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14/03/2026
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NEWS- गुजरात के कच्छ जिले में स्थित माधापर गांव अपनी आर्थिक समृद्धि के कारण देश-दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गांव को अक्सर दुनिया के सबसे अमीर गांवों में से एक बताया जाता है। जानकारी के अनुसार यहां लगभग 7,600 परिवार रहते हैं और इन परिवारों के बैंक खातों में हजारों करोड़ रुपये जमा बताए जाते हैं।
माधापर की खास बात यह है कि इतने छोटे से गांव में कई बड़े बैंक मौजूद हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार यहां करीब 17 बैंक शाखाएं काम कर रही हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग की मजबूत व्यवस्था को दर्शाती हैं। यही वजह है कि इस गांव को भारत का एक बड़ा ग्रामीण कैश हब भी कहा जाता है।
इस गांव की समृद्धि का एक बड़ा कारण विदेशों में काम करने वाले स्थानीय लोगों को माना जाता है। माधापर के कई निवासी लंबे समय से विदेशों में व्यवसाय या नौकरी करते हैं और वहां से कमाई का बड़ा हिस्सा अपने गांव में निवेश करते हैं।
इसके अलावा गांव में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा भी देखने को मिलता है। यही कारण है कि माधापर गांव आज ग्रामीण विकास और आर्थिक प्रगति का एक अनोखा उदाहरण बन चुका है।
14/03/2026
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NEWS- इच्छामृत्यु वाले हरीश राणा को नई जिंदगी देने पहुंचे बाबा, जड़ी-बूटी से ठीक करने का किया दावा
गाजियाबाद के 31 वर्षीय हरीश राणा पिछले 13 साल से कोमा में हैं और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की अनुमति
गाजियाबाद के रहने वाले 31 साल के हरीश राणा पिछले 13 साल से कोमा में हैं। वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर जिंदगी जी रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पैसिव इच्छामृत्यु (लाइफ सपोर्ट हटाने) की अनुमति दे दी है। यह भारत में ऐसा पहला बड़ा फैसला है। कोर्ट ने AIIMS को निर्देश दिया है कि हरीश को वहां भर्ती कर लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जाए। फैसला सुनाते समय कोर्ट के जज भी भावुक हो गए थे। हरीश के माता-पिता ने सालों से गुहार लगाई थी कि बेटे को इस हालत में देखना असहनीय है।
हादसा कैसे हुआ?
हरीश राणा 2013 में चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। एक दिन हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। इससे उन्हें गंभीर चोट लगी, पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया और वे कोमा में चले गए। तब से वे बिस्तर पर पड़े हैं, हिल-डुल नहीं सकते। डॉक्टरों ने कहा कि ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है। परिवार ने हर तरह का इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
पिता का दर्द भरा बयान
हरीश के पिता अशोक राणा ने बताया कि 13 साल से बेटे को जिंदा लाश की तरह देखना बहुत दर्दनाक रहा है। शब्दों में यह दर्द बयां नहीं किया जा सकता। इलाज के चक्कर में दिल्ली का तीन मंजिला मकान भी बेचना पड़ा। आर्थिक और मानसिक रूप से परिवार पूरी तरह टूट चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वे कुछ नहीं कह सकते। उम्मीद है कि एम्स के डॉक्टर जल्द प्रक्रिया शुरू करेंगे। अशोक राणा अब इस मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं करना चाहते।
राजस्थान से बाबा का आना
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान के भीलवाड़ा से 62 साल के अखंडानंद बाबा गाजियाबाद पहुंचे। वे राज एंपायर सोसाइटी में हरीश के घर आए, जहां परिवार 13वीं मंजिल पर रहता है। लेकिन सोसाइटी ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। पास की दुकान पर खड़े होकर बाबा ने पास रहने वाले दुकानदार धर्मेंद्र के जरिए मैसेज भेजा। उन्होंने कहा कि उनके पास देसी जड़ी-बूटियों से बनी पुड़ियां हैं। इनसे हरीश को नई जिंदगी मिल सकती है। बाबा ने दावा किया कि दवा नलकी से दी जा सकती है या एम्स के डॉक्टर से भी चेक कराई जा सकती है। इससे नसें और अंग काम करना शुरू कर सकते हैं।
बाबा और पिता की मुलाकात
बाबा के मैसेज के करीब 6 घंटे बाद अशोक राणा नीचे आए। सोसाइटी के कुछ पदाधिकारी भी साथ थे। लगभग 30 मिनट तक दोनों की बात हुई। बाबा ने फिर वही बात दोहराई कि जड़ी-बूटियां से चमत्कार हो सकता है। अशोक राणा ने सुना, लेकिन कहा कि सब कुछ कोशिश कर चुके हैं। अब कोर्ट के फैसले का इंतजार है। बातचीत के बाद अशोक ने बाबा को फल दान में दिए। बाबा ने मीडिया से कोई बात नहीं की। उन्होंने कहा कि फोटो या बयान देना उचित नहीं लगता।
परिवार की स्थिति और उम्मीद
यह मामला पूरे देश में चर्चा में है। एक तरफ इच्छामृत्यु की अनुमति, दूसरी तरफ बाबा का देसी इलाज का दावा। परिवार अब एम्स की टीम के फैसले का इंतजार कर रहा है। हरीश के माता-पिता ने बेटे के अंग दान करने का भी फैसला किया है।
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