Leasing Advisor
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10/05/2017
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अगर आप जल्द ही फ्लैट लेने का प्लान कर रहे हैं तो थोड़ा थम जाइए। 1 मई से रियल एस्टेट (रेग्युलेशन ऐंड डिवेलपमेंट) ऐक्ट (RERA) लागू होने वाला है। नया कानून सारे रियल एस्टेट सेक्टर को पूरी तरह बदल देगा। नए कानून से सेक्टर में जवाबदेही बढ़ेगी और पारदर्शिता आएगी। नए कानून RERA से बायर्स को काफी फायदा होने वाला है।
हम आपको समझाते हैं कि कैसे नया कानून आप पर असर डालेगा....
1) रेरा के कारण हर राज्य को रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी बनानी होगी। इस अथॉरिटी का काम किसी भी बिल्डर के खिलाफ आई शिकायत का निवारण करना होगा।
2) साथ ही सभी अंडर-कंट्रक्शन प्रॉजेक्ट्स रेग्युलेटर की पहुंच में होंगे। 8 अपार्ट्मेंट्स से ज्यादा वाले सभी कमर्शल और रेजिडेंशल रियल एस्टेट प्रॉजेक्ट्स के लिए रेजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर प्रॉजेक्ट की लागत का 10 प्रतिशत पेनल्टी के रूप में वसूला जाएगा। दोबारा ऐसी गलती करने पर जेल भी हो सकती है।
3) डिवलेपर को फ्लैट्स खरीदने वालों से मिले पैसे का 70 प्रतिशत एक अलग अकाउंट में रखना होगा जिससे प्रॉजेक्ट की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट निकलती रहे। इससे बिल्डर्स बायर्स से मिला पैसा किसी और प्रॉजेक्ट में नहीं लगा पाएंगे। इससे कंस्ट्रक्शन टाइम पर हो पाएगा।
4) नए कानून में सभी डिवेलपर्स के लिए प्रॉजेक्ट से जुड़ी सभी जानकारी जैसे प्रॉजेक्ट प्लान, लेआउट, सरकारी अप्रूवल्स, जमीन का स्टेटस, प्रॉजेक्ट खत्म होने का शेड्यूल भी उपलब्ध कराना होगा।
5) रेरा के बाद सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर फ्लैट बेचने का तरीका बदलेगा। नए कानून में कारपेट एरिया को अलग से निर्धारित किया गया है।
6) अभी हाल यह है कि किसी प्रॉजेक्ट के लेट होने पर डिवेलपर को कोई नुकसान नहीं होता है। नए कानून के 1 मई से लागू होने के बाद प्रॉजेक्ट खत्म होने में होने वाली देर के लिए बिल्डर को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। बायर्स द्वारा दी गई अतिरिक्त EMI पर लगने वाला इंट्रेस्ट वापस बायर्स को चुकाना होगा।
7) RERA के ट्राइब्यूनल के ऑर्डर न मानने पर डिवेलपर को 3 साल की सजा हो सकती है।
8) अगर प्रॉजेक्ट में कोई गलती होती है तो बायर पजेशन के 1 साल के भीतर डिवेलपर को लिखित में शिकायत दे आफ्टर सेल सर्विसेज की मांग कर सकता है।
source: NDTV
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