Yuva Rajput sena MP
हमारा एक ही उद्देश्य है क्षत्रिय समाज को संघठित करना हम समाज से हैं समाज हमसे नहीं
जय रघुनाथ जी
10/04/2026
राजस्थान की अंतिम सती रूप कंवर दिवराला।।।।
सिंह लिखवात सब फिरे पर सिंह बन्यो ना कोय । जाके हिरदे (क्षत्रिय) धर्म, सो ही क्षत्रिय होय ।।
31/03/2026
1991 में Alps की ऊँचाइयों पर जब हाइकर्स को बर्फ से निकलता एक शरीर दिखा, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वह करीब 5,300 साल पुराना होगा। बाद में उसे Ötzi the Iceman नाम दिया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार वह ताम्र युग (Copper Age) का व्यक्ति था, जिसकी मृत्यु लगभग 3300 ईसा पूर्व हुई थी।
उसका शरीर इतनी अच्छी तरह सुरक्षित था कि उसकी त्वचा, कपड़े, औज़ार, यहाँ तक कि उसके आखिरी भोजन तक के निशान मिल गए। Ötzi करीब 45 वर्ष का था, उसकी लंबाई करीब 5 फीट 3 इंच थी और उसके शरीर पर 60 से अधिक टैटू पाए गए, जिन्हें कई शोधकर्ता प्राचीन उपचार पद्धति (acupuncture जैसे) से जोड़कर देखते हैं।
उसकी मौत का कारण भी काफी समय बाद साफ हुआ। उसके कंधे में तीर का सिरा फंसा मिला, जिससे पता चलता है कि उसकी हत्या हुई थी।
Ötzi के पास जो सामान मिला, वह उस समय की मानव बुद्धिमत्ता का गहरा प्रमाण है। उसके पास तांबे की कुल्हाड़ी, पत्थर का खंजर, घास और चमड़े से बने कपड़े, और एक जटिल “फायर-किट” था। इसी किट में Fomes fomentarius यानी टिंडर फंगस मिला, जिसे वह विशेष रूप से तैयार करके साथ रखता था।
इसमें मौजूद “अमाडू” नामक पदार्थ बहुत आसानी से चिंगारी पकड़ लेता है और लंबे समय तक अंगार को जलाए रखता है, जिससे आग जलाना आसान हो जाता है। इसके साथ ही उसके पास Piptoporus betulinus यानी बर्च पॉलीपोर भी मिला, जिसे आज वैज्ञानिक एंटीपैरासिटिक और एंटीबैक्टीरियल गुणों के लिए जानते हैं।
Ötzi के शरीर में आंतों के परजीवी पाए गए थे, इसलिए यह माना जाता है कि वह इस मशरूम का उपयोग औषधि के रूप में करता था।
और भी दिलचस्प बात यह है कि उसके पेट में मिले आखिरी भोजन के अवशेषों से पता चला कि उसने मरने से कुछ समय पहले जंगली बकरी का मांस, अनाज और वसा से भरपूर भोजन किया था जो यह दिखाता है कि उसे ऊँचाई और ठंड में जीवित रहने के लिए पोषण का अच्छा ज्ञान था।
उसके कपड़े भी बेहद व्यावहारिक थे। घास से बनी चादर, जानवरों की खाल के जूते जिनमें सूखी घास भरी थी ताकि गर्मी बनी रहे, और भालू की खाल की टोपी। इन सब चीजों से साफ होता है कि Ötzi कोई साधारण “आदिम” इंसान नहीं था, बल्कि अपने पर्यावरण को गहराई से समझने वाला, तकनीकी और औषधीय ज्ञान रखने वाला व्यक्ति था।
31/03/2026
रिश्ता _नहीं _सौदा _था.
लडके के पिता ने पंडित जी को एक लडकी देखने को कहा ! पण्डित जी बोले हाँ एक लडकी है. अभी कुछ दिनों पहले उसके पिता ने भी एक लडका देखने को कहा था.
एक दिन तय हुवा और शादी हो गयी. सब कुछ ठीक चल रहा था कि कुछ महीनो बाद. लडका लडकी मे आये दिन.झगडा होने लगा.
वह लडका रोज नशे में घर आता और पत्नी से मारपीट करता वह उसे शारीरिक और मांसिक रूप से परेशान करता...
वहीं बहू भी न सास देखती न ससुर अपने पति के जाते ही अपने स्कूल के एक मित्र के साथ फ़ोन पर लग जाती और भूल जाती की वह अब किसी की पत्नी किसी की बहू है.
एक दिन उन दोनों के बीच झगडा शुरू हुआ और दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाने लगे. गुस्से में आकर लडकी ने आत्महत्या कर ली. लडके को पुलिस ले गयी.
अब दोनों घरो के लोग एक दूसरे को गाली देने लगे खानदान को गरियाने लगे मामला कोर्ट पहुंचा.
जज सहाब ने सभी को उपस्थित रहने को कहा और उस पंडित को भी बुलाने को कहा जिसने रिश्ता करवाया था.....
पंडित जी आये. वकील से पहले जज साहब ही पूछ बैठे ये रिश्ता तुम ने करवाया था.?
दोनो घर बर्बाद हो गये. इन लोगों का कहना है की आपको सब पता था फ़िर भी.?
पंडित जी ने कहा जज सहाब ये रिश्ता नहीं था. सौदा था...... क्योंकि
लडकी के माता पिता ने कहा.. लडका पैसे वाला हो परिवार छोटा हो. जमीन जायदाद हो. और सास ससुर न भी हो तो कोई बात नहीं...
वही लडके के माँ बाप बोले. लडकी दिखने में सुन्दर हो खानदान हमारी बराबरी का हो. लडके को दहेज में गाडी मिले. बाकी हमे कोई सिकायत नहीं..
और मैने ये सौदा करवा दिया. साहब इसे रिश्ता नाम देकर. रिश्ते शब्द को अपमानित न करें.
अगर इन लोगों को रिश्ता करवाना होता तो लडकी वाले मुझसे कहते... कि
लडका बेशक गरीब हो मगर मेहनती हो भरा पूरा परिवार हो. ऐसा घर हो जहाँ मेरी बेटी हंस कर खिलखिलाकर रहे जिस घर में गाड़ी न हो मगर खुशी और संस्कार हो.
वही लडका वाले कहते...... बहू बेशक गरीब घर की हो मगर संस्कार हो जो भरे पूरे परिवार से हो जो घर को घर बनाकर रखे. कुछ न हो देने के लिए मगर बडो का अदब और अतिथि का आदर सत्कार हो. बहू धनवान नहीं गुणवान हो.
तब कहीं जाकर ये रिश्ता कहलाता जज साहब
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