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24/08/2022
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BILKIS BANO ,”The 2002 Gang R**e Victim” – The Legal Concept BILKIS BANO ,”The 2002 Gang R**e Victim” by Mohammad Alam · August 24, 2022 Spread the love On February 28, 2002, Bilkis fled her village, Radhikpur in Dahod district, after violence erupted in the state in the aftermath of the previous day’s incident at Godhra station, in which the Sabarmati...
Life of A judiciary Aspirant..
10/08/2020
◆◆ CONSUMER PROTECTION ACT, 2019◆◆
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1.चर्चा में क्यों ?
2.कानून की मुख्य विशेषताएं
3.केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण
4.उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग (CDRC)
5.सीडीआरसी का अधिकार क्षेत्र
6.कॉमर्स प्लेटफार्मो पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का प्रभाव
7.CCPA के कार्य
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चर्चा में क्यों ?
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20 जुलाई 2020 से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, सम्पूर्ण देश में प्रभावी हो गया है।इसने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम -1986 को विस्थापित किया है।
● उपभोक्ता संरक्षण विधयेक, 2019 के मुख्य तथ्य : कानून की मुख्य विशेषताएं
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अधिनियम में उपभोक्ता की परिभाषा देते हुए कहा गया है कि उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो मूल्य देकर कोई वस्तु अथवा सेवा खरीदता है। इसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई व्यक्ति फिर से बेचने के लिए अथवा वाणिज्यिक उद्देश्य से कोई वस्तु अथवा सेवा हस्तगत करता है तो वह व्यक्ति उपभोक्ता नहीं कहलायेगा।
अधिनियम में सब प्रकार के लेन-देन को शामिल किया गया है, जैसे – ऑफलाइन, ऑनलाइन, टेली शौपिंग, बहु-स्तरीय विपणन अथवा प्रत्यक्ष विक्रय।
अधिनियम में उपभोक्ताओं के कुछ मुख्य अधिकार बताये गये हैं :
i) जीवन एवं संपत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं एवं सेवाओं के विपणन से संरक्षण पाना।
ii) वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, कार्य क्षमता, शुद्धता, मानक तथा मूल्य से सम्बंधित सूचना पाना।
iii) प्रतिस्पर्धात्मक दामों पर कई प्रकार की वस्तुओं अथवा सेवाओं तक पहुँचना ।
iv) अन्यायपूर्ण अथवा बंधनकारी व्यापार प्रचलनों का समाधान माँगना।
अर्थात अधिनियम में छह उपभोक्ता अधिकारों को परिभाषित किया गया है :
1.सुरक्षा का अधिकार।
2.सूचना देने का अधिकार।
3.चुनने का अधिकार।
4.सुनने का अधिकार।
5.निवारण का अधिकार।
6.उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार।
● केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण
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अधिनियम के अनुसार केंद्र सरकार एक केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) गठित करेगी जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देना, सुरक्षित करना और लागू करना होगा।
CCPA के पास एक महानिदेशक के नेतृत्व में एक जांच विंग होगी , जो इस तरह के उल्लंघन की जांच या जांच कर सकती है।
यह प्राधिकरण उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, अन्यायपूर्ण व्यापारिक प्रचलनों तथा भ्रामक विज्ञापनों से सम्बंधित विषयों के लिए नियामक निकाय होगा। इस प्राधिकरण में एक अन्वेषण शाखा भी होगी जिसका प्रमुख एक महानिदेशक होगा जो इन उल्लंघनों के विषय में जाँच अथवा विवेचना कर सकेगा।
असत्य अथवा भ्रामक विज्ञापन के लिए CCPA निर्माता अथवा प्रचारकर्ता को 10 लाख रु. तक का आर्थिक दंड एवं दो वर्षो के कारावास का दंड लगाया जा सकता है। यदि कोई निर्माता अथवा प्रचारकर्ता ऐसा अपराध पुनः करता है तो उस पर 50 लाख रु. तक का आर्थिक दंड एवं पाँच वर्षो के कारावास का दंड लगाया जा सकता है।
● उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग (CDRC)
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अधिनियम में एक उपभोक्ता विवाद समाधान आयोगों (Consumer Disputes Redressal Commission – CDRCs) की अभिकल्पना भी है। ये आयोग राष्ट्रीय, राज्यीय तथा जिले के स्तर पर गठित होंगे। इन आयोगों के समक्ष कोई भी उपभोक्ता इन वस्तुओं के लिए शिकायत दायर कर सकता है –
1.अन्यायपूर्ण अथवा बंधनकारी व्यापारिक प्रचलन
2.दोषयुक्त वस्तु अथवा सेवा
3. अधिक अथवा छुपा हुआ दाम लगाना अर्थात ओवरचार्जिंग या भ्रामक चार्जिंग।
4. जीवन एवं सम्पत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं अथवा सेवाओं के विक्रय का प्रस्ताव।
अधिनियम में विभिन्न CDRCs के लिए अधिकार क्षेत्रों का वर्णन किया गया है। जिला-स्तरीय CDRC उन शिकायतों को देखेगा जिनमें सम्बंधित वस्तु एवं सेवा का मूल्य एक करोड़ रु. के अन्दर है। राज्य-स्तरीय CDRC उन शिकायतों को देखेगा जिनमें वस्तुओं अथवा सेवाओं का मूल्य एक करोड़ रु. से दस करोड़ रु. के बीच होगा। दस करोड़ रु. से अधिक मूल्य वाली वस्तु एवं सेवा की शिकायतें राष्ट्रीय CDRC द्वारा देखी जाएँगी।
● अपील
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अनुचित अनुबंध के खिलाफ शिकायत केवल राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज की जा सकती है।
जिला CDRC की अपील राज्य CDRC द्वारा सुनी जाएगी। राज्य सीडीआरसी की अपीलें राष्ट्रीय सीडीआरसी द्वारा सुनी जाएंगी। अंतिम अपील सुप्रीम कोर्ट के समक्ष होगी।
● सीडीआरसी का अधिकार क्षेत्र
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जिला सीडीआरसी उन शिकायतों का निपटारा करेगा जहां वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
राज्य सीडीआरसी शिकायतों का निस्तारण करेगा जब मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन 10 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
राष्ट्रीय सीडीआरसी द्वारा 10 करोड़ रुपये से अधिक की वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य वाली शिकायतों पर विचार किया जाएगा।
● मध्यस्थता
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यह अधिनियम उपभोक्ता आयोगों द्वारा मध्यस्थता के संदर्भ के लिए प्रदान करता है जहां प्रारंभिक समझौता होने की संभावना है और पक्ष इसके लिए सहमत हैं।
मध्यस्थता प्रकोष्ठों को उपभोक्ता आयोगों से जोड़ा जाना है। उपभोक्ता मध्यस्थता कोशिकाओं में आयोजित होने वाली मध्यस्थता।
अध्यक्ष और उपभोक्ता आयोग के सदस्य वाली चयन समिति द्वारा चयनित मध्यस्थों का पैनल ।
मध्यस्थता के माध्यम से निपटान के खिलाफ कोई अपील नहीं।
● ई-कॉमर्स प्लेटफार्मो पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का प्रभाव
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1.ई-कॉमर्स पोर्टल को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत नियमों के तहत एक मजबूत उपभोक्ता निवारण तंत्र स्थापित करना होगा ।
2.उन्हें उस मूल देश का भी उल्लेख करना होगा जो उपभोक्ता को उसके मंच पर पूर्व खरीद के चरण में सूचित निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाने के लिए आवश्यक है।
3.ई-कॉमर्स प्लेटफार्मो को भी अड़तालीस घंटों के भीतर किसी भी उपभोक्ता शिकायत की प्राप्ति को स्वीकार करना होगा और इस अधिनियम के तहत प्राप्ति की तारीख से एक महीने के भीतर शिकायत का निवारण करना होगा।
● उत्पाद की जिम्मेदारी
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एक निर्माता या उत्पाद सेवा प्रदाता या उत्पाद विक्रेता को दोषपूर्ण उत्पाद या सेवाओं में कमी के कारण हुई क्षति या क्षति की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
● CCPA के कार्य
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1.उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में जाँच एवं विवेचना करना तथा समुचित मंच पर मुकदमा दायर करना।
2.हानिकारक वस्तुओं या सेवाओं को वापस करने और चुकाए गये मूल्य को लौटाने के विषय में आदेश निर्गत करना एवं अधिनियम में परिभाषित अन्यायपूर्ण व्यापरिक प्रथाओं को बंद करना।
3.झूठा अथवा भ्रामक विज्ञापन बंद करने अथवा उसमें सुधार करने के लिए सम्बंधित व्यापारी/निर्माता/प्रचारकर्ता/विज्ञापनकर्ता/प्रकाशक को निर्देश निर्गत करना।
4.दंड लगाना, एवं उपभोक्ताओं को असुरक्षित वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रति सतर्क करने के लिए सूचनाएँ निर्गत करना।
According to prelims examination
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1.राष्ट्रीय बनाम राज्य आयोग बनाम जिला विवाद निवारण फोरम, उनकी रचनाएँ।
2.न्यायालयों और अपीलों का क्षेत्राधिकार, क्षेत्राधिकार।
3.क्या CCPA मुकदमे दायर कर सकता है ?
4.उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग- क्षेत्राधिकार।
5.एक राष्ट्रीय सीडीआरसी से अपील।
6.अधिनियम के तहत परिभाषित उपभोक्ता परिभाषा और अधिकार।
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