Sunil Kumar

Sunil Kumar

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Advocate at Supreme Court , High Court and tribunals

22/03/2022

सेनारी नरसंहार, बारा नरसंहार के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं, ये दोनों नरसंहार लालू यादव के द्वारा संरक्षित सरकारी आतंकी संगठन MCC द्वारा किया गया था, लालू जी भी भाजपा की तरह एक जाति विशेष को villain बताकर हरिजन को अपने पक्ष में करने के लिए इस्तेमाल करते थे, MCC भूमिहार को टार्गेट करती थी और प्रतिशोध में भूमिहार हरिजन को, Senari नरसंहार में लालू जी की रणनीति उजागर हुयी, मिया पुर में यादव टार्गेट बने तो लालू जी को अपना खेल बदलना प़डा, नरसंहार की जाँच की सारी जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की थी, जाँच ऐसी हुयी कि सारे आरोपी बरी हो गए जैसे उन लोगों ने आत्महत्या की हो,कश्मीर से ज्यादा भयावह स्थिति उस समय Central Bihar की थी, लेकिन संघर्ष किया, Corona आया लोगों ने संघर्ष किया, कश्मीर Files की तरह का संघर्ष हर किसी के जीवन में चल रहा है और ऐसे संघर्ष से ही व्यक्ति ताकतवर भी होता है, लेकिन ये लोग safe passage लेकर निकल लिए, सरकार ने दिल्ली में रहने की पूरी व्यवस्था की, तीस साल पहले की एक घटना जो 19 जनवरी 1990 को घटित हुयी जब केंद्र में भाजपा समर्थित VP Singh की सरकार थी और भाजपा के दबाब में बिना राज्य सरकार की सहमति के नियुक्त राज्यपाल, यही वजह थी कि फारूक अब्दुल्ला ने इस्तीफा दिया और पंडितों के खिलाफ आग भड़काया, भाजपा समर्थित सरकार उनकी रक्षा करने में विफल रही, आडवाणी जी गिरफ्तार हुए तो सरकार गिरा दी लेकिन कश्मीर की घटना के लिए कुछ भी नहीं, Congress विपक्ष में थी, राजीव गांधी ने Parliament का घेराव किया, फिर भी वही जिम्मेदार? जो narrative set की जा रही वो गलत है, आज की राजनीति के मौत के सौदागर कब्र खोदकर राजनीति करना चाह रहे हैं, इसके अलावा ये और कुछ नहीं है

18/07/2021

किसानों की असली समस्या कभी सरकार तक पहुंच नहीं पाती, एक उदाहरण के तौर पर चर्चा करना चाहूँगा कि किस तरह नोएडा प्राधिकरण किसानों के साथ व्यवहार करती है और क्यूँ? प्राधिकरण ने अपना Development Area किसी कागज के टुकड़े पर लकीर खिंचकर बना दिया, जमीन का अधिग्रहण और मुआवजा बाद में दिया जाएगा, लेकिन कब तक, एक मामला जिसका जिक्र करने जा रहा हूं वो 1976-79 का है, अभी तक न तो अधिग्रहण किया गया है, न ही कोई नोटिस है, न कोई मुआवजा, किसानों की generation गुजर गयी, क्या मायने रखता है Development Area का? गाँव की जनसंख्या बढ़ती गयी, गाँव के आसपास slum type आवादी बस्ती गई उस पर कोई नियंत्रण नहीं, जब गाँव के किसान बेहतर तरीके से रहने के लिए आवादी की जमीन को land pooling करके एक boundary wall बनाकर 25000 मीटर के प्लॉट पर Noida बिल्डिंग bye laws के अनुरूप नक्शा को नगर पंचायत से पास कराकर सभी आधुनिक सुविधाओं वाला सोसाइटी बनाना चाहा और 90% काम हो जाने के बाद Noida प्राधिकरण के अधिकारियों ने काम रुकवा दिया, इनके तर्क हास्यास्पद है कि किसान अपनी जमीन पर सात मंजिला इमारत खड़ी कर सकता है लेकिन Builder की तरह की सोसाइटी नहीं बना सकता, क्योंकि फिर प्राधिकरण की जमीन कौन खरीदेगा? Builder के flat कैसे बिकेंगे? नोएडा प्राधिकरण सत्ता में बैठे राजनीतिक दल के लिए वसूली का उद्योग है, योगी जी की ईमानदारी पर शक नहीं कर रहा लेकिन मुद्दा उनके अधिकार क्षेत्र में है, किसान को भी सम्मान पूर्वक आवास का हक है, कानूनी तौर पर नोएडा प्राधिकरण एकदम गलत है, अधिकारी सतही तौर पर सभी प्राधिकरण के अधिकार को एकरूप समझ लेते हैं, Noida प्राधिकरण और Ghaziabad प्राधिकरण के Development Area प्रावधान अलग अलग है, काग़ज़ पर लकीर खींचकर Development Area बताने का अधिकार Noida के पास नहीं है, GDA के पास है, हालांकि वो भी अनुचित है, अगर Development Area घोषित किया है तो पांच साल के अंदर मुआवजा देकर अधिग्रहण करना चाहिए, इस lock down के दौरान सभी बिल्डर का काम रुका प़डा है, किसानों की सोसाइटी अपने फंड से Noida बिल्डिंग bye laws के अनुरुप काम करना चाह रही है तो प्राधिकरण करने नहीं दे रहा है, UP सरकार की एक GO है जिसमें सभी प्राधिकरण को संबोधित करते हुए कहा गया है कि अगर सोसाइटी अपने खरीदी जमीन पर निर्माण कार्य करना चाहती है तो कर सकती है लेकिन तब Noida प्राधिकरण कहती है कि ये GO औद्योगिक प्राधिकरण पर लागू नहीं होता, Noida bye laws में प्रावधान है कि विकास शुल्क लेकर अनुमति दी जा सकती है, प्रार्थना पत्र शासन के पास चार साल से लंबित है, वहाँ Noida प्राधिकरण कहती है कि ये गाँव की जमीन पर है इसलिए हम शुल्क नहीं ले सकते हैं, वही तो हम कहते हैं कि ये जमीन जिला पंचायत के नियमों के अधीन है तो वहाँ Noida प्राधिकरण की दादागिरी, ये सब योगी जी के राज में भी हो रहा है, योगी जी ध्यान दें, किसानों को प्रताड़ित न करें, DDA ने भी दिल्ली में 2000 मीटर से बड़े प्लाट जो कि गाँव के पास है नक्शा पास करने का प्रावधान किया है, पूरे NCR के building bye laws में एकरूपता होनी चाहिए, आखिर NCR Planning Board बना ही किस लिए है? मोदी जी, कानून मंत्री जी, शहरी विकास मंत्री जी ध्यान दें, किसानों की उचित माँग स्वीकार किया जाय, मैं बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे फर्जी किसानों की बात नहीं कर रहा, ये बात अलग है कि प्रताड़ित किसान सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए साथ हो जाते हैं, बोर्डर पर नोएडा के प्रताड़ित किसान जरूर होंगे, इसलिए एक एक कर किसानों की जो उचित माँग है, उनकी जो परेशानी है उसे दूर करने का प्रयास किया जाय, जय हिंद जय भारत

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