Rajendra sameeja

Rajendra sameeja

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Legal Advisor, Environmentalist, Forensic Expert

10/11/2024

अन्नदाता हुकुम एकलिंग दीवान, हिंदुआ सूरज, श्रीजी हुजूर महाराणा महेंद्र सिंह जी मेवाड़ को सादर नमन।
💐💐💐👏👏👏

26/01/2023

मां‌ सरस्वती का आशिर्वाद सदा बना रहे ,
जिन्होंने मुझे ईश्वर की उपस्थिति मनुष्य मे होने का अहसास करवाया ।
दरिद्र नारायण की सेवा का सौभाग्य दिया ।
आज बसन्त पंचमी पर नमन करते हुए पुनः आपके चरणो मे निवेदन हे कि
आप की कृपा बनी रहे वाणी ,कलम , ओर मष्तिष्क मे आप बिराज मान रहे ।

Photos from Rajendra sameeja's post 27/06/2021

कोटडा प्रवास
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अनायास फोन‌ पर एक पीड़ित की ‌पीडा से लोगो से जुडाव हो ‌जाता हे ,बरसो‌ के सम्बन्ध निकल‌ आते हे ।
ऎसा ही कोटडा के‌‌ प्रवास पर अनुभव हुआ हमारे से पहले जिले के पुलिस अधिक्षक‌ मिटिग ले रहे थे शायद चुने हुए जनप्रतिनिधियो की बैठक थी या CLG की‌ हो‌ शायद वो गाँव के पीड़ित की आवाज बहुत बार नही बन पाती है।
हम‌ निर्धारित कार्यक्रम अनुसार ठेठ देहात मे 7 किलोमीटर गुजरात बोर्डर क्रोस कर आगे के राजस्थान की सीमा की पंचायत 16 km आगे महाद पहुँचे बस पुराने इतिहास की पिता से जनाकारी ले कर गया था स्टेट टाईम ‌की परम्परागत रूप से वहा के मुखी की नियुक्ति पानरवा ठिकाने से होती थी ।मेरे दाता (पिता )ने बताया कि 60.वर्ष पुर्व महाद के बडळे (वटवृक्ष ) के निचे कालु मुक्खी
( गाव का मुखिया) ‌ की पाग बन्धाई के लिए रूके थे, तब पानरवा राणा साहब मोहब्बत सिह जी‌ थे काला मुक्खी को आज भी याद किया जाता है।
आज भी मेला भरता है, हनुमान जी का मन्दिर है ।
वट की स्मृतियाँ मौन थी, पर आखों मे जीवन्त हो गई । वृक्ष और परिवार की जडे कितनी मझबुत होती हे अब समझ
आया ।
दातोड गाँव मे रमेश भाई के यहा रूकना निर्धारित था क्योंकि हमे आदिवासी अंचल मे उनकी समस्याओं समझना था ओर उन सब लोगो को अनुभव करवाना था हम उनसे अलग नही है।
एक कमरे मे सभी साथी ठहरे भोजन के बाद समस्या पर विचार विमर्श का लम्बा दोर चला । उस रात चार दिन से बिजली आई थी वो भी मात्र आधे घंण्टे के लिए गाँव के इलेक्ट्रीफाईड होने का सबुत दिया ।
बिना पंखे लाईट रात गुजारना तय था ।
राजनीतिक सक्रियता से लेकर पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था , पंचायत राज ओर धर्म परिवर्तन तक पर खुल कर चर्चा हुई ।
प्रधानमंत्री आवास के पैसे मन चाहे खाते मे जाते हे,GEO टेगिग मे भी सेंध लगती हे स्वच्छ. भारत अभियान. के कुछ टायलेट जागरूक लोगो के नजर आए ।
बाकी नशे का व्यापार नाथु के हाथ है।‌
अब नाथु कौन हे ,नही जाना । हथ कढ सामान्य प्रचलन मे है ‌।
कोटडा के हेरिटेज बिल्डिग जिसमे कोर्ट हुआ करता था, कंक्रिट की नई बिल्डिंग बन गई नई ईजिनियरिग मे विकास ऎसे ही होता होगा ।
पुरा देवला से कोटडा माहद तक घटीया गौरव पथ नजर आए ड्रेनेज नाम मात्र का था । मीणा साहब लम्बे समय से Xen है, वही जबाव देह होगे ओफिस मे सोमवार को दिखे नही मिलना नही हो पाया ‌ ।
ईसाई बने परिवार ने उदयपुर से का बर्थ डे केक लाने का अनुरोध भी हमने पुरा किया सुबह केक काटा। लोग बहुत से कनवर्ट हुए हे घर वापसी को तेय्यार हे ।
मुल संस्कृति मे कोई परिवर्तन नही हे केवल नाम थोमस , एन्थनी ,एलेकजेन्डर हे ‌।
भोपा, देवरा , राम राम वही ।

कोटडा CO भुपेन्द्र जी से मुलाकात की
नए है, पुलिस मे ज्यादा अपेक्षा नही कर सकते ‌ पुरी कोटडा वृत की पुलिस महिला कानूनो से अनभिज्ञ नजर आई ।
वेसे अपडेशन होना चाहिए ।
सुबह पीडितो से मिलना हुआ शायद लोग सोच नही पाए की हम शहर से लोग उनके पास आ सकते हे ‌।
गजब का उत्साह ओर विश्वास था उनमे अचरज भी था ये लोग हमारे लिए उदयपुर कोर्ट मे बयान करवाने आ सकते ओर हमारे गाँव हमारी पीडा जानने भी आ सकते हे ।
रमेश भाई , सोहन भाई , ईशु भाई के लिए कृष्ण सुदामा का मिलन कहे ।
कृष्ण ये लोग हे ,जो इतने लोगो की पहुँच मे है। जो बन पडे सेवा करते है ,और पीड़ित की आवाज बनते है।
हम. ठहरे सुदामा शहर की बोल चाल व्यवहार की दरिद्रता तो है ही, जो पीड़ित से संवाद के लिए ट्रांसलेटर की जरूरत पड रही थी ।
पीडित का हमारे लिए शबरी का परिवार के समान था निश्छल प्रेम अनन्त
आशाएं लिए आया था.......एक RI किस तुनक मिजाजी मे था कि उसके जाति प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर नही कर रहा था . ....
पीडित प्रतिकर का मामला था संवेदन हीनता इसी को कहते है।
सात दिन से तहसील मे चक्कर काट रहा परिवार CO कोटडा को मामला अवगत करवाया ।
एक गरीब व्यक्ति पोपतट जोगी का अनोखा मामला आया उसकी पत्नी की दुर्घटना मे मृत्यु होने पर उसके प्रतिकर की राशी वकील दबा कर बेठा हे ।
बेंक डायरी, चेक बुक ,ATM , FD. सब कुछ वकील के पास ........ मन चाहे तब तीन पाँच हजार दे देता हे ‌।
उसे भी रूपये दिलाने हे बुढी आखो‌ मे आशा कभी निराशा मे नही बदलना ही हनारा मिशन हो जता हे ।
लड़कियों का बेचान बहुत बडी समस्या थी दिलावर के कारनामे बताए 50. से ज्यदा बच्चिया बेच दी बताते हे पुलिस मे सेटिंग है। कोई कुछ नही बोलता अबकी बार सही से फाईल खुली है, चाह कर कोई नही बचा सकता ‌ ।
रमेश भाई सोहन जी गमार ईश्वर जी जागरूक लोग है,पर उन्हे ‌ लगता हे उन्हे हमारे सहयोग की आवश्यकता हे ‌ ।
ये साथी हमसे ज्यादा समझ रखते है ‌‌.....
वास्तव मे हमसे ज्यादा व्यवहारिक समझ उनमे थी ।
‌रमेश भाई पाचवी पास है, पर समझ मे ग्रेजुएट है ।
सही मे हम उन्हे विश्वास दिलाने महाद तक पहुँचे ‌। ‌वही उन्ही के घर का ‌ बनाया ओर सब के साथ बेठक भोजन का आनन्द अलग था । मक्का की रोटी उडद की दाल और खरड पर पिसी लाल मिर्च ओर लहसुन की चटनी । विश्राम के बाद लगा कोटडा के सफर बहुत बाकी है ‌ ।‌
हमारे साथ जामुन, मुंग, खजुर साथ बाधे थे। ‌‌स्मृतियों के लिए
कोटडा के वनवासी आतिथ्य को नमन🙏

11/03/2021

" बत्तमीजी का विरोध करना सीखे "
चाहे पुलिस हो ,अफसर हो नेता हो ,या कोई ओर। संविधान के अनुसार जनता मालीक हे ।
ये सब सेवक हे सेवक को उसको सेवा का अहसास कराने के लिए हमे अधिकार पुर्वक अपने मालिक होने का
भाव जगाना होगा
राजेन्द्र समीजा

30/01/2021

गाँधी जो विचारो मे जीवित हे
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"गाँधी " एक मानवीय विचार धारा हे । गाँधी मर नही सकता जब तक इन्सान जिन्दा हे ।
मेरा गाँधी जी से वैचारिक जुडाव यह भी रहा की सुटबुट वाले बेरिस्टर ने एक लंगोटी इसलिए धारण कर ली कि अपने को आम आदमी दिखाना था ।‌
अपनी मिट्टी ओर अपने लोगो से जुडना था ।
पोराणीक कथाओं मे राजा भेष बदल कर प्रजा के हालात जानते थे ।
गाँधी स्थाई रूप से भेष बदल लिया ।
वो जन सामान्य के हो कर रहे ।‌
आज जो कमी खलती हे सत्ता अपने ही नागरिकों से संवाद नही करती हे ।
सुनने की क्षमता भी सत्ता मे नही रही । जब पुरा देश गाँधी से जुडा था सुबह की प्रार्थना सभा ओर शाम के प्रवचन संवाद के माध्यम थे ।
यह संवाद एक तरफा नही होते थे सवाल जबाब ओर एक हल्का माहोल करने वाली बाते गाँधी जी किया करते थे ।
जब 565 रियासतों का एकिकरण की बात आई वल्लभ भाई केवल गाँधी जी के संवाद ओर पत्रो का माध्यम बने वास्तविक प्रेरणा श्रोत्र गाँधी जी की त्याग ओर उनकी जीवन शेली ओर विचार थे ।‌ जिससे राजे रजवाडो ने अपनी सत्ता जनता को समर्पित की ।
गाँधी जी का धेर्य मुझे सबसे ज्यादा प्रेरित करता हे 1942 भारत छोड़ो आंदोलन में कई विरोधी खड़े हुए थे जिसमें कम्युनिस्ट संघी और कई लोगों का विरोध था लेकिन गांधी अपने पथ पर आगे बढ़ते रहें उन्होंने कभी इन व्यक्तियों का दलों का और विचारधाराओं का विरोध नहीं किया यह उनका बड़प्पन था यदि गांधी उस समय राष्ट्रीय सेवक संघ यह कम्युनिस्ट हिंदू सभा या अन्य संगठनों का विरोध करते या उन्हें देशद्रोही करा देते तो यह लोग आज भी उस लेबल से छुटकारा नहीं पाया होता ।
श्री गांधी के बड़े हृदय का परिचायक है आजादी के बाद भी सत्ता के प्रति कोई मोह नही रहा ।
गाँधी ऎसा व्यक्तित्व था जो विरोधियो की विचारधाराओं मे भी जीवित रहा आज भी देश मे गाँधी के विचार प्रासंगिक हे क्योकि समाज मे मानवता के दर्शन के साथ समाज के अन्तिम व्यक्ति के प्रति उनकी सोच हमेशा उनको जीवित रखती हे । आज पुण्य तिथी पर
विनम्र श्रद्धाजंली 🙏
राजेन्द्र समीजा

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