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17/04/2026
'गोदनामा' (Adoption Deed) क्या होती है ? इसे कैसे बनाया जाता है ?👇
'गोदनामा' (Adoption Deed), जिसे कानूनी भाषा में दत्तक पत्र भी कहा जाता है, एक ऐसा महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है जो किसी बच्चे को गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया को वैधानिकता प्रदान करता है। यह दस्तावेज इस बात का प्रमाण होता है कि जैविक माता-पिता (Biological Parents) ने स्वेच्छा से अपने बच्चे को दत्तक माता-पिता (Adoptive Parents) को सौंप दिया है, और दत्तक माता-पिता ने सभी कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ उसे स्वीकार कर लिया है।
भारत में गोद लेने की प्रक्रिया और गोदनामे के लिए मुख्य रूप से अलग-अलग धर्मों और परिस्थितियों के आधार पर कानून लागू होते हैं:
1. लागू होने वाले प्रमुख कानून (Applicable Laws)
》हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (Hindu Adoptions and Maintenance Act - HAMA): यह कानून हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म को मानने वालों पर लागू होता है। भारत में सीधे रिश्तेदारों या परिचितों के बीच होने वाले अधिकांश पारिवारिक 'गोदनामे' इसी अधिनियम के तहत निष्पादित किए जाते हैं।
》किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice Act, 2015): यह एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) कानून है। यदि कोई व्यक्ति अनाथ, छोड़े गए (abandoned) या सरेंडर किए गए बच्चे को गोद लेना चाहता है, तो उसे धर्म की परवाह किए बिना इसी कानून और CARA (Central Adoption Resource Authority) के दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है। इसमें गोदनामा सीधे नहीं बनता, बल्कि कोर्ट से Adoption Order पारित होता है।
》अभिभावक और प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 (Guardians and Wards Act, 1890): मुस्लिम, ईसाई और पारसी पर्सनल लॉ में पूर्ण रूप से गोद लेने की मान्यता नहीं है, इसलिए ऐतिहासिक रूप से वे इस कानून के तहत बच्चे की 'गार्जियनशिप' (संरक्षण) लेते थे। हालांकि, अब JJ Act 2015 के तहत कोई भी नागरिक पूर्ण रूप से बच्चे को गोद ले सकता है।
2. गोदनामे के प्रमुख कानूनी पहलू (Key Legal Aspects)
विशेष रूप से HAMA, 1956 के तहत एक वैध गोदनामे के लिए निम्नलिखित कानूनी पहलुओं का पालन होना अनिवार्य है:
》वैधता और योग्यता (Capacity to Adopt): गोद लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ (Sound mind) और वयस्क (Major) होना चाहिए। यदि गोद लेने वाला व्यक्ति विवाहित है, तो पति/पत्नी की सहमति (Consent) अनिवार्य है।
》आयु का अंतर (Age Difference): यदि कोई पुरुष किसी बालिका को गोद लेता है, या कोई महिला किसी बालक को गोद लेती है, तो दत्तक माता-पिता और बच्चे की उम्र में कम से कम 21 वर्ष का अंतर होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
》पंजीकरण (Registration): Registration Act, 1908 के तहत गोदनामे को सब-रजिस्ट्रार (Sub-Registrar) के कार्यालय में पंजीकृत (Registered) कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। HAMA की धारा 16 के अनुसार, यदि गोदनामा पंजीकृत है और दोनों पक्षों के हस्ताक्षर हैं, तो कोर्ट यह मानकर चलता है (Presumption of law) कि गोद लेने की प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध है।
》अखंडनीय प्रक्रिया (Irrevocability): HAMA की धारा 15 के तहत यह स्पष्ट नियम है कि एक बार यदि कोई वैध गोदनामा हो जाता है, तो उसे बाद में रद्द (Cancel) नहीं किया जा सकता। दत्तक माता-पिता बच्चे को त्याग नहीं सकते और न ही बच्चा वापस अपने जैविक माता-पिता के परिवार में लौट सकता है।
》अधिकारों का हस्तांतरण (Transfer of Rights): गोदनामे के निष्पादन की तारीख से, बच्चे के अपने जैविक परिवार से सभी कानूनी संबंध (विवाह के नियमों को छोड़कर) समाप्त हो जाते हैं। बच्चे को दत्तक परिवार में एक जैविक बच्चे (Biological child) के समान ही संपत्ति में उत्तराधिकार और अन्य सभी कानूनी अधिकार प्राप्त हो जाते हैं।
》प्रतिफल का निषेध (Prohibition of Consideration): गोद लेने की एवज में किसी भी प्रकार के पैसे, संपत्ति या इनाम का लेन-देन HAMA की धारा 17 के तहत एक दंडनीय अपराध है।
3. आवश्यक दस्तावेज
एक मजबूत और कानूनी रूप से बाध्यकारी गोदनामा तैयार करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
* जैविक और दत्तक माता-पिता दोनों के पहचान और पते के प्रमाण (Aadhar, PAN)।
* बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र।
* दोनों पक्षों की तस्वीरें और कम से कम दो गवाहों (Witnesses) के पहचान प्रमाण।
* दत्तक माता-पिता का विवाह प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।
'Law Ki Pathshala' द्वारा यहाँ हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA, 1956) के तहत तैयार किए जाने वाले एक मानक 'गोदनामा' (Adoption Deed) का ड्राफ्टिंग फॉर्मेट (मुख्य क्लॉज़) दिया जा रहा है। आप अपनी खास ज़रूरतों के हिसाब से इसे कस्टमाइज़ करवा सकते हैं. कृपया ध्यान दें कि यह पोस्ट/इमेज सिर्फ़ आम जानकारी और शिक्षा के मकसद से बनाई गई है; इसे कानूनी सलाह के तौर पर नहीं माना जाये। चूंकि हर मामला अलग होता है, इसलिए कृपया इस दस्तावेज़ को सीधे इस्तेमाल के लिए सिर्फ़ डाउनलोड और प्रिंट न करें। इसके बजाय, कोई भी कानूनी कार्रवाई या लेन-देन करने से पहले, किसी योग्य अधिवक्ता से मिलकर इसे तैयार करवाएं, ताकि आपको अपने मामले की खास बातों के हिसाब से सही सलाह मिल सके।
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:दत्तक पत्र (Deed of Adoption):
यह दत्तक पत्र आज दिनांक [दिन] [महीना] [वर्ष] को [शहर/स्थान का नाम] में निम्नलिखित पक्षों के बीच निष्पादित किया गया:
प्रथम पक्ष (जैविक माता-पिता / Natural Parents):
1. श्री [जैविक पिता का नाम], आयु [उम्र] वर्ष, पुत्र श्री [दादा का नाम]
2. श्रीमती [जैविक माता का नाम], आयु [उम्र] वर्ष, पत्नी श्री [जैविक पिता का नाम]
निवासी: [पूरा पता]
(जिन्हें आगे इस विलेख में "देने वाले माता-पिता" कहा गया है)
द्वितीय पक्ष (दत्तक माता-पिता / Adoptive Parents):
1. श्री [दत्तक पिता का नाम], आयु [उम्र] वर्ष, पुत्र श्री [पिता का नाम]
2. श्रीमती [दत्तक माता का नाम], आयु [उम्र] वर्ष, पत्नी श्री [दत्तक पिता का नाम]
निवासी: [पूरा पता]
(जिन्हें आगे इस विलेख में "गोद लेने वाले माता-पिता" कहा गया है)
चूँकि (Recitals):
1. प्रथम पक्ष एक बालक/बालिका के जैविक माता-पिता हैं, जिसका नाम [बच्चे का नाम] है, और जिसका जन्म दिनांक [जन्म तिथि] को [जन्म स्थान] पर हुआ था।
2. द्वितीय पक्ष निःसंतान हैं (या उनके पास कोई पुत्र/पुत्री नहीं है) और वे हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के तहत एक बालक/बालिका को गोद लेने के इच्छुक हैं।
3. द्वितीय पक्ष ने प्रथम पक्ष से उनके उक्त बच्चे को गोद लेने का अनुरोध किया, जिसे प्रथम पक्ष ने अपनी पूर्ण और स्वतंत्र सहमति से, बिना किसी दबाव, भय या लालच के स्वीकार कर लिया है।
अत: यह विलेख निम्नलिखित शर्तों को प्रमाणित करता है (Terms and Conditions):
1. बच्चे को सौंपना और स्वीकार करना (Giving and Taking):
प्रथम पक्ष ने दिनांक [गोद देने की तिथि] को अपने निवास/मंदिर [स्थान का नाम] पर आयोजित एक पारिवारिक समारोह में, अपने बच्चे [बच्चे का नाम] को शारीरिक रूप से द्वितीय पक्ष को सौंप दिया है। द्वितीय पक्ष ने बच्चे को अपने दत्तक पुत्र/पुत्री के रूप में सभी अधिकारों के साथ स्वीकार कर लिया है।
2. अधिकारों का हस्तांतरण (Transfer of Legal Ties):
इस विलेख के निष्पादन और बच्चे के हस्तांतरण की तिथि से, बच्चे के अपने जैविक परिवार (प्रथम पक्ष) से सभी कानूनी और पारिवारिक संबंध समाप्त माने जाएंगे (हिंदू विवाह अधिनियम के तहत निषिद्ध संबंधों को छोड़कर)।
3. दत्तक परिवार में अधिकार (Rights in Adoptive Family):
आज से यह बच्चा द्वितीय पक्ष का कानूनी और वैध पुत्र/पुत्री माना जाएगा। उसे द्वितीय पक्ष की संपत्ति, उत्तराधिकार, और भरण-पोषण में वे सभी अधिकार प्राप्त होंगे जो एक जैविक संतान को प्राप्त होते हैं।
4. नाम में परिवर्तन (Change of Name):
आज से बच्चे का नाम बदलकर [बच्चे का नया नाम, यदि कोई हो] रखा जाता है और भविष्य में उसे इसी नाम से और द्वितीय पक्ष के पुत्र/पुत्री के रूप में जाना जाएगा।
5. अखंडनीय प्रक्रिया (Irrevocability):
हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 15 के अनुसार, यह गोदनामा पूर्ण रूप से अखंडनीय (Irrevocable) है। भविष्य में न तो प्रथम पक्ष बच्चे को वापस मांग सकता है, न ही द्वितीय पक्ष बच्चे को त्याग सकता है, और न ही बच्चा स्वयं इस गोदनामे को रद्द कर सकता है।
6. प्रतिफल का अभाव (No Consideration):
दोनों पक्ष यह घोषणा करते हैं कि इस गोद लेने की प्रक्रिया में किसी भी पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को न तो कोई नकद राशि दी गई है, न ही कोई संपत्ति या अन्य कोई लाभ (Consideration) दिया या लिया गया है, जो कि अधिनियम की धारा 17 के तहत वर्जित है।
7. कानूनी क्षमता (Legal Capacity):
दोनों पक्ष यह घोषित करते हैं कि वे मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ हैं, वयस्क हैं, और हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत गोद लेने और देने के लिए कानूनी रूप से सक्षम हैं।
साक्ष्य स्वरूप (In Witness Whereof):
उपरोक्त पक्षों ने अपने पूरे होशो-हवास में, बिना किसी अनुचित दबाव के, नीचे दिए गए गवाहों की उपस्थिति में इस दत्तक पत्र पर अपने हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान अंकित किए हैं।
हस्ताक्षर प्रथम पक्ष (जैविक माता-पिता):
1. ____________ (पिता)
2. ____________ (माता)
हस्ताक्षर द्वितीय पक्ष (दत्तक माता-पिता):
1. ____________ (पिता)
2. ____________ (माता)
गवाह (Witnesses):
(गवाहों के नाम, पिता का नाम, पता और हस्ताक्षर अनिवार्य हैं)
1. गवाह 1: __________________ (हस्ताक्षर)
नाम एवं पता: ______________________
2. गवाह 2: __________________ (हस्ताक्षर)
नाम एवं पता: ______________________
Note :
ड्राफ्टिंग से जुड़े कुछ अहम सुझाव:
* यदि किसी धार्मिक अनुष्ठान (जैसे दत्ता होमम) का आयोजन किया गया है, तो उसका उल्लेख 'चूँकि' (Recitals) वाले हिस्से में किया जा सकता है।
* कोर्ट में इस दस्तावेज़ की वैधता पुख्ता करने के लिए Registration Act के तहत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में इसका रजिस्ट्रेशन करवाना अत्यंत आवश्यक है।
* यदि बच्चा किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के तहत अनाथालय या किसी एजेंसी से गोद लिया जा रहा है, तो यह साधारण डीड काम नहीं आती, उसके लिए कोर्ट से 'Adoption Order' प्राप्त करना होता है।
Disclaimer:
यह पोस्ट केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसे कानूनी सलाह न माना जाए। चूंकि हर मामले अलग अलग हो सकते हैं. कृपया इसको download करके इसका प्रिंट नहीं निकले. ब्लकि किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले अपने मामले के अनुसार किसी योग्य वकील से सलाह अवश्य लें।
गिरफ्तारी को ले कर – सुप्रीम कोर्ट के 11 निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा –
गिरफ्तारी में व्यक्ति के अधिकारों का पालन जरूरी है।
कोर्ट ने 11 निर्देश दिए –
1️⃣ गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी की पहचान साफ होनी चाहिए।
2️⃣ गिरफ्तारी का मेमो बनेगा, गवाह और गिरफ्तार व्यक्ति के हस्ताक्षर होंगे।
3️⃣ परिवार या मित्र को तुरंत सूचना देना अनिवार्य है।
4️⃣ गिरफ्तारी की सूचना रिकॉर्ड में दर्ज होगी।
5️⃣ गिरफ्तार व्यक्ति को मेडिकल जांच का अधिकार होगा।
6️⃣ हर 48 घंटे में मेडिकल परीक्षण अनिवार्य होगा।
7️⃣ गिरफ्तारी के स्थान की जानकारी स्थानीय पुलिस कंट्रोल रूम को दी जाएगी।
8️⃣ गिरफ्तार व्यक्ति को वकील से मिलने का अधिकार होगा।
9️⃣ गिरफ्तारी की सूचना जिला और राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम में भेजी जाएगी।
🔟 केस डायरी में हर जानकारी दर्ज होगी।
1️⃣1️⃣ मैजिस्ट्रेट को सभी नियमों के पालन की पुष्टि करनी होगी।
फैसले में कहा गया –
“इन अधिकारों का उल्लंघन नागरिक की स्वतंत्रता पर हमला होगा।
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