Dr purnima Rai

Dr purnima Rai

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Author/ Writer/Teacher/Educationist
शब्द अथाह सागर है और भाव उठती हुई लहरें ! [email protected]

13/06/2026

असीम इच्छाओं के
दबाव में
कुचली जाने लगी
मानवीय संवेदनाएं
"गिद्द"बाज न आये!!
Dr purnima Rai

12/06/2026

बहाव

तुम लिखते हो
या कलम के साथ बहते हो
पानी सा बहाव संग रखते हो!
किसी लौकिक जगत की कल्पना में हो
या किसी दैवीय शक्ति की कल्पना करते हो!
जो तुम हाड़-माँस के पुतले में भी
एक अप्रतिम देवी के दर्शन करते हो!!
अजीब है तुम्हारी दृष्टि और अवलोकन का ढंग
कैसे तुम इतनी गहनता में जाकर
भीतर का मन पढ़ लेते हो
और सामने आए बिना ही तुम
चुपचाप निहारते हो!!
तुम्हारी गलती भी
एक सच्ची सी भूल लगती है!!
तुम्हारे हृदय में भरा हुआ
असीम स्नेह लगती है
फूलों के साथ
शूलों की चुभन भी मीठी लगती है!!
कितनी सादगी से
प्रशंसा कर दी तुमने जिसकी भी
वह इस संसार में लाजवाब लगती है!
पूर्णिमा!वह तुम्हारे सपनों का
एक हसीन ख्वाब लगती है!
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब

09/06/2026

योगा करते दिख रहे ,आज विश्व के लोग।
ध्यान लगा के कर रहे, दूर हृदय के रोग।(1)

आठ अंग कुल योग के ,मार्ग बुद्ध अष्टांग।
आसन,प्राणायाम कर,व्यर्थ न रच मन स्वांग।।(2)

यम,समाधि औ' ध्यान से,साँसें बढ़ जायें चंद।
चित्त वृत्ति भी शुद्ध हो,मिलता परमानंद।।(3)

योग नियम औ' धारणा ,ले आये संतोष।
तप स्व-अध्याय केंद्र में,बढ़े ज्ञान का कोश।।(4)

बिन शिक्षा योगा करें ,लग जायेंगे रोग।
तन-मन पावन है बने, करें समझ से योग।।(5)

आत्मा को मिलती खुशी,सीखें जीवन ढंग।
खिलते चेहरे योग से,देख सभी हों दंग।।(6)

ऋषि पतंजलि के योग की,महिमा अपरंपार।
विषय वासना मुक्त ही,दिखे सकल संसार।।(7)

राजयोग की देन का,गुण गाये इन्सान
मानवता के नूर से,दीपित है भगवान।।(8)

स्वर्ग धरा पर ही मिले,मोह "पूर्णिमा" पाश।
योग साधना में छिपा ,जीवन का सारांश।। (9)
डॉ.पूर्णिमा राय, पंजाब 🙏

09/06/2026

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