Gaurav Kumar Rai
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03/11/2025
अमोल मजूमदार की कहानी सिर्फ एक कोच की नहीं है, यह उस खिलाड़ी की गाथा है जिसने कभी भारतीय टीम की जर्सी नहीं पहनी, पर उसने वह कर दिखाया जो शायद भारत के लिए खेलने वाले भी नहीं कर पाए। उन्होंने खुद मैदान पर मौका नहीं पाया, लेकिन दूसरों को वह मौका दिलाया और उसी से भारत को विश्व कप फाइनल तक पहुंचा दिया। भारत की महिला क्रिकेट टीम 2005 और 2017 के बाद सिर्फ तीसरी बार वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंची और चैंपियन बन गई।
मजूमदार का जीवन एक इंतजार से शुरू हुआ। 1988 में वह 13 साल के थे, जब स्कूल क्रिकेट के टूर्नामेंट हैरिस शील्ड के दौरान नेट्स में अपनी बल्लेबाजी की बारी आने का इंतजार कर रहे थे। उसी दिन अमोल की टीम से ही खेल रहे सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने 664 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की। दिन खत्म हो गया, पारी घोषित कर दी गई, लेकिन अमोल को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। यह घटना उनके जीवन का प्रतीक बन गई। बैटिंग की बारी हमेशा उनसे कुछ दूर ही रही।
1993 में जब उन्होंने बॉम्बे (अब मुंबई) के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया, तो पहले ही मैच में 260 रनों की ऐतिहासिक पारी खेल डाली। यह तब विश्व में किसी भी खिलाड़ी की डेब्यू पारी में सबसे बड़ा स्कोर था। लोग कहने लगे- यह अगला सचिन तेंदुलकर बनेगा। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दो दशक से भी अधिक लंबे करियर में उन्होंने 11,000 से ज्यादा रन बनाए, 30 शतक जड़े, लेकिन कभी भी भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेल सके। वो एक सुनहरे युग के खिलाड़ी थे, जब टीम में तेंदुलकर, द्रविड़, गांगुली, लक्ष्मण जैसे सितारे थे। मजूमदार उनके साए में खो गए।
2002 तक आते-आते उन्होंने लगभग हार मान ली थी। चयनकर्ता बार-बार नजरअंदाज करते रहे। वो खुद कहते हैं, 'मैं एक खोल में चला गया था, समझ नहीं आ रहा था अगली पारी कहां से निकलेगी।' तभी उनके पिता अनिल मजूमदार ने कहा, 'खेल छोड़ना नहीं, तेरे अंदर अभी क्रिकेट बाकी है।' यह एक वाक्य उनकी जिंदगी बदल गया। उन्होंने वापसी की और 2006 में मुंबई को रणजी ट्रॉफी जिताई। इसी दौरान उन्होंने एक युवा खिलाड़ी रोहित शर्मा को पहली बार फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में मौका दिया। फिर भी, दो दशकों में 171 मैच, 11,167 प्रथम श्रेणी रन, 30 शतक के बावजूद उन्होंने भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेला।
2014 में क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद उन्होंने कोचिंग का रास्ता चुना।
और आज Indian Women Cricket Team को World Cup 2025 जीताकर उन्होंने नामुमकिन समझे जाने वाले काम को मुमकिन कर दिखाया है 🧡🤍💚
04/10/2025
रोहित शर्मा, एक ऐसा नाम जो कभी मिटने वाला नहीं है। धोनी की तरह के लोग क्रिकेट इतिहास में बहुत कम होते हैं, और शर्मा को भी याद करते रहेंगे। भले ही रोहित से टेस्ट के बाद वनडे की कप्तानी ले ली गई हो, और शुभमन गिल को वनडे कप्तान घोषित किया गया हो, लेकिन रोहित शर्मा को दिल से भूल पाना बहुत मुश्किल होगा।
वह एक ऐसे कप्तान थे जिन्होंने धोनी के बाद भारतीय टीम को कई सारी आईसीसी ट्रॉफी दिलाई, जैसे कि टी-20 विश्व कप और एशिया कप। उनके कप्तानी छोड़ने का दुख करोड़ों हिंदुस्तानियों को है। हर कोई रोहित शर्मा से उम्मीद लगाकर बैठा था कि 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप में हिंदुस्तान को एक और चमचमाती हुई आईसीसी ट्रॉफी दिलाएंगे, लेकिन यह सपना अधूरा रह गया।
रोहित शर्मा ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए। उन्होंने आईपीएल में मुंबई इंडियंस को पांच बार ट्रॉफी दिलाई और अपने जुनून और अनुभव से अपने नाम का परचम लहराया। धोनी के बाद रोहित शर्मा को सबसे सफल कप्तान माना जाता है।
बीसीसीआई ने जो भी निर्णय लिया है, वह सोच-समझकर लिया होगा, लेकिन रोहित के कप्तान न होने का दुख हर किसी को है। उनके साथ जो कुछ भी हुआ, सही नहीं है। हाल ही में रोहित शर्मा अपने फिटनेस पर काफी ध्यान दे रहे थे, उन्होंने अपना वजन भी काफी कम किया था और यो-यो टेस्ट भी आसानी से पास कर लिया था।
फैंस के दिल में रोहित शर्मा की बल्लेबाजी और कप्तानी का इंतजार हमेशा रहेगा। उनकी 45 नंबर की जर्सी हमेशा हर किसी के जेहन में याद रहेगी। रोहित शर्मा एक ऐसे कप्तान थे जिन्होंने अपने खेल और नेतृत्व से करोड़ों दिलों पर राज किया। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अब हम सब उन्हें केवल बल्लेबाजी करते हुए देख सकते हैं उनकी कैप्टेंसी को बहुत याद करेंगे | ❤️🌹
Rohit Sharma
28/09/2025
भारत ने 2025 एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया है. फाइनल में टीम इंडिया ने पाकिस्तान को 5 विकेट से रौंदा.
04/08/2025
Gautam Gambhir Hugging Captain Gill
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