The Programmer Girlfriend

The Programmer Girlfriend

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Stories & Poems. (This page has multiple Admins.) Page managed by Isheet Barot

08/04/2026

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Deja vu
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"मैं इस बार सावधानी से गाड़ी चलाऊंगा।" - तुम्हारा एकमात्र बचाव-पक्ष ....यही एक वाक्य है?

तुम फिर से कार चलाना चाहते हो?।
उसी सड़क पर
उसी स्पीड पर
उसी हाईवे पर जो अंततः 100 मील प्रति घंटे से कहीं ऊपर की फुल थ्रॉटल स्पीड पकड़ सकता है ...
मगर तुम्हारी ड्राइविंग स्किल्स - अब भी वहीँ।...?

इन खुशफहमियों के बावजूद तुम दोबारा दुर्घटना की अपेक्षा नहीं करते।

तुम्हारा एकमात्र तरीक़ा, एकमात्र बचाव, इस बार दुर्घटना से बचने का यही है"
"मुझे यह सड़क पता है, मैं इस सड़क से गुजरा हूं। मैं इस बार सावधानी से चलाऊंगा।"

सब कुछ बदलना चाहते हैं बिना कुछ भी बदले?
Is that cute ... or stupidity?

Nothing comes out of Nothing.*

Deja vu !
उस ड्राइव की थ्रिल को फिर से रचने की, उस एड्रेनालाईन रश की लालसा ने इतना अंधा कर दिया है कि बिल्कुल वही अनुभव दोहराने के लिए, तुम उसी सहयात्री के साथ फिर से ड्राइव करने पर अड़े हो -- यह सोचे बिना कि सबकुछ दोहराने का अर्थ सचमुच सबकुछ दोहराना ही होगा ! Accident भी ?
.. फिर वही ड्राइव ?... उसी सहयात्री के साथ ? .. वही न... ? ....
जो पिछली दुर्घटना में मर चुका है। ..?....................
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"झोंक रहा है एक मुसव्विर आग में फिर तक्स़ीर
अब दोबारा बन न सकेगी पहली-सी तस्वीर"
Aarsi
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*(Quoting Rene Descartes)

31/03/2026

The Epilogue
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Ahmed Faraz -
सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते
वर्ना इतने तो मरासिम थे कि आते जाते

शिकवा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से तो कहीं बेहतर था
अपने हिस्से की कोई शम्अ' जलाते जाते

जश्न-ए-मक़्तल ही न बरपा हुआ वर्ना हम भी
पा-ब-जौलाँ ही सही नाचते गाते जाते

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अधिकतर फिल्मों में, ड्रामा में, नोवेल्स-कहानियों में एक क्लाइमेक्स आता है फिर कहानी ख़त्म | अंत सुखद हो, दुखद हो ----- दर्शकों को closure तो मिलता ही है | Climax ओपन-एंडेड रखा हो और निर्णय दर्शकों के हवाले किया हो, फिर भी, closure का विकल्प तो होता ही है |

कथानक में एक "dénouement" भी आता है - अर्थात, वह अंतिम भाग जिसमें कथानक की कड़ियों को एक साथ जोड़ा जाता है और मामलों को स्पष्ट या हल किया जाता है। सस्पेंस खुलता है -- किसने क्या किया, क्या कहा, क्यों किया, क्यों कहा | Everything is answered !

मगर.. असली जीवन ?
असली जीवन की कितनी कहानियों में "क्यों" का उत्तर मिलता है, closure मिलता है?
हर शख्स...... एक-एक कर...... हर कहानी को, अधूरा ही छोड़ कर आगे बढ़ रहा है | अपनी सुविधा से निष्कर्ष पर कहानी अचानक ख़त्म की जाती है |
मुआफ़ी, शुक्रिया या gratitude तो असंभव अपेक्षाएं हैं !, लेकिन कोई आख़री मुलाक़ात नहीं, कोई समझदारी के शब्द नहीं, कहीं कोई म्यूच्यूअल गुडबाय नहीं|

हाँ इन अधूरे ड्रामों में climax ज़रूर हैं - लेकिन, स्वघोषित!
जीवन के एक ही फिल्म के....अलग अलग पात्रो के अलग-अलग क्लाइमेक्स। अक्सर निष्कर्ष स्वघोषित और अहम् भाव से, या अपराध-बोध के बचाव से, या अपनी प्राथमिकताओं के घुमाव से उत्पादित |

Dénouement : किसी कहानी, किसी climax में नहीं |

ख़ैर, बात स्वघोषित निर्णय की नहीं, न ही climax या dénouement की |
तआज्जुब इस बात का है कि जीवन के अत्यंत महत्त्वपूर्ण पहलुओं, रास्तों, समयों में साथ चलने वाले आपके हमसफ़र .... आपके अपने जीवन के अत्यंत मार्मिक, भावुक पलों के सहभागी .... वे dénouement न सही मगर एक आख़री 'अलविदा' के भी योग्य नहीं ?

हमसफ़र या सहभागी की बात छोडो, closure और dénouement तो पहले निजी आवश्यकता है न ? .....ummm ... होनी चाहिए न ?

इतने बिलियन्स लोगों की दुनिया के ट्रिलियन्स कहानियों में कहीं, कोई मानव नहीं जो एक बार आकर closure की बात रखे?
Closure मिले न मिले, उसका प्रयत्न भी एक-तरह closure माना जा सकता है ! कोशिश की - यह climax है |

ऐसा क्यों है कि हर कोई जीवन की घटनाओं के इन अनिश्चित और अस्पष्ट अंत के साथ .... मरने के लिए तैयार है?

उनका क्या जो बात-बात पर भगवान् को पूजते थे, व्रत-उपवास-कर्मकांड करते थे, ग़लतियों की क्षमायाचना करते थे ?
उन आस्तिकों ने भी मान लिया की हर कहानी अपूर्ण छोड़ देंगे और चित्रगुप्त इन्हें उनके खाते में नहीं लिखेगा?

यह कैसा समाज है, कैसे लोग हैं, कैसे रिश्ते हैं --- ये कैसी सामाजिक व्यवस्था है -- जहाँ स्वयं अपने मन की शान्ति के लिए भी इतनी सामान्य नैतिकता, basic moral नहीं ?

बहरहाल !
एक बार, कहीं किसी को। ... इस climax, dénouement बात की उत्सुकता हुई|
उसने वर्षों बाद पुराने साथियों को खोज, कॉन्टेक्ट कर, अलग-अलग बात करने की, make-ammends की एक मीटिंग की बिनती की | आश्चर्य यह, की उन सभी ने स्वीकार भी कर ली | इसने सभी पुराने साथियों से सिर्फ़ दो सवाल किये --

पहला सवाल था - "उस समय, आपके जीवन में मेरे स्थान, मेरे अतित्व का महत्व कितना था -- how important was I to you - between 1 to 10 ?"
सभी ने उत्तर "8 से 10" दिया |
(हाँ - उस समय महसूस भी यही तो कराया गया था | )

दूसरा सवाल - यदि आपके जीवन में मेरा महत्त्व इतना अधिक था तो आपने एक बार भी बात करने की, विदा लेने की कोशिश क्यों नहीं की ? क्या यूँ ही दुनिया से चले जाने का प्लान था --- without goodbye -- to someone so important as 8 to 10 ?

इस दूसरे सवाल पर सभी लड़खड़ा जाते |
यूँ भी इस प्रश्न का उत्तर नहीं था -- आपके जीवन में कोई 8 से 10 लेवल का था और आपने मरने से पहले उसे एक बार अलविदा कहना भी ज़रूरी नहीं समझा -- ?

8 से 10 के महत्त्व का दावा झूठ नहीं था | | सत्य --- सभी कह रहे थे ! जीवन के उस पड़ाव में व्यक्ति का महत्त्व इतना ही था - या उन्होंने स्वार्थ के लिए यूँ कर दिया था | ज़िन्दगी के इतने अहम् सहभागी को न दुबारा देखना, न सोचना, और यूँ ही बूढा होकर मर जाना यही प्लान था |
कुछ तो गड़बड़ था | लॉजिक की कड़ियाँ जुड़ नहीं रही थीं !

फिर अचानक, एपिफनी हुई और सभी उत्तर मिल गए !

"This is how it is."

नैतिकता, spine, gratitude या विदाई -- इस संसार, इन मानवों के गुणों में ही नहीं ! आज 8 से 10 वाले को कल, 1 या 2 लेवल पर पटक देना कोई बड़ी बात नहीं | उसूल आदर्श वादर्श, कुछ नहीं |

यहाँ कोई क़िस्सा पूरा नहीं होता | कोई कहानी ख़त्म नहीं होती | यह लोग ऐसे आधे-अधूरे जीवन जीते हैं, अपूर्ण रहते हैं, हर कहानी बीच में ही छोड़ भाग जाते हैं, और यूँ ही टुकड़ों में जीते जीते, बूढ़े होकर मर जाते हैं ।

- सिवाय उस एक के जिसे यूँ टुकड़ों में जीना और मर जाना मंज़ूर न था - जिसका ज़मीर था, morals थे, जिसने पुरुषार्थ किया ... और; मौत जब आनी है आए, फिर मिलें या न मिलें, इसलिए आख़िरी अलविदा भी!

यही इसका महानाट्य का climax था |
- किसी आर्ट फिल्म की तरह ... strange and uneventful climax , लेकिन अर्थपूर्ण |

कड़ियाँ जुड़ती गई, हर प्रश्न के उत्तर अपने आप मिलते गए, हर गुत्थी इस एक सुझान से सुलझती गई! -- इसी सुलझन से dénouement हुई !
अब मृत्यु चाहे जब आये ..
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फ़राज़ की उसी ग़ज़ल का मकता है --
"उसकी वो जाने उसे पास-ए-वफ़ा था कि न था,
तुम 'फ़राज़' अपनी तरफ़ से तो निभाते जाते"
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.... कहीं आपके साथ ऐसा तो नहीं हुआ न, कोई आख़री बार बात करने आया था.. और आपने नकार दिया था?

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