Ajit Acharya

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Music literature Motivation

18/06/2026
16/06/2026

हर हर महादेव

#शिव

16/06/2026

व्यासपीठ सम्पूर्ण सृष्टि की सर्वाधिक पूज्य एवं सर्वोच्च आसंदी है। यह केवल एक आसन नहीं, अपितु धर्म, संस्कृति, संस्कार और सत्य के दिव्य प्रकाश का केंद्र है। यहीं से समाज को शुद्ध, सात्विक और उचित मार्गदर्शन प्राप्त होता है। यहीं से जीवन की नैतिकता, सदाचार, कर्तव्य और मानव मूल्यों का ज्ञान जन-जन तक पहुँचता है।
व्यासपीठ से होने वाली धर्मशास्त्रों की यथार्थ एवं समुचित व्याख्या केवल मनुष्य के बाह्य जीवन का ही नहीं, अपितु उसकी आन्तरिक चेतना का भी विकास करती है। यह पीठ व्यक्ति को अज्ञान से ज्ञान, भ्रम से सत्य और स्वार्थ से परमार्थ की ओर ले जाने का माध्यम है।

यह कोई साधारण पीठ नहीं है, जिस पर कोई भी बैठ जाए। यह वह गौरवशाली परम्परा है जिसे सनत्कुमारों, सूतजी महाराज, देवर्षि नारद, व्यासनन्दन श्री शुकदेवजी, महर्षि अगस्त्य, काकभुशुण्डिजी, गोस्वामी तुलसीदासजी तथा असंख्य तपस्वी ऋषि-मुनियों ने अपनी साधना, तप और दिव्य ज्ञान से अलंकृत किया है।

कथावाचन केवल कुछ श्लोकों, चौपाइयों अथवा प्रसंगों को कंठस्थ कर उनकी व्याख्या कर देने का नाम नहीं है। व्यासपीठ पर बैठने का अधिकार उस साधक को शोभा देता है जिसके जीवन में त्याग हो, तपस्या हो, जप और साधना हो; जिसके हृदय में उदारता हो, वाणी में मर्यादा और विशालता हो, तथा जिसका आचरण स्वयं सत्य और धर्म की कसौटी पर खरा उतरता हो।

व्यासपीठ का धर्म केवल कथा कहना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना, भटके हुए जीवन को मार्ग दिखाना, और मानव हृदय में ईश्वर, धर्म तथा सदाचार के प्रति श्रद्धा जागृत करना है।
यही व्यासपीठ की वास्तविक गरिमा और महिमा है।॥ 🙏॥

16/06/2026

"तुलसी भरोसे राम के, निर्भय होके सोय।
अनहोनी होनी नहीं, होनी है सो होय॥"

तुलसीदास जी कहते हैं कि जो व्यक्ति भगवान श्रीराम पर सच्चा भरोसा रखता है, वह निडर होकर जीवन व्यतीत करता है। उसे भविष्य की चिंता, भय और आशंका नहीं सताती।

"अनहोनी होनी नहीं" — जिसका होना निश्चित नहीं है, वह लाख चिंता करने पर भी नहीं होगा।

"होनी है सो होय" — और जो ईश्वर की इच्छा तथा कर्मों के अनुसार होना निश्चित है, उसे कोई रोक भी नहीं सकता।

इसलिए मनुष्य को व्यर्थ की चिंताओं में डूबने के बजाय भगवान पर विश्वास रखते हुए अपना कर्तव्य करना चाहिए।

भावार्थ
चिंता छोड़ो, कर्तव्य करो और भगवान पर विश्वास रखो।
जो नहीं होना है, वह कभी नहीं होगा;
और जो होना है, वह होकर रहेगा !!

क्रमश:

15/06/2026

एक राजा ने अपने मंत्री से पूछा, "सत्संग का प्रभाव इतना बड़ा बताया जाता है, क्या केवल कुछ समय अच्छे लोगों के साथ बैठने से जीवन बदल सकता है?"
मंत्री ने कहा, "महाराज, इसका उत्तर कल दूँगा।"

अगले दिन मंत्री दो सफेद कपड़े लेकर आया। एक कपड़ा उसने इत्र की दुकान में कुछ घंटों के लिए रखवा दिया और दूसरा मछली बेचने वाले बाजार में।
शाम को दोनों कपड़े राजा के सामने रखे गए।
राजा ने पहला कपड़ा उठाया तो उसमें से सुगंध आ रही थी। दूसरा उठाया तो उसमें से दुर्गंध।
राजा ने कहा, "यह तो स्वाभाविक है।"
मंत्री मुस्कुराया और बोला, "महाराज, दोनों कपड़े न बोलते थे, न चलते थे, न कुछ करते थे। केवल कुछ समय संगति में रहे और उनका स्वभाव बदल गया।"
फिर मंत्री ने कहा—
"जब निर्जीव कपड़ा अपनी संगति का प्रभाव ग्रहण कर लेता है, तो चेतन मनुष्य कैसे बच सकता है? जिस वातावरण में वह बैठता है, जिन लोगों की बातें सुनता है, जिन विचारों के बीच रहता है, धीरे-धीरे वैसा ही बन जाता है।"
राजा को उत्तर मिल चुका था।

सत्संग का अर्थ केवल संत के पास बैठना नहीं है।
जिन लोगों के साथ रहने से आपके विचार ऊँचे हों, मन शांत हो, ईश्वर की याद बढ़े और जीवन में सद्गुण आएँ — वही सत्संग है।

14/06/2026

14/06/2026

"कथा तुम्हारे नैतिक मूल्यों की रक्षा करती है,
कथा तुम्हें मन्दिरों से, मूर्तियों से जोड़कर चेतन से चैतन्य बनाती है !!

कथा सुनते-सुनते मनुष्य केवल श्रोता नहीं रहता, साधक बन जाता है।
उसकी दृष्टि बदल जाती है, विचार बदल जाते हैं, जीवन का आधार बदल जाता है।
जो भगवान पहले केवल पत्थर की मूर्ति में दिखाई देते थे, वही फिर समस्त प्राणियों में दिखाई देने लगते हैं।
हृदय में करुणा जागती है, वाणी में मधुरता आती है और आचरण में धर्म उतर आता है।
यही कथा का चमत्कार है—वह मनुष्य को संसार में रहते हुए भी ईश्वर के निकट पहुँचा देती है !!

क्योंकि कथा का लक्ष्य केवल कानों तक पहुँचना नहीं अपितु हृदय को जगाना है !!

॥ हरिः ॐ ॥

12/06/2026

#शिव

06/06/2026

30/05/2026

Raja Shibi ki katha

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