Vastu Hora

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08/03/2026

श्रीमद्भागवत महापुराण, गीता प्रेस के सौजन्य सेः

सूर्येण हि विभज्यन्ते दिशः खं द्यौर्मही भिदा।
स्वर्गापवर्गौ नरका रसौकांसि च सर्वशः।।

अर्थात्-
सूर्य के द्वारा ही दिशा, आकाश, द्युलोक (अन्तरिक्षलोक), भूर्लोक, स्वर्ग और मोक्ष के प्रदेश, नरक और रसातल तथा अन्य समस्त भागों का विभाग होता है।

वास्तु-शास्त्र के अनुसार निवास के योग्य भूखंड (वास्तु) की स्थिति की जांच के लिए प्राथमिक स्तर पर *दिशाओं* का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है।
उपरोक्त श्लोक से स्पष्ट है कि *दिशा-निर्धारण* के लिए सूर्य की स्थिति का ज्ञान होना आवश्यक है।

जितेन्द्र कुमार
वास्तु होरा

16/01/2026

वास्तु होराः 3/2026

गोभिल गृहसूत्र के अनुसारः
1. पीपल वृक्ष (अश्वत्थः) के देवता सूर्य है। इसलिए मकान से पूर्व दिशा में पीपल वृक्ष न हो, अन्यथा अग्नि का भय (दुर्घटना) रहता है।
2. पाकड़ (प्लक्षः) वृक्ष के देवता यम है। दक्षिण भाग में पाकड़ का वृक्ष आयु की हानि संकेतित होती है।
3. वट-वृक्ष (न्यग्रोधः) के देवता वरुण है। घर के पश्चिमी भाग में वट-वृक्ष होने से शस्त्राघात का आशंका रहती है।
4. गूलर वृक्ष (उदुम्बर:) का देवता प्रजापति है। मकान के उत्तर भाग में गूलर-वृक्ष होने से नेत्र रोग होता है।

जितेंद्र कुमार
वास्तु होरा

06/01/2026

नक्षत्र-प्रकरण (नाड़ी ग्रन्थ के अनुसार): 4/2026

हस्त (அஸ்தம்) नक्षत्र का आरंभ:
अक्षर: भू – श – ना – डा।
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फल: नरम चाल वाला, पर स्वभाव से क्रोधी। अच्छी बुद्धि वाला, शरीर पर छोटे‑छोटे निशान/तिल वाला। उत्तम गुणों से युक्त, बुढ़ापे में मधुर भोजन की तलाश करने वाला – ऐसा हस्त नक्षत्र में जन्मा।
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नक्षत्र एवं विवरण:
आकृति: हथेली जैसी।
उच्च: धनु में साढ़े तीन नाड़ी तक।
योनि: महिष (भैंसा)।
पक्षी: परुन्दु (बड़ा शिकारी पक्षी/गरुड़)।
वृक्ष: अंजीर (अथ्थि)।
गण: (कणम्) – मनुष्य।
देवता: सूर्य (आदित्य)।
जाति: ब्राह्मण।
भूत: तेज (देयु – प्रकाश/आभा)।
गोत्र: अगस्त्य।
जन्म वार: शुक्रवार।
अनुकूलता: 10।
शुभ द्वार: पूर्व‑दक्षिण दिशा।
22 नाड़ी के बाद 4 नाड़ी “विष‑काल”; पुरट्टासी मास (आश्विन के आसपास) शून्य/अशुभ।
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हस्त नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति के लक्षण: वाणी में कुशल, हथियार पकड़ने में वीर।
चौड़ी छाती, उभरे कंधे, सुंदर, बुद्धिमान। दुनिया में नाम कमाने वाला, इच्छाओं से युक्त, विद्या‑धारी। गुरु के प्रति अच्छा, स्नान‑प्रिय, थोड़ा कम खाने वाला, अनेक लोगों को बचाने वाला। क्रोध के बाद जल्दी शांत होने वाला, राजसी प्रताप वाला।
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हस्त- प्रथम पाद: मेष नवांश-मंगल फल।
कद में थोड़ा छोटा, लेकिन सच्चा शरीर। घुटनों से जुड़ी हुई कंठ‑रचना (छोटा गला), नेतृत्व‑स्वभाव। मन थोड़ा कठोर, स्त्रियों पर मन स्थिर नहीं रहता। अत्याचार करने में कठोर, पीठ में हल्का उभार/कुब्जता, घने बालों वाली स्त्री को चाहने वाला।
संकेतित आयुमान: लगभग 100 वर्ष।

​हस्त नक्षत्र में उपस्थित ग्रह के फल: हस्त नक्षत्र में जन्म के समय यदि संबंधित ग्रह उपस्थित हो, तो परिणाम इस प्रकार बताए गए हैं:
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सूर्य: सीमावान, प्रतिष्ठित पुरुष (सम्मान और स्थिति वाला)।
चंद्र: उपाधि/पद वाला, “पट्ट” का धारणकर्ता (पदवी‑धारी, आदरणीय)।
मंगल: सेवक या सेवा‑स्वभाव वाला, अधीनस्थ रूप में कार्य करने वाला।
बुध: विद्वान, शास्त्र/ज्ञान में निपुण।
गुरु: राजदरबार से जुड़ा पुरुष, राजा के निकट का राजपुरुष।
शुक्र: स्त्री‑प्रिय, पर नेत्र‑दोष/अंधापन की संभावना वाला।
शनि: भूमि से लाभ पाने वाला, ज़मीन/जायदाद से फल पाने वाला।
राहु: पागल‑स्वभाव, विक्षिप्त या अत्यधिक अस्थिर मन वाला।
केतु: बहुत बुद्धिमान, तेज समझ वाला।

अन्य योग:
इस दिन नमस्कार/घर में रंगोली करना शुभ।
​आकाश में इंद्रधनुष दिखे तो 23 नाड़ी में वर्षा।
​मास प्रारंभ हो तो अहंकार दोष।
​“सुरम्” (फोड़ा) पर 9 नाड़ी में ठीक, अन्यथा घी से ओमजाप कर दही‑भात बलि दें।
​इस नक्षत्र में जन्मे को गाँव यात्रा पर चावल खाकर जाएँ।

नोट: अनुवाद में त्रुटि संभव है, इसलिए यदि कोई त्रुटि दृष्टिगोचर हो, तो सूचित करने का कष्ट करें। फलित में उयपोग से पहले शोध-पूर्ण अन्वेषण आवश्यक है।

जितेंद्र कुमार
एस्ट्रोलॉजिकल रेसर्चेस ग्रुप
वास्तु होरा

Culinary Team

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