Krithaa Store
Authenticate the handmade Laddu Gopal ji and Kanha Dresses website. Find the best one trending design
13/12/2025
कभी-कभी दिन अपने आप संकेत देता है कि आज मन को थोड़ी स्थिरता चाहिए, थोड़ी गहराई, और थोड़ा साहस. आज की तिथि का गुण भी यही कहता है:
“जो कदम भीतर से जन्म ले, वही आपको आगे ले जाए.”
महाभारत में एक बिल्कुल ऐसा ही क्षण आया था. अर्जुन खड़े थे, पर मन बैठ गया था.
दुनिया सामने थी, लेकिन दृष्टि धुंधली.
और उसी समय श्रीकृष्ण ने वह अमर वाक्य कहा जिसने योद्धा को फिर से जन्म दे दिया:
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन |
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ||"
भाव बहुत सरल है.
कर्म का अधिकार आपका है,
लेकिन परिणाम का बोझ आपका नहीं.
मन फल के गणित में उलझते ही निर्णय कमजोर हो जाता है,
और कृष्ण यही गांठ काटते हैं.
कहते हैं अर्जुन ने उस क्षण पहली बार महसूस किया कि
भय निर्णय नहीं रोकता,
फल की चिंता रोकती है.
Khatu Shyam ji की कृपा भी इसी सत्य को और सहज बना देती है.
जो भक्त कहता है,
“श्याम, मैं अपना प्रयास आपको समर्पित करता हूँ,”
उसके रास्ते से अवरोध धीरे-धीरे हटने लगते हैं.
क्योंकि समर्पण मन को हल्का कर देता है,
और हल्का मन आगे बढ़ने से डरता नहीं.
आज बस इतना करिए:
एक काम जिसे आप टाल रहे थे,
उसे बिना परिणाम का बोझ लिए शुरू कर दीजिए.
आपका कदम छोटा हो सकता है,
लेकिन उसका प्रभाव बहुत बड़ा हो सकता है.
कृष्ण का ज्ञान और श्याम की कृपा
जब एक साथ चलने लगते हैं,
तो रास्ते कठिन नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण लगने लगते हैं.
Click here to claim your Sponsored Listing.
Website
Address
Delhi
110085