FarmPrecise
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कलिंगड पिकातील रसशोषक करणार्या किडीचे एकात्मिक व्यवस्थापन.
किडीमुळे होणारे नुकसान :
* मावा, तुडतुडे व पांढरी माशी पाने, देठ व कोवळ्या भागातील रस शोषतात.
* पाने वाकडी, पिवळी होतात व झाडाची वाढ खुंटते.
* फुलधारणा व फळधारणा कमी होते.
* मधाळ स्रावामुळे काळी बुरशी (सुटी मोल्ड) वाढते.
* विषाणूजन्य रोगांचा प्रसार होऊन उत्पादन व गुणवत्ता घटते.
व्यवस्थापन :
* पिवळे चिकट सापळे 8–10 प्रति एकर लावावेत.
* निंबोळी अर्क 5% किंवा अझाडीरेक्टिन 1500 ppm @ 3 मि.ली./लि. फवारणी.
* जैविक उपाय : ब्युव्हेरिया बॅसियाना / व्हर्टिसिलियम लेकानी @ 5 ग्रॅ./लि.
* प्रादुर्भाव जास्त असल्यास इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL @ 0.3 मि.ली./लि. किंवा थायमेथॉक्साम 25 WG @ 0.25 ग्रॅ./लि. (फुलोऱ्यापूर्वी).
फवारणी सकाळी/संध्याकाळी करावी व औषधांची आलटून-पालटून वापर करावा.
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NBR का मतलब है Normalized Burn Ratio, जिसे हिंदी में हम “जला हुआ क्षेत्र सूचकांक” कहते हैं।
यह इंडेक्स उपग्रह की मदद से यह बताता है कि खेत या जमीन पर आग लगी है या नहीं, कितना क्षेत्र जला है और नुकसान कितना हुआ है। गर्मियों में फसल का बचा हुआ कुडा जलाना, बिजली की तारों से आग लगाना , पड़ोसी खेत से फैली आग या अत्यधिक गर्मी के कारण खेत में आग लग सकती है।
आग लगना हम आंखों से देख सकते हैं, लेकिन फसल बीमा या मुआवजे के लिए सर्वे होने में समय लग जाता है। इस दौरान बारिश हो जाना, जमीन साफ हो जाना या जलने के निशान मिट जाना—इन सब वजहों से नुकसान साबित करना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे समय में यह “जला हुआ क्षेत्र सूचकांक (NBR)” बहुत काम आता है। उपग्रह आग लगने से पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना करता है—खेत जब हरा-भरा था तब कैसा दिखता था और आग लगने के बाद उसमें क्या बदलाव आया। इसी आधार पर जले हुए क्षेत्र को नक्शे पर साफ-साफ दिखाया जाता है।
यह डेटा बीमा कंपनियों, कृषि विभाग और सरकार के लिए बहुत उपयोगी होता है और नुकसान का आकलन करने के लिए एक विश्वसनीय आधार बनता है।
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