Aanand Gupta

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Advocate, Author/Poet, Medical Microbiologist, Social Activist

Photos from Aanand Gupta's post 12/05/2026

बाबा रामजनम तिवारी के पूण्यतिथी पर बाबा के जीवनी
मधेश के सच्चा सिपाही बाबा राम जनम तिवारी
आनन्द गुप्ता अस्तित्व

नेपाल के राजनीति में विभेद के खिलाफ प्रखर रुप से आवाज उठावेवाला नेता हईँ बाबा रामजनम तिवारी । मधेश के सब केहु के आदर के पात्र हईँ बाबा राजम तिवारी । उहाँ का जिन्दगी भर मधेश के आ मधेशी लोग के अधिकार खातिर लड़त रहेवाला नेता हईँ । नेपाल के राजनीति में उहाँ का नाम श्रद्धा आ सम्मान के साथ लेहल जाला । मधेश के बात करते रघुनाथ ठाकुर, बाबा रामजनम तिवारी, श्यामलाल मिश्र, गजेन्द्रनारायण सिंह, रामराजाप्रसाद सिंह के नाम आवेला । बाकिर मधेश के खातिर आवाज उठावेवाला मेसे पहिलका नाम बाबा रामजनम तिवारी के ही आवेला । नेपाल के प्रजातान्त्रिक आन्दोलन में भी उहाँ के योगदान बहुते बा । उहाँ के योगदान के चलते सब केहु श्रद्धा से बाबा कहेला । उहाँ के सदभावना पार्टी के संस्थापक भी हईँ । सद्भावना पार्टी के नेता गजेन्द्र नरायण सिंह के भी उहेँ के राजनीति में लिआइल रहनी ।
बाबा के जनम वि.स. १९७१ कुवार पूर्णवासी के दिने पर्सा जिल्ला के मसिहानी गाँव में भइल रहे । उहाँ का राम मनोहर तिवारी आ रामरती देवी के एकल संतान रहनी । लइके से पढ़े में तेज राम जनम तिवारी भारत के कलकत्ता से आइ.ए. तकले के शिक्षा प्राप्त कइनी । भारत में शिक्षा प्राप्त कके सन १९३४ में ओहिजा ब्रिटिस भारतीय पुलिस में दरोगा (इन्सपेक्टर) के नोकरी करे लगनी । ब्रिटिस हुकुमत निहथ्था भारतीय पर गोली चलावे के दमन करे के कहे जवन बाबा के पसन्द ना रहे । ओहिसे महात्मा गांधी के आह्वान पर दरोगा के नोकरी छोड़ के अमेरिकी सूचना विभाग में अनुवादक के नोकरी करे लगनी । बाकिर बाबा के जनम त जनता खातिर संघर्ष करे खातिर भइल रहे । उहाँ के नोकरी भले करत रनी, बाकिर मन त जनता के ही रहे । ओहिसे एक वर्ष उहो नोकरी कके भारत के स्वाधिनता संग्राम में कुद पड़नी ।
भारत के आजादी के बाद आपन देश नेपाल लवट के निरंकुश राणा शासन के विरुद्व संघर्ष में लाग गइनी । राणाशाही के विरुद्ध के संघर्ष में तिवारी जी के रक्सौल शाखा के इंचार्ज के जिम्मेवारी मिलल । मिलल जिम्मेवारी बाबा बहुत बढि़याँ से निर्वाह कइनी । वि.स. २००७ साल में प्रजातन्त्र के स्थापना के बाद नेपाली काँग्रेस पार्टी के पर्सा जिल्ला के अध्यक्ष के रुप में काम करे लगनी । प्रजातन्त्र स्थापना के बादो मधेशी लोग पर भेदभाव बरकरारे रहे । जब प्रजातन्त्र के स्थापना खातिर सब केहू साथे लड़ल तबो मधेशी के सम्मान स्थापित ना होखे सकल । ई बात बाबा के बहुत खले । बाबा ई बात पार्टी में आ सरकार से करे के सोच बनवनी । नेपाली काँग्रेस के महोत्तरी जिल्ला के अध्यक्ष पं रामाकान्त झा आ तौलिहवा के दयाशंकर गुप्त के साथे मिल के ई बात पर चर्चा भइल । वि.स. २००८ साल सावन में तत्कालिन गृह मन्त्री आ नेपाली काँग्रेस के अध्यक्ष बी.पी. कोइराला से भेट कके भेदभाव हटावे खातिर अवाज उठावल लोग । बी.पी. कोइराला के कहनाम रहे कि अभिन प्रजातन्त्र ही लइका बा, धिरे– धिरे प्रजाजन्त्र बरिआर होते भेदभाव हट जाई । ओहिसे ई बात भिन मत उठाईँ । बाकिर तिवारी जी के चीत ना बुझल ।
वि.स. २००८ साल में राजा त्रिभुवन के वीरगंज यात्रा रहे । उहे क्रम में गहवा माई के मंदिर के आगे तराई काँग्रेस के ब्यानर के लगे स्वागत द्वार बनवावे के तराई मधेश के समस्या बतावे के प्रयास कइनी । राजा द्वारा काठमाड़ो बोलावला पर उहाँ जाके मधेशीयन के समस्या से अवगत करइनी । बाकिर राजा भी मधेश के समस्या के अनसुना कर देनी । अब बाबा के लगे मधेशीयन के अधिकार खातिर संघर्ष के सिवा कवनो रास्ता ना रहे ।
केनहु से मधेश के समस्या सामाधान ना भइला पर कुलानन्द झा के सभापतित्व में गठित तराई काँग्रेस में तिवारी जी महामन्त्री के रुप में मधेश के अधिकार खातिर आवाज उठावे लगनी । वि.स. २०१४ में नेपाली भाषा के राष्ट्रभाषा घोषित कर देहल गइल । ओकरा पहिले हिन्दी लगायत अन्य भाषा में पढ़ाई आ अन्य काम होत रहे । ओकरा बाद तिवारी जी हिन्दी रक्षा समिति गठन कके देशभर में भाषा आंदोलन संचालन कइनी । तिवारी जी के तत्कालिन नेपाली काँग्रेस के नेता महेन्द्र नरायण निधि भी साथ देहनी । ई समिति के ओर से राजा महेन्द्र से भेट कके हिन्दी के मान्याता के माग कइल गइल । बाद में हिन्दी के यथावत राखल गइल रहे ।
वि.स. २०१७ साल में प्रजातन्त्र के हत्या के बाद बाबा भारत निर्वासित हो गइनी । प्रजातन्त्र प्राप्ति खातिर पटना सम्मेलन में बाबा तराई काँग्रेस के नेपाली काँग्रेस में विलिन कर लेहनी । ओकरा बाद प्रजातन्त्र पुर्नस्थापना खातिर पूर्ण रुप से संघर्ष में लाग गइनी । वि.स. २०३५ साल में राजा द्वारा ३३ गो राजनीतिक कार्यकर्ता के क्षमा दान देहला के बाद बाबा नेपाल में अइनी ।
डा. हर्क गुरुङ के प्रतिवेदन में मधेशी के अप्रवासी भारतीय बतवला के बाद वि.स. २०४० में नेपाली सद्भावना परिषद गठन कके मधेश खातिर संघर्ष में जुट गइनी । नेपाली सद्भावना परिषद पर्सा के ओर से राजा बीरेन्द्र के गुरुङ प्रतिवेदन के खारिज करे खातिर एगो निवेदन देहल गइल । ओकरा बाद वि.स. २०४० पुष २५ गते तिवारी जी के वीरगंज से पकड़ के जेल डाल देहल गइल । बाबा पर सुरक्षा ऐन अन्तर्गत मुद्दा चलावल गइल । ओइसही काठमाड़ो में वि.स. २०४१ जेठ ५ से ७ तकले जनसँख्या परामर्श दातृ समिति द्वारा राष्ट्रीय विचार गोष्ठी राखल गइल रहे । ओह गोष्ठी में मधेश के नेतागण के रिहाई खातिर जोड़दार आवाज उठल । ओकरा कारण से काठमाड़ो से पकड़ाइल श्यामलाल मिश्र आ जलेश्वर में हिरासत में रहल गजेन्द्र नरायण सिंह जेठ ६ गते छोड़ देहल गइल । बाकिर बाबा राम जनम तिवारी के पुलिस ना छोड़लक । ऊ लोग के छुटला के २ महिना बाद ही बाबा के छोड़ल गइल । फेर वि.स. २०४२ साल में मधेश खातिर आवाज उठवला के कारण पकड़ के ९ महिना नख्खु जेल में डाल देहल गइल ।
प्रजातन्त्र के पुनस्र्थापना के बाद वि.स. २०४७ साल बैशाख ३ गते बाबा सद्भावना परिषद के सद्भावना पार्टी बना देहनी । बाकिर अपना लम्बा उम्र के कारण गजेन्द्र नरायण सिंह के अध्यक्ष बना के खुदे सर्वमान्य नेता बन गइनी । वि.स. २०४८ साल के आम निर्वाचन में सद्भावना पार्टी के प्रतिनीधि सभा में ६ गो स्थान जितल । बाकिर जीवन भर मधेश खातिर संघर्ष करेवाला तिवारी जी के विचार पर पार्टी ना चल सकल । ओह बेरा राष्ट्रीय सभा खातिर बाबा के नाम सर्वसम्मत होते हुवे भी अन्तिम क्षण में पार्टी दुसर के नाम पार्टी प्रस्ताव कर देलक । पार्टी के गतिविधी से रुष्ट होके बाद में बाबा साथियन के सहयोग में खुद के अध्यक्षता में नेपाल सदभावना पार्टी आर के गठन कइनी । तत्कालिन नेपाली काँग्रेस के सभापति पूर्व प्रधानमन्त्री कृष्ण प्रसाद भट्टराई बाबा के राष्ट्रीय सभा में मनोनित करे के प्रस्ताव कइनी । बाकिर बाबा ओह पद के भी अस्विकार कर देहनी आ मधेश खातिर अपना अन्तिम साँस तकले संघर्ष करत रहनी ।
दूगो लड़का आ एगो लड़की के जनम देके पहिलका पत्नी मोतीरानी के मृत्यु हो गइल । लइका सब बहुते छोट रहलनसँ । पालन पोषण में दिक्कत होत रहे । लइकन के पालन पोषण ठीक से हो सको कह के तिवारी जी के दुसरका विआह ललिता देवी से भइल । ललिता देवी के देह से भी तीन गो लड़का आ दूगो लड़की भइल । वि.स. २०५४ साल में तिवारी जी के बड़का बेटा के अचानक मृत्यु के खबर सुन के तिवारी जी के हृदयघात भइल । बाकिर भारत में लखनऊ में इलाज के बाद ठीक हो गइल । बाकिर शरीर कमजोड़ होखे लागल ।
कवनो पद के लालच कइले बिना मधेश के अधिकार खातिर जिनगी भर संघर्ष करत वि.स. २०५६ वैशाख २९ गते रात के १२ बजे मधेश के सच्चा योद्धा के दुःखद मृत्यु हो गइल । सादा जीवन आ उच्च विचार राखेवाला तिवारी जी पुरा जिनगी शोषित पिडि़त मधेशियन के अधिकार खातिर आवाज बुलन्द करत सेवा में समर्पित कवनो पद विना ही अमर हो गइनी ।
निर्वासन के समय में बाबा “प्रजातन्त्र का हत्यारा कौन” पुस्तक लिखनी । अनेकन राजनीतिक दस्तावेज तिवारी जी लिखले बानी । बाबा राम जनम तिवारी अपना जीवन भर प्रजातन्त्र खातिर आ व्यक्ति तथा सामुदायिक असमानता के विरुद्ध में संघर्ष कइनी । जेकर फल हमनी भोग रहल बानी । आजु हमनी अपना मातृभाषा में पढ़ पा रहल बानी त उहो कही ना कही बाबा राम जनम तिवारी के भाषा आन्दोलन के बदौलत ह । स्वाभिमानी बाबा राम जनम तिवारी के योगदान के कदर स्वरुप गणपन्त्र स्थापना के बाद वीरगंज घण्टाघर के लगे पुरा कद के शालिक स्थापना भइल बा । बाकिर तिवारी जी के योगदान अनुसार के कदर नइखे भइल । मधेश आ देश में रहल असमानता व्यवहारिक रुप में खात्मा ही महान क्रान्तीकारी तिवारी जी के योगदान के उचित कदर होई ।

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