Shabdgaatha Publishing Group

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लेखन के भविष्य का प्रकाशन
नए स्वर | नई दृष्टि | नया साहित्य
Publishing Hindi & English literature and fiction since 2020. https://linktr.ee/shabdgaatha

04/06/2026

पिछले बरस आज ही के दिन दिलीप कुमार पाठक की प्रथम पुस्तक ‘मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया‘ के आवरण के माध्यम से प्रकाशन की ओर से एक तोहफ़ा दिया गया था।

इस बार भी ऐसा ही कुछ प्रयास था, क्योंकि लेखक द्वारा अगली पुस्तक प्रकाशन को सौंपी जा चुकी है, जो कि उनका उपन्यास विधा लेखन में उनका पहला प्रयास भी है। परन्तु अन्य प्रतिबद्धताओं के चलते अपनी तमाम कोशिशों के भी इस बार ये मुमकिन नहीं हो पाया है।

लेकिन आज पहली किताब की वर्षगांठ भी है, आंकड़ों की बाबत ख़बर आप सभी पाठकों तक पहले ही पहुंच चुकी थी कि इस किताब ने अपने प्रकाशन के साथ ही इतिहास बनाया है।

बहरहाल दिलीप कुमार पाठक जी को उनके अवतरण दिवस की ढेरों बधाईयां।

पाठकों के लिए विशेष : अगर आपने अभी तक ये पुस्तक नहीं ली है तो प्रकाशन से सीधे मंगवाने पर जो कि ₹ 275/- फ्री डिलीवरी है। इस अवसर पर सिर्फ आज रात बारह बजे तक आप इस पुस्तक को अतिरिक्त छूट में मात्र ₹ 249/- फ्री डिलीवरी प्राप्त कर सकते हैं।

ऑर्डर हेतु DM करें या हमारे आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर 098677 65305 पर DKP लिखकर भेजें।

11/05/2026

अपराध’ यह एक शब्द भर नहीं है, इसका अपना एक इतिहास है, जो अनादिकाल से समाज के समांतर चलता आ रहा है, घृणा, द्वेष , भय और यहाँ तक कि हास्य भी इसके रंग हैं। हत्या जहाँ भय उत्पन्न करती है, वहीं बलात्कार घृणा उत्पन्न करता है। पीढ़ी डर पीढ़ी चलने वाली दुश्मनी द्वेष का वो रंग पैदा करती है कि जाने कितने घरों के चिराग़ असमय ही बुझ जाते हैं । इससे इतर ठगी की छोटी घटनाएं हास्य भी उत्पन्न करती हैं कि फ़लाँ को कैसा बेवकूफ बनाया गया। इन सब रंगों से अलग एक अन्य रंग भी है और वो है बाहुबली बनने का नशा। यह जानते हुए भी कि अपराध का जीवन लंबा नहीं होता, यह युवाओं के लिए दुर्लभ स्वप्न होता है, जो किसी किसी का ही पूरा होता है। हालाँकि जिसका पूरा होता है, मिलता उसे भी कभी कुछ नहीं, पर फिर भी इसका क्रेज है और ताज्जुब की बात ये कि समाज बाहुबलियों को नफ़रत की निगाह से देखता भी नहीं। ऐसा ही एक युवा था डिप्टी, जिसने बाहुबली बनने का सपना देखा था। सपना देखा और सपना पूरा भी होगा, पर क्या उसे कुछ मिला? मिला तो क्या मिला? कोई तीन बरस पहले आए उपन्यास –‘डेड एंड’ के नायक ‘डिप्टी’ की कहानी वहीं ख़त्म मान ली गई थी। लेकिन ‘पिथोरा फाइल्स’ उस आदमी की वापसी की कहानी नहीं है, बल्कि उसके बचे रह जाने की कहानी है। इस तरह से बचे रहने की, जिसमें चमत्कार से कहीं ज्यादा अपनी शर्तों पर जीने की ज़िद का दख़ल होता है। डिप्टी, जो ‘डिप्टी भैया’ के रूप में धीरे-धीरे उन लोगों तक पहुँचता है, जिनसे उसका हिसाब बाकी है। उसकी ज़िंदगी में बदला उतना अहम नहीं, बल्कि उस दुनिया से टकराने का जज़्बा अहम है, जिसने उसे यहाँ तक पहुँचा दिया। इस सफ़र में डिप्टी ने बहुत कुछ खोया और खोता भी है – लोग, रिश्ते और भरोसा। लेकिन इसके बावजूद वह थमता नहीं। न वह अपने किए को सही ठहराता है, न उससे बचने की कोशिश करता है। ‘पिथोरा फाइल्स’ उसी ‘डिप्टी भैया’ की कहानी है, जो टूटने से कहीं ज्यादा हर बार किसी तरह खड़ा रह जाता है।

किताब अमेजन प्राइम पर उपलब्ध या 098677 65305 पर FILES लिखकर भेजें।

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Photos from Shabdgaatha Publishing Group's post 28/02/2026

बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में जब किशोर साहित्य में साहस और जिज्ञासा की नई लहर उठ रही थी, तभी एक चरित्र ने जन्म लिया, जिसे हम सब ‘नैंसी ड्रियू’ के नाम से जानते हैं।

वह केवल एक काल्पनिक जासूस भर नहीं थी, वह स्वतंत्र सोच, तर्क बुद्धि और निर्भीक किशोर मन का प्रतीक बन गई। अपने समय की सामाजिक सीमाओं के बीच खड़ी यह किशोरी न केवल रहस्यों को सुलझाती है, सत्य की खोज करती है, बल्कि हर परिस्थिति में संयम बनाए रखती है।

हम-आप तमाम समेत दुनिया भर में कई पीढ़ियों ने उसके साथ रहस्यमय हवेलियों में क़दम रखा, गुमशुदा विरासतों की तलाश की और अनसुलझी पहेलियों को सुलझाया।
‘नैंसी ड्रियू’ ने यह सिद्ध किया कि जासूसी केवल रोमांच नहीं, बल्कि बुद्धि, साहस और नैतिकता का संगम है।

हमें निहायत ख़ुशी हो रही है कि अब वही क्लासिक रहस्य परंपरा हिंदी पाठकों के लिए उपलब्ध है। नैंसी ड्रियू की आरंभिक चार कृतियाँ शायद पहली बार हिंदी में प्रस्तुत की जा रही हैं। हमारा प्रयास है कि एक वैश्विक साहित्यिक विरासत अपनी भाषा में भी जीवित हो सके।
यह केवल अनुवाद नहीं है, एक सांस्कृतिक सेतु है। साथ ही बचपन की वो याद है जब आज के इस डिजिटल युग में मोबाइल की जगह ये किताबें हमारे हाथों में होती थीं।

अनुवादकों की दुनिया में आप सभी का विश्वास जीत चुकीं सबा खान जी ने इन चारों किताबों का अनुवाद किया है।

‘ब्लू लैंटर्न’ के माध्यम से हम इस प्रतिष्ठित शृंखला को हिंदी पाठकों के हाथों में उसी गंभीरता और सम्मान के साथ, जिसके वह योग्य है, सौंप रहे हैं।

दिए गए नंबर पर संदेश भेजें और अपनी प्रति सुरक्षित करें। किताबें उपलब्ध हैं।



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