Prayag Post
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एक चुने हुए सांसद पर जानलेवा हमला होता है, लेकिन न तो प्रधानमंत्री कुछ बोलते हैं न मुख्यमंत्री!
क्या भारत में लोकतंत्र का यही चारित्र है कि सत्ता में आते ही विपक्षी दल दुश्मन बन जाते हैं?
2022 का विधानसभा चुनाव था पंजाब में किसानों ने वाराणसी के सांसद (प्रधानमंत्री) का रास्ता रोक दिया था, किसान करीब 100-200 मीटर दूर रहे होंगे, सिर्फ रास्ता रोकने मात्र पर यह हुआ कि पीएम को जान से मारने की कोशिश की गई? नोएडा गैंग (गुलाम व दलाल पत्रकार) ने आसमान सिर पर उठा लिया था!
2005 में यूपी के मऊ में दंगा हुआ, तब गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ वहां पहुंचे, योगी को कोई खरोच तक नहीं आयी थी!
2007 में गोरखपुर में प्रीवेंटिव डिटेंशन हुआ योगी जी का 11 दिन बाद वे छूटे, जब दिल्ली में संसद लगी तो योगी जी भरी सभा में फफक पड़े क्योंकि एक चुने हुए प्रतिनिधि के साथ दुर्व्यवहार हुआ था!
तब संसद में योगी ने कहा था कि "अगर संसद भी उनकी सुरक्षा नहीं कर सकती, तो वे इस्तीफा दे देंगे"
उस समय किसी सांसद ने यह नहीं कहा कि योगी के प्रति जनता का आक्रोश था, समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भी सहानुभूति दिखाई।
लेकिन BJP के बंगाल में जो अराजकता हो रही है वह अतुलनीय है और महासंकट की आहट है!
लोकसभा अध्यक्ष जी ने भी बंगाल पुलिस से पूछने की जहमत नहीं उठाई कि एक सांसद ( ) पर हमला क्यों हुआ?
2023 में बिहार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाई थी तब बीजेपी सांसद जनार्दन सिगरीवाल को एक दो लट्ठ शायद लग गई थी, माननीय ओम बिरला जी ने पटना के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को दिल्ली तलब कर लिया था!
लेकिन अब संसद का कस्टोडियन कहाँ है?भारत की संसदीय प्रणाली में ये संकीर्णता कब आई?
भारत का लोकतंत्र और इसकी परंपराएं अस्तित्व के संकट के दौर में हैं,इन्हें बचा लीजिए।
जय हिंद
12/05/2026
austerity begins at home
1965 युद्ध के दौरान सरेंडर के लिए अमेरिका भारत पर दबाव बनाने लगा, उसने भारत कोगेहूं देना बंद कर दिया यह सोचके कि भारत भूखा रहेगा तो सरेंडर कर देगा! लेकिन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी झुके नहीं।
देश में खाद्यान्न संकट हुआ। शास्त्री जी ने 19 अक्टूबर 1965 को रेडियो पर देश के नाम एक संबोधन दिया कि
हफ्ते में कम से कम एक बार (अक्सर सोमवार को) एक वक्त का भोजन छोड़ने की अपील की। इससे अनाज बचाकर जरूरतमंदों तक पहुँचाया जा सके।
लेकिन यह अपील करने से पहले उन्होंने अपने परिवार पर इसका प्रयोग किया
उनके बेटे अनिल शास्त्री ने 2015 में Times of India को बताया कि उनके पिता ने माँ (ललिता शास्त्री) से कहा कि एक दिन भोजन न बनाएँ, ताकि देखा जा सके कि बच्चे बिना खाए रह सकते हैं या नहीं।
परिवार ने इसे सफलतापूर्वक किया, तब जाकर शास्त्री जी ने राष्ट्र को अपील की कि हफ्ते में एक दिन एक वक्त का खाना छोड़ दो।
इसका व्यापक असर पड़ा नागरिकों के साथ साथ, रेस्तरां होटल ढाबा तक ने भी अपने अपने स्तर पर इसको लागू लिया।
शास्त्री जी ने व्यक्तिगत उदाहरण दिया खुद वेतन कम लिया, सादा जीवन जिया,
परिवार पर पहले नियम लागू किया, फिर देश को अपील की (leadership by example)।
जय जवान जय किसान का नारा दिया, कृषि पर फोकस बढ़ाया (Green Revolution की नींव)।
संकट में आत्मनिर्भरता पर जोर, विदेशी निर्भरता कम करने की कोशिश।
यह नेतृत्व की मिसाल है कि संकट में नेता पहले खुद त्याग करें, फिर लोगों से अपील करें। शास्त्री जी की सादगी, पारदर्शिता और "austerity begins at home" आज भी प्रासंगिक है चाहे कोई भी पार्टी हो। यह राजनीतिक नहीं, बल्कि सिद्धांत है।
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