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02/02/2025
कर्म ही नियति है 'अकेला'
यह शब्द कभी अकेला नहीं रहा
इसके सान्निध्य में रहे हैं
दुःख, वेदना, साहस और
थोड़ी सी नीरसता।
नाव के साथ कभी नहीं रही नाव
वरना क्यों होती
डूबती हुई नाव की परिकल्पना ?
नाव को यह विदित है कि
पार लगाना ही है उसका एकमात्र धर्म।
नदियों के पास नहीं होती
अपनी कोई नदी
उनका सूख जाना
इस बात का प्रमाण है।
उन नदियों का दुःख
और होटल में काम कर रहे
भूखे पेट सोए बच्चे का दुःख
एक ही माँ की दो संतानें हैं।
हम अपने साथ कभी नहीं होते
जबकि हमारे साथ पूरी दुनिया होती है।
स्वयं का स्वयं के साथ नहीं होना
अपेक्षाओं को जन्म देता है
और हम आप से ही
दूर होते चले जाते हैं।
हम सब अपनी मुक्ति के माध्यम स्वयं हैं
हमारा कर्म ही हमारी नियति है।
किताब -नदियाँ नहीं रुकतीं (कविता- संग्रह)
लेखक : आदित्य रहबर
प्रकाशक -पंक्ति प्रकाशन
11/05/2024
When your Family have high expectations from you but you're failing at everything'💔
05/05/2024
5 may 2024 1st contract
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