कैसे आरंभ हुआ..?
यह पर्व लक्ष्मी जी का राजा बली को राखी बांधने से जुडा हुआ है। इसके लिए पुराणों में एक कथा है जो इस प्रकार है-- जब दानवों के राजा बलि ने अपने यज्ञ पूरे कर लिए तो उन्होंने चाहा कि उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो, राजा बलि कि इस मनोइच्छा का भान देव इन्द्र को होने पर, देव राज इन्द्र का सिहांसन डोलने लगा।
जब देवराज इंद्र को कोई उपाय नहीं सूझा तो वो घबरा कर भगवान विष्णु की शरण में गए, और बलि की मंशा बताई तथा उन्हें इस समस्या का निदान करने को कहा।
देवराज इंद्र की बात सुनकर भगवान विष्णु वामन अवतार ले, ब्राह्मण वेश धर कर, राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंच गए क्योंकि राजा बलि अपने दिए गए वचन को हर हाल में पूरा करते थे।
जब राजा बलि ने ब्राह्मण बने श्री विष्णु से कुछ माँगने को कहां तो उन्होंने भिक्षा में तीन पग भूमि मांग ली। राजा बलि ने उन्हें तीन पग भूमि दान में देते हुए कहा कि आप अपने तीन पग नाप लें ।
वामन रुप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग ओर दूसरे पग में पृ्थ्वी को नाप लिया। अभी तीसरा पैर रखना शेष था। बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया। आखिरकार उसने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहा-- तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए।
वामन भगवान ने ठीक वैसा ही किया, श्री विष्णु के पैर रखते ही, राजा बलि पाताल लोक पहुंच गए। बलि के द्वारा वचन का पालन करने पर, भगवान विष्णु अत्यन्त खुश हुए, उन्होंने आग्रह किया कि राजा बलि उनसे कुछ मांग लें।
इसके बदले में बलि ने रात दिन भगवान को अपने सामने रहने का वचन मांग लिया । श्री विष्णु को अपना वचन का पालन करते हुए राजा बलि का द्वारपाल बनना पडा।
जब यह बात लक्ष्मी जी को पता चली तो उन्होंने नारद जी को बुलाया और इस समस्या का समाधान पूछा। नारद जी ने उन्हें उपाय बताया कि आप राजा बलि को रक्षासूत्र बाँध कर उन्हें अपना भाई बना लें और उपहार में अपने पति भगवान विष्णु को मांग लें ।
लक्ष्मी जी ने ऐसा ही किया । उन्होंने राजा बलि को राखी बाँध कर अपना भाई बनाया और जब राजा बलि ने उनसे उपहार मांगने को कहा तो उन्होंने अपने पति विष्णु को उपहार में मांग लिया।
जिस दिन लक्ष्मी जी ने राजा बलि को राखी बाँधी उस दिन श्रावण पूर्णिमा थी। कहते हैं की उस दिन से ही राखी का त्योहार मनाया जाने लगा।
#रक्षाबंधन 📿🪷🙏🏻
30/07/2025
मात्र अपनी एक तस्वीर से पूरा इंटरनेट हिला देने वाले शख्स का नाम है MS Dhoni ❤️
Forever Young ✌️
Click here to claim your Sponsored Listing.
Contact the business
Telephone
Website
Address
Bhagalpur
813204