Shatakshi ki Duniya

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04/06/2026

Shatakshi papa ki Masti Rahul Awasthi

Photos from ShailRahul 's post 18/01/2025
Photos from ShailRahul 's post 18/01/2025

" बहु डिलीवरी के लिए अपनी बहन को बुला लो। मेघा तो नहीं आ पाएगी। और मुझसे अकेले होगा नहीं। आखिर मेघा
भी ससुराल वाली है। उसके ससुराल वाले भेजे तो भेजे, नहीं तो नहीं भेजें" शोभा जी अपनी बहू नमिता से बोली। " पर मम्मी जी अगले महीने तो उसकी परीक्षा है। वो परीक्षा की तैयारी करेगी या मेरी सेवा करेगी"
नमिता ने कहा। " अब बहू तू खुद देख ले। मुझसे तो होगा नहीं। या फिर तु अपने मायके चली जा" " मम्मी जी मायके में कौन करेगा? मेरी मम्मी होती तो फिर इतनी परेशानी ही क्यों होती?" नमिता ने धीरे से कहा।
" तो फिर अपनी बहन को ही बुला ले। उसे कौन सा पढ़ लिखकर बैरिस्टर बनना है। आकर कुछ दिनों के लिए संभाल जाएगी" "मम्मी जी इन्होंने कहा भी तो था कि कामवाली रख लेंगे" नमिता ने कहा। "ना बाबा ना, मैं अपने घर को कामवाली के भरोसे नहीं छोड़ सकती। और फिर उसकी निगरानी कौन करेगा। तू तो बस तेरी बहन को बुला ले" " मम्मी अगले महीने से तो तनु की परीक्षा है। वो भला यहां कैसे आएगी। और फिर उसे तैयारी भी तो करनी है" अचानक समीर ने कमरे में आते हुए कहा।
" अरे तो अपनी बहन को संभालते हुए पढ़ भी लेगी। कौन सा इतना काम करना है उसे। भला काम ही क्या है हमारे घर में" " अपना घर तो अपना घर ही होता है मम्मी। इंसान अपने घर में आराम से और बेफिक्री से पढ़ सकता है, वो किसी और के घर पर नहीं हो पाता। नहीं नहीं तनु की पढ़ाई का नुकसान होगा। मैं एक काम करता हूं। मैं मेघा दीदी के ससुराल बात कर लेता हूं। मुझे यकीन है कि उनके सास ससुर उन्हें जरूर भेज देंगे"
" रहने दे। उसके सास ससुर तो भेजने को तैयार है। पर मेघा पंद्रह दिन के लिए हिल स्टेशन पर घूमने जा रही है, इसलिए नहीं आ पाएगी" अचानक शोभा जी ने कहा तो कमरे में खामोशी सी छा गई। दोनों को इतना चुप देखकर शोभा जी ने फिर कहा,
" अरे इसमें इतनी हैरानी की क्या बात है। बड़ी मुश्किल से उसके घूमने का प्रोग्राम बना है इसलिए मैंने ही उसे आने से मना कर दिया" " पर जीजा जी ने तो पहले कहा था कि वो मेघा दीदी को नमिता की डिलीवरी के समय यहां पर भेज देंगे। फिर अचानक कैसे प्रोग्राम बना दिया"
" तेरे जीजा जी नहीं जा रहे हैं। वो तो अपनी ननद और जेठानी के परिवार के साथ जा रही है"
" पर, ऐसे कैसे?" समीर ने धीरे से कहा। " ऐसे कैसे से क्या मतलब है? मेघा के भरोसे तो डिलीवरी नहीं हो रही है ना। बड़ी मुश्किल से उसका घूमने का प्रोग्राम बना है। मैं उसे मना नहीं करूंगी। कुछ दिनों की तो बात है। बुला लो तनु को। बाद में तो मेघा आ ही जाएगी" समीर ने नमिता की तरफ देखा तो नमिता ने भी फिर तनु को बुलाने के लिए कहा, " आप तनु को ही बुला लीजिए। आखिर पंद्रह बीस दिन बाद तो मेघा दीदी आ ही जाएगी" नमिता ने उसके बाद तनु को फोन कर दिया और उसे अपने पास बुला लिया। तनु भी खुशी खुशी नमिता के पास आ गई। आखिर नमिता को पूरा टाइम चल रहा था। डिलीवरी कभी भी हो सकती थी। तनु के आने के दो दिन बाद ही नमिता ने एक बेटे को जन्म दिया।
अस्पताल में तो समीर और शोभा जी ने जैसे तैसे संभाला। लेकिन जैसे ही नमिता को घर पर लेकर आए, उसके बाद सारी जिम्मेदारी शोभा जी ने तनु पर डाल दी। घर के काम तो फिर भी ठीक थे लेकिन नवजात बच्चे और नमिता को कैसे संभाले। शोभा जी तो रात को अपने कमरे में जाकर सो जाती और तनु को नमिता की जिम्मेदारी दे देती। तनु को भी कोई चीज समझ में नहीं आती। आखिर एक कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की कितना क्या ध्यान रख लेती। जैसे नमिता कहती वैसे वो कर देती थी। समीर ने दो दिन तक ये सब देखा। उसके बाद उसने एक काम वाली रख ही ली। कामवाली नमिता और उसके बच्चे का काम कर जाती। उनकी मालिश करना,नहलाना, उनके कपड़े धोना सारा काम कामवाली करके जाती। इस पर भी शोभा जी को समस्या थी।
" क्या जरूरत थी तुझे कामवाली रखने की‌। अगर मेघा आती तब तो कामवाली नहीं रखता। अपनी साली के लिए तो कामवाली रख ली" " मम्मी मेघा दीदी के दो बच्चे हो चुके हैं। उन्हें अच्छे से पता है कि इस समय एक औरत को क्या जरूरत होती है। और बच्चे कैसे संभाले जाते हैं‌। तनु से आप क्या उम्मीद करते हो। आपने तो सारा काम तनु पर डाल दिया। तो फिर मैं क्या करता" लेकिन शोभा जी को तो जैसे चैन ही नहीं था। वो तो तनु के पीछे हाथ धोकर पड़ चुकी थी। घर के सारे काम करने के बाद जब तनु पढ़ने बैठती तो उसे कोई ना कोई काम बता ही देती। ये सब नमिता को भी समझ में आ रहा था। पर वो अभी कुछ नहीं कर सकती थी।
तनु के हर काम से उन्हें समस्या थी। " अरे पता नहीं अपनी मम्मी के जाने के बाद घर कैसे संभालती होगी। इसे तो कुछ भी नहीं आता है। ना ही ढ़ंग का
खाना बनाना आता है, और ना ही घर के काम" कई बार तो ये सब वो तनु के मुंह पर बोल चुकी थी। पर तनु चुप ही रहती। आखिर दीदी का ससुराल था। ज्यादा कुछ कह भी नहीं सकते थे। जैसे तैसे कर बीस दिन निकले। मेघा अपने मायके आ गई। समीर ने तनु को घर छोड़कर आने के लिए कहा तो शोभा जी ने कहा," अरे दो दिन बाद तो नहावन है ही। तब इसके पापा आएंगे ही अपने नाती और बेटी के कपड़े लेकर। उस समय इसे लेते जाएंगे। क्यों बेवजह जाने का खर्चा कर रहा है"
" हां भाई, तनु दो दिन बाद चली जाएगी। वैसे मैं भी बहुत थकी हुई हूं। पहाड़ों की चढ़ाई चढ़कर हाथ पैर ही दुख रहे हैं। अभी तनु संभाल तो रही है। एक-दो दिन मुझे भी आराम मिल जाएगा। फिर तो भाभी की सेवा में ही लगना है" मेघा ने कहा। " ठीक है मम्मी, पर तनु के लिए कुछ ढंग का गिफ्ट ले आना। आखिर यहां से खाली हाथ थोड़ी ना जाएगी। या फिर बाजार जाकर उसे आप खुद ही दिलवा कर ले आओ। वो अपनी पसंद का ही कुछ ले आएगी" समीर ने कहा। " अरे उसे क्या देना है? पांच सौ रूपए दे देना और विदा कर देना" शोभा जी ने कहा। " मम्मी कैसी बातें कर रही हो? आखिर तनु नमिता की छोटी बहन है। ऊपर से उसने इतने दिन से काफी हद तक काम संभाल लिया। आखिर वो भी नेग की हकदार है" " देख समीर, अपने यहां तो रिवाज नहीं है बहू के मायके वालों को नेग देने का। तेरी इतनी ही इच्छा है तो ज्यादा से ज्यादा एक सूट और ₹500 दे देना। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं देने दूंगी" शोभा जी तुनकते हुए बोली। " और जरा अपने ससुर जी को समझा देना कि नेग में क्या-क्या लगेगा। नहावन के दिन वो सारा सामान लेकर के आए। और कह देना कि मेरी और मेघा की साड़ी थोड़ी ढंग की लेकर आए। मैं हल्की-फुल्की साड़ी नहीं पहनूंगी और ना हीं मेरी बेटी पहनेगी"
खैर, नहावन का दिन भी आ गया। नमिता के पापा जब आए तो अपने साथ नाती और अपनी बेटी के साथ साथ घर के
सभी सदस्यों के लिए कपड़े और शगुन के लिफाफे लेकर आए थे।
जब नमिता के पापा जाने लगे तो तनु भी उनके साथ रवाना होने लगी। उसी समय शोभा जी ने एक सूट और ₹500 का
लिफाफा उसे पकड़ाते हुए कहा,
" ये हमारी तरफ से तुम्हारा नेग। आखिर तुमने इतने दिन अपनी बहन की सेवा जो की है। उसका तो ये प्रतिफल बनता ही है"
लेकिन तभी समीर वहां आ गया और उसने एक और लिफाफा तनु के हाथ में पकड़ा दिया। और कहा," ये मेरे और नमिता की तरफ से तुम्हारे लिए। तुम्हें जो खरीदना है, अपनी पसंद का खरीद लेना" ये देखकर शोभा जी गुस्सा हो गई। लेकिन उस समय उन्होंने कुछ नहीं कहा। तनु अपने पापा के साथ रवाना हो गई। उनके जाते ही शोभा जी ने कहा, " समीर यह क्या हरकत है? जब मैंने तनु को विदाई दे दी थी तो तुझे अलग लिफाफा देने की क्या जरूरत थी" " मम्मी इसमें गलत क्या है? आखिर वो भी तो नेग की हकदार है। अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़कर वो यहां अपनी बहन की सेवा करने आ गई, वही बड़ी बात है। उसके बदले अगर हमने खुश होकर उसे थोड़ा बहुत दे दिया तो क्या हर्ज है" " पर हमारे यहां बहू की बहन को नेग देने का रिवाज नहीं है। ये क्या उल्टी गंगा बहा रहा है" अब की बार मेघा ने कहा। " क्यों दीदी? जब जरूरत थी तब बहू की छोटी बहन को बुला लो। और नेग देने के नाम पर रिवाज नहीं है। भला ये क्या बात हुई। नेग का असल हालदार तो वही होना चाहिए जो असल में काम कर रहा है। सिर्फ रिश्ते नाते से नेग के हकदार नहीं बन जाते। उसके मायके वालों से तो नेग लेने के लिए आप लोग तैयार हो गए। लेकिन जब काम की बात थी तो पीछे हट गए। मम्मी दीदी की डिलीवरी के समय तो आपने भाग भाग कर काम किया था। फिर बहू के डिलीवरी के समय क्या हो गया। बुरा मत मानना मम्मी। लेकिन अभी जो व्यवहार आप बहू के साथ करोगी, वही उसे जिंदगी भर याद रहने वाला है। क्योंकि अपने डिलीवरी के समय को कोई औरत नहीं भूलती"समीर ने कहा तो शोभा जी आगे कुछ कह नहीं पाई। आखिर बोल भी क्या सकती थी। समीर गलत तो नहीं कह रहा था। इसलिए अपने आप ही सब चुप हो गए, क्योंकि आज सही वक्त पर सही जवाब दे दिया गया था।❤️ ShailRahul ❤️

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