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08/04/2024
क्या जीवन भर किसी व्यक्ति के प्रति प्रेम स्थर व वफादार बना रह सकता है?
उत्तर है –'शायद नही'... या फिर निश्चित रूप से 'नही'
समय और उम्र के साथ किसी व्यक्ति के मनोभाव, जरूरते और पसंद बदलती है जो उनके आकर्षण के केंद्र में बदलाव लाता है और यही आकर्षण, एक नये प्रेम का आधार बनता है। वैसे आकर्षण प्रेम नही है किन्तु आकर्षण इसका बीज अवश्य है जो एक नये प्रेम को आधार देता है और समय के साथ धीरे धीरे एक वृक्ष बन जाता है। ये उपन्यास, प्रेम की जटिल परिभाषाओ और रिश्तों के प्रति अविश्वास के भयानक परिणामों की एक ऐसी ही कहानी का विशाल वटवृक्ष है जिसमे मानव के हर रिश्तों की सिर्फ और सिर्फ जलती हुई चिताए नजर आती है और शोर के नाम पर सिर्फ सिसकियाँ, जिनमे खुलकर रोने का भी साहस नही है।
'सनातन से अधिक ये भारतीयता के पुर्नस्थापन का काल माना जाना चाहिए'
काश होती ख़बर कि खता क्या हुई।
दूर जाने की तेरी वजह क्या हुई।
अजनवी सी खड़ी थी, बगल में मेरे,
यूँ नफ़रत भी ऐसी बता क्या हुई।
राजेश आनंद
किसी ने क्या खूब कहा है कि...
'जालिम के साथ किया जाने वाला जुल्म ही इंसाफ है'
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