Ish-Pi Positive Life

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10/07/2026
10/07/2026

क्या आप यकीन करेंगे कि आज आपकी जेब में रखा एक साधारण स्मार्टफोन उस कंप्यूटर से लाखों गुना ज्यादा ताकतवर है जिसे कभी दुनिया का पहला आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर कहा जाता था और जिसे चलाने के लिए पूरे कमरे जितनी जगह और भारी मात्रा में बिजली की जरूरत पड़ती थी।

यह कहानी है ENIAC की जिसे दुनिया का पहला General Purpose Electronic Computer माना जाता है इसका पूरा नाम Electronic Numerical Integrator and Computer था और इसे उन्नीस सौ छियालीस में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया उस समय लोगों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।

आज जब हम लैपटॉप और मोबाइल को आसानी से अपने बैग या जेब में रख लेते हैं तब यह जानकर हैरानी होती है कि ENIAC इतना विशाल था कि उसे रखने के लिए लगभग एक हजार आठ सौ वर्ग फीट जगह चाहिए होती थी यानी पूरा का पूरा एक बड़ा कमरा सिर्फ उसी मशीन के लिए बनाया जाता था।

अगर इसके वजन की बात करें तो ENIAC का वजन लगभग तीस हजार किलोग्राम यानी करीब तीस टन था यह वजन कई हाथियों या दर्जनों छोटी कारों के बराबर माना जाता है इसलिए इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना लगभग असंभव जैसा काम था।

इस विशाल मशीन के अंदर लगभग सत्रह हजार चार सौ अड़सठ वैक्यूम ट्यूब लगी थीं साथ ही हजारों रेजिस्टर कैपेसिटर और लाखों तारों का जाल बिछा हुआ था जब यह मशीन चलती थी तब इतनी गर्मी पैदा होती थी कि पूरे कमरे को ठंडा रखने के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ती थी।

अब सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मशीन बनाई ही क्यों गई थी दरअसल ENIAC को आम लोगों के लिए नहीं बल्कि अमेरिकी सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया था इसका सबसे महत्वपूर्ण काम तोप के गोलों की दिशा दूरी और गति जैसी जटिल गणनाएँ बेहद तेज़ी से करना था जिनमें पहले कई दिन लग जाते थे।

बाद में वैज्ञानिकों ने इसी कंप्यूटर का उपयोग परमाणु अनुसंधान मौसम का पूर्वानुमान इंजीनियरिंग और कई कठिन वैज्ञानिक परियोजनाओं में भी किया क्योंकि उस समय इतनी तेज़ गणना करने वाली दूसरी कोई मशीन मौजूद नहीं थी और यही वजह थी कि ENIAC ने कंप्यूटर विज्ञान की दिशा ही बदल दी।

हालाँकि आज के हिसाब से इसकी गति बहुत कम लगती है यह लगभग पाँच हजार जोड़ प्रति सेकंड कर सकता था लेकिन उस दौर में यही क्षमता वैज्ञानिकों के लिए किसी क्रांति से कम नहीं थी क्योंकि इंसान जिन गणनाओं में कई घंटे या कई दिन लगाते थे ENIAC उन्हें कुछ ही मिनटों में पूरा कर देता था।

समय के साथ तकनीक लगातार बदलती गई पहले कमरे जितने बड़े कंप्यूटर आए फिर अलमारी जितने छोटे हुए उसके बाद डेस्कटॉप बने फिर लैपटॉप आए और आज वही तकनीक हमारी जेब में रखे स्मार्टफोन तक पहुँच चुकी है जिसकी ताकत ENIAC से लाखों गुना अधिक है और वह बैटरी पर भी चल सकता है।

ENIAC केवल एक मशीन नहीं था बल्कि आधुनिक डिजिटल दुनिया की शुरुआत का प्रतीक था अगर यह कंप्यूटर नहीं बनता तो शायद आज इंटरनेट स्मार्टफोन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुपरकंप्यूटर जैसी तकनीकें इतनी तेजी से विकसित नहीं हो पातीं क्योंकि हर नई खोज की नींव किसी पुरानी खोज पर ही रखी जाती है।

आज जब हम कुछ सेकंड में वीडियो देखते हैं गेम खेलते हैं ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बातें करते हैं तब शायद ही सोचते हों कि कभी यही काम करने की दिशा में पहला कदम एक तीस टन वजनी कंप्यूटर ने उठाया था जिसने पूरी दुनिया की तकनीक को हमेशा के लिए बदल दिया।

अब आपकी बारी अगर आपको मौका मिले तो क्या आप उस ऐतिहासिक ENIAC कंप्यूटर को अपनी आँखों से देखना चाहेंगे जिसने आधुनिक कंप्यूटर युग की शुरुआत की।

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