PCAI Uttarakhand
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राजपाल पवांर जी की नशामुक्ति पे शानदार गढ़वाली कविता........
04/12/2024
इक ज़रा ठहरो चाँद निकलेगा
अपने दाग़ों को दूध से धो कर
आसमाँ की बिसात पर देखो
सारे तारों के नरम मोहरों को
एक एक करके फिर सजाएगा
और तुमसे करेगा सरगोशी
दिल ये ग़मगीन है अगर तो क्या
रात संगीन है अगर तो क्या
सुबह आएगी, नूर बिखरेगा
खेलते खेलते सफ़र अपना
मंज़िलों का पता बताएगा
- गौहर रज़ा
सरगोशी = धीमी आवाज़ में बात करना,
संगीन = सख़्त, पत्थर जैसी,
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