Geeta Hospital Prayag Raj

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Today Medical services have become victim of Market force, Corporatocracy and Greed. Honest opinion

17/03/2023
14/02/2023

Non surgical management of pain due to sciatica, disc prolapse, brachial neuralgia, frozen shoulder, psuedecs dystrophy, osteoarthritis of Knee joint.

A new dimension of treatment for so many painful conditions, which are either difficult to treat or need surgery.
Pain starts vanishing within half and hour of treatment.
❤️❤️

12/01/2023

Celebrating my 2nd year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

Photos from Geeta Hospital Prayag Raj's post 07/11/2022

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कोरॉना (Covid ) ने पिछले दो वर्षों में पूरे विश्व में मौत का जो खेल खेला उससे हम सब परिचित हैं। हम सबने न जाने कितने संबंधियों और परिचितों को खोया है। परंतु जो लोग कोरोना के शिकार तो हुए परंतु उचित इलाज और देखभाल से बच गए, उनको अनेक नई समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है।

उनमें से एक समस्या जो शरीर के अस्थियों और जोड़ों को प्रभावित कर रही है वह है Avascual Necrosis of femoral head (AVN) . जिसका अर्थ है कूल्हे की हड्डी में रक्त प्रवाह समाप्त होने के कारण उसमें होने वाली सड़न या अस्थि कोशिकाओं का मृत होना। कूल्हे के जोड़ में दो अस्थियां होती हैं : एक सॉकेट जिसे acetabulum, दूसरा Femoral head अर्थात कूल्हे का गोला। आपने सुना होगा कि कूल्हे का फ्रैक्चर होने पर ऑपरेशन किया जाता है। कम उम्र में फ्रेक्चर को जोड़ने का ऑपरेशन किया जाता है, और उम्र यदि अधिक है तो कूल्हा बदला जाता है, जिसे हिप रिप्लेसमेंट कहते हैं।

यह बीमारी पहले भी होती थी, विशेषकर कूल्हे का फ्रैक्चर या जोड़ के खिसकने पर (dislocation)। इसके अतिरिक्त कुछ दवाओं के प्रयोग यथा स्टीरॉयड और कैंसर की दवाओं के उपयोग के कारण, रक्त में कुछ विशेष बदलाव होने यथा सिकल सेल डिजीज, शराब के सेवन के कारण, और अन्य कारणों से भी यह बीमारी होती है।

बच्चों में भी यह बीमारी होती है जिसे Perthes disease कहते हैं, जिसके कारण कूल्हे के गोले ( femoral head) का आकार बदल जाता है।

एक और कारण से भी यह बीमारी होती है जिसे idiopathic कहते हैं। अर्थात अज्ञात कारणों से।

परंतु कोरोना महामारी के उपरांत इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। कारण बहुत स्पष्ट नहीं हैं, परंतु अनुमान लगाया जा रहा है कि बीमारी के इलाज में जीवन रक्षक स्टीरॉयड के प्रयोग के कारण इस बीमारी में बढ़ोत्तरी हुई है।

इस बीमारी में कूल्हे के गोले का रक्त संचार अवरुद्ध हो जाता है जिसके कारण गोले की अस्थि कोशिकाएं मृत हो जाती हैं जिसे necrosis कहते हैं। शरीर इन मृत कोशिकाओं को नवीन और जीवित कोशिकाओं से बदलने का प्रयास करता है। परंतु यह कार्य अत्यंत दीर्घकालिक होता है। ऐसे में शरीर के वजन और बीमारी के स्वभाव के कारण कूल्हे के गोले का आकार बदल जाता है, जो जीवन के उत्तरार्ध में कूल्हे की गठिया ( Osteoarthritis of hip) के रूप में विकसित होता है।

यदि यह बीमारी वयस्क व्यक्ति में होती है तो उसका भी यदि समय से निदान और उपचार न हो तो वह भी कूल्हे की गठिया में परिवर्तित हो जाता है। जिसमें अंततः कूल्हा बदलना ( Hip Replacement : THR) ही पड़ता है।

परंतु यदि इसका निदान उचित समय में हो जाय तो कूल्हा बचाने वाला ऑपरेशन करके ओरिजिनल कूल्हे को बचाया जा सकता है। आजकल डायग्नोसिस के उत्तम साधन हैं, जिसके माध्यम से इसे शुरुवाती अवस्था में पकड़ा जा सकता है और ओरिजिनल कूल्हा बचाया जा सकता है।

इस के बीमारी में कूल्हे में दर्द होता है जो जांघ या पृष्ठभाग ( buttock) में फैलता है विशेष कर जब भी रोगी सक्रिय रहता है। आराम करने पर दर्द कम या समाप्त हो जाता है। परंतु एडवांस स्टेज में आराम के समय भी कूल्हे में दर्द हो सकता है।

इसलिए इस बीमारी का समय पर निदान करना जीवन दायक होता है। क्योंकि प्रायः यह बीमारी वयस्क उम्र में होती है। वयस्क उम्र में यदि इस बीमारी का समय से निदान नहीं हो पाता है तो अंततः कूल्हा बदलना पड़ता है। नकली कूल्हे की भी अपनी एक उम्र होती है। इसलिए यदि कम उम्र में कूल्हा बदला जाएगा तो उसको दुबारा बदलने की आवश्यकता पड़ेगी। इसलिए आवश्यक यह है कि सावधानी बरती जाए, और यदि ऐसे कोई लक्षण दिखें तो उचित डॉक्टर के पास तुरंत पहुंचे।
धन्यवाद।
नोट: यह एक जागरूकता अभियान हेतु लिखा गया लेख है।
नीचे कुछ चित्र हैं जो संभवतः आपको इस बीमारी के बारे में मार्गदर्शित करेंगे।

Dr Tribhuwan Singh
Geeta Hospital Prayag Raj

Phone number for consultation : 9919776651

02/11/2022

#विटामिन_सी : वोकल अबाउट लोकल

इस समय आंवले का सीजन है। प्रतिदिन एक या दो आंवला आपको अवश्य खाना चाहिए। आंवला में विटामिन C की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसके अतिरिक्त इसमें विटामिन A, विटामिन E तथा कैल्शियम और आयरन भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। विटामिन ए आंखों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है, इसके अतिरिक्त यह बढ़ती उम्र के साथ मैक्यूलर डिजनरेशन जैसी घातक बीमारी से भी बचाती है। यह बीमारी आंख की रोशनी को बाधित करती है।
विटामिन सी एक अत्यंत महत्वपूर्ण विटामिन है जिसका उपयोग शरीर के अनेक प्रक्रियाओं में होता है, विशेष कर collegen निर्माण में। Collagen की आवश्यकता शरीर में निरंतर हो रही, कोशिकाओं और ऊतकों ( Cells and Tissues) के टूटफूट के पुनर्निर्माण के लिए पड़ती है। इसके अतिरिक्त यह एंटी ऑक्सीडेंट है। जो स्ट्रेस डिसऑर्डर से लड़ने में सहायक होता है। मानसिक और शारीरिक तनाव दोनों।
विटामिन सी की कमी से त्वचा की चमक खतम हो सकती है, एक्ने जैसे बीमारी। इसके अतिरिक्त रक्त नलियों से रक्त लीक ( Bruising), अस्थियों की छिद्रता ( ओस्टियोपोरोसिस), और उसके कारण फ्रैक्चर, एनीमिया ( रक्त की कमी) आदि आदि बीमारियो का जन्म इसकी कमी के कारण होता है।
इसके अतिरिक्त इसकी कमी से बालों की चमक और उसके स्वरूप में बदलाव ( फटे हुए बाल ), नाखूनों के शक्ल में चम्मच जैसा बदलाव, घावों के ठीक होने में देरी, जोड़ों में रक्तस्राव, और अस्थियों का कमजोर होना, मसूड़ों से रक्तस्राव, इम्यूनिटी का कमजोर होना, आयरन deficeimcy एनामिया, थकान और मानसिक अवसाद, और अकारण वजन में बढ़ोत्तरी आदि इसके अन्य लक्षणों में से हैं।
आंवला नींबू जैसे स्थानीय फल हैं जो सहज इसकी कमी को पूरी कर सकते हैं। इसे अपने आहार का नियमित हिस्सा बनाकर आप उपरोक्त व्याधियों से मुक्त रह सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, कैंसर, हार्ट डिजीज, डिमेंशिया ( याददाश्त का कम होना) आदि के बचाव में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

Tribhuwan Singh

Geeta Hospital Prayag Raj

For Health Awareness purposes only. Consult your doctor before self medication in case of above mentioned diseases.

Photos from Geeta Hospital Prayag Raj's post 28/10/2022

#डेंगू: सीरीज 3
विश्व के लगभग 128 देश इस बीमारी WHO के अनुसार प्रतिवर्ष इस बीमारी से लगभग 390 मिलियन ( एक मिलियन=10 लाख) लोग प्रभावित होते हैं जिनमें से अधिकांश लोगों में इस बीमारी के लक्षण प्रकट नहीं होते। लगभग 96 मिलियन में इस बीमारी के लक्षण प्रकट होते हैं,उनमें से भी अधिकांश लोगों में बहुत हल्के फुल्के यथा फ्लू जैसे लक्षण प्रकट होते हैं, जो स्वचिकित्सा या बिना किसी चिकित्सा के ठीक हो जाते हैं। इन मरीजों को हो सकता है कि गंभीर बीमारी न हो लेकिन यह डेंगू फैलाने में सहायक होते हैं।
डेंगू के मच्छर काटने के लगभग एक सप्ताह बाद इसके लक्षण प्रकट होते हैं, इस अवधि को मेडिकल टर्मिनोलॉजी में इनक्यूबेशन पीरियड कहते हैं।
इस बीमारी से शिशु, बच्चे, युवा सभी प्रभावित होते हैं।
जैसा कि पूर्व लेख में बताया गया है कि डेंगू वायरस चार प्रकार का होता है, और एक प्रकार के डेंगू से पीड़ित होने के उपरांत हमारे शरीर में उस प्रकार के वायरस के प्रति इम्यूनिटी विकसित हो जाती है, परंतु अन्य तीन प्रकार के वायरस से आप फिर भी ग्रसित हो सकते हैं। और दुबारा ग्रसित हुए व्यक्तियों में रोग अधिक गंभीर हो जाता है। डेंगू के बुखार का समयकाल 2 से सात दिन तक का होता है।
WHO ने डेंगू को दो श्रेणियों में बांट रखा है।
1. Dengu with/ without warning signs
2. Severe Dengu अर्थात गंभीर डेंगू
डेंगू के लक्षण:
तेज बुखार के साथ, बदन में अत्यधिक पीड़ा, जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उबकाई, उल्टी, ग्रंथियों में सोथ, शरीर में बहुत महीन चकत्ते ( rash) जैसे पिन चुभोने पर चमड़ी में लालिमा आ जाती है।
गंभीर डेंगू: बीमारी के लक्षण प्रकट होने के बाद 3 से 7 दिन का समयकाल क्रिटिकल पीरियड या अवस्था कहलाती है। इस समयकाल में कुछ मरीज 24 से 48 घंटे के लिए गंभीर स्थित में जा सकते हैं, और बीमारी के वार्निंग लक्षण प्रकट हो सकते हैं। इस दौरान शरीर का तापमान गिर जाता है, और शॉक जैसे लक्षण, या फिर हेम्मोरहेज ( रक्तस्राव) के लक्षण दिख सकते हैं। यह अवस्था प्राणघातक सिद्ध हो सकती है।

सावधान होने के लक्षण: ( Warning Signs) पेट में तेज दर्द लगातार उल्टी का होनासांस तेज चलनामसूड़ों या नाक से रक्तस्राव होनाबेचैनीउल्टी या पाखाने में रक्त आना।

ऐसी स्थिति में मरीज को भर्ती कराने की आवश्यकता होती है।
रोगियों में प्राणघात के दो मुख्य कारण हैं। रक्त कणिकाओं विशेष कर प्लेटलेट की कमी और अन्य शारीरिक परिवर्तनों के कारण रक्तस्राव का होना।
दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम।
दूसरा कारण होता है रक्त की धमनियों से fluid अर्थात रिसाव होना, जिसके कारण शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं। यह मृत्यु का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण है जिसका कोई इलाज नहीं है सिवा रोगी के vitals को मेंटेन करने के मेडिकल उपायों के।
इलाज: इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, जैसा कि प्रायः सभी वायरल इन्फेक्शन के साथ है। अभी corona virus के आतंक से हम जूझ चुके हैं। इसलिए मात्र symptomatic treatment ही इसका एकमात्र इलाज है। यदि अस्पताल में भर्ती नहीं है तो आराम, बुखार को कम करने के लिए पैरासिटामोल ( Dolo 😀) और पर्याप्त मात्रा में लिक्विड डाइट।
असली खेल जो चल रहा है वह है प्लेटलेट का जिसके लिए यह लेख लिखा जा रहा है।
करेंट मेडिकल डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट 2022 की पुस्तक बोल रही है कि प्लेटलेट कणिकाओं को तभी चढ़ाया जाना चाहिए जब उनकी संख्या 10,000 से कम हो जाय, या फिर उपरोक्त वर्णित रक्तस्राव का कोई लक्षण न हो। पुस्तक यह भी वार्निंग दे रही है कि यदि अनावश्यक रूप से प्लेटलेट चढ़ाया जाता है तो शरीर में स्वत: प्लेटलेट निर्मित होने वाली प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
स्नैप शॉट यहां देखिए और स्वयं पढ़ लीजिए।

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