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बिना पैरों के भी लाँघ जाते हैं महासागर...

नीचे जो पहली दो तस्वीरें आप देख रहे हैं, वे बाओबॉब के पेड़ों की हैं। ये पेड़ अफ्रीकी महाद्वीप की पहचान माने जाते हैं। इन्हें वहाँ पर ट्री ऑफ लाइफ कहा जाता है।

बाओबॉब पेड़ों की प्री-हिस्टोरिक प्रजाति के माने जाते हैं और दो करोड़ सालों से धरती पर मौजूद हैं।
वे अफ्रीकी सवाना के सबसे बेहद शुष्क जलवायु वाले हिस्से में भी फलते-फूलते हैं।
और मजे की बात यह है कि ये किसी विशालकाय बोतल जैसे दिखने वाले अपने तनों में ढेर सारा पानी स्टोर करके रखते हैं।
यह भी माना जाता है कि ये पेड़ पाँच हजार सालों तक जी सकते हैं और तीस मीटर की ऊँचाई वाले हो सकते हैं।
इनके फलों को सुपर फ्रूट मे शुमार किया जाता है, जिसमें ढेर सारा एंटीऑक्सीडेंट और ऊर्जा होती है। वे प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाते हैं।

ये तो रही बाओबॉब के पेड़ों की बात। एक दिन पहले मैक्सिको के एक पेड़ की फोटो डाली तो फेसबुक मित्र विनोद ने इलाहाबाद के झूंसी में भी मौजूद ऐसे ही एक पेड़ के सामने अपने दोस्तों की फोटो साझा की।
मैंने वन्यजीवन से जुड़े अपने कुछ मित्रों को फोटो दिखाई तो उन्होंने कहा कि ये बाओबॉब के पेड़ हो सकते हैं।
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि अफ्रीकी महाद्वीप का यह विशालकाय दैत्य कैसे हमारे यहाँ आ गया।
विनोद जी ने उस पेड़ के बारे में बड़ी आश्चर्यजनक कहानी भी साझा की।
उन्होंने लिखा कि यहाँ के आसपास के लोगों का मानना है कि यह अरब का पेड़ है।
हजार साल पहले कोई हजरत मक्का गए थे और वहाँ से दातुन लेकर आए।
उन्होंने दातुन को गंगा के किनारे लगा दिया, तो अब यह पेड़ वही है।

खैर, अफ्रीकी बाओबॉब के पेड़ों से मैं पहले परिचित था।
लेकिन, इलाहाबाद में उसकी मौजूदगी के बाद जब मैंने इस संबंध में कुछ पढ़ाई करनी शुरू की तो पता चला कि भारत में तमाम जगहों पर ये पेड़ मौजूद हैं।
खासतौर पर पुर्तगाली लोग इसे शुभ मानते थे। वे जहाँ भी जाते थे, इनके बीजों को लेकर जाते थे और उसके पेड़ लगाने की कोशिश करते थे।

मांडू के आसपास भी इस तरह के बाओबॉब के पेड़ लगे हुए हैं।
और तो और जानकर बहुत हैरत हुई कि महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर गोरखचिंची नाम से इसके फलों को बेचा भी जाता है और लोग शौक से खाते भी हैं।

बिना पैरों वाले पेड़ों की यात्राएं भी गजब होती हैं।
महाद्वीपों को भी वे अपनी छलांगों से लाँघ देते हैं।
दिल्ली की सड़कों पर लगे बालमखीरा के पेड़ भी ऐसे ही हजारों किलोमीटर समुद्रों की यात्रा करके अफ्रीका से भारत पहुँचे हैं।
(पहली दो फोटो अफ्रीका में लगे बाओबॉब के पेड़ की है जो ट्विटर से ली गई है। जबकि, तीसरी तस्वीर विनोद भाई द्वारा साझा की गई इलाहाबाद के झूंसी में लगे हुए पेड़ की है।)

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