Anmol
food blogger
23/05/2026
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23/05/2026
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23/05/2026
लोग तालियाँ बजाते हैं, जब कोई सेलिब्रिटी ऐसा करती है लेकिन
कोई इस महिला के बारे में बात नहीं करता, जिसने अपने भूखे
बच्चों को खिलाने के लिए सिर्फ ₹150 में अपने बाल बेच दिए
Tribal Man Terrorizes the City but Gets Brutally Beaten and Runs Back to the Jungle
22/05/2026
पुरानी गाड़ी का असली मजा
चलाने में नहीं…
स्टार्ट कराने में आता है। 🤣🛵
22/05/2026
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22/05/2026
"मैं फंस गई हूं, अभी ज्यादा बात नहीं कर सकती..." 😨
“मैं फंस गई हूं, यार. बस तू मत फंसना. ज्यादा बात नहीं कर सकती. सही समय आने पर कॉल करूंगी...” भोपाल में अपनी ससुराल में मारी गई ट्विशा शर्मा ने इंस्टाग्राम पर अपनी दोस्त मीनाक्षी को यही आखिरी संदेश लिखा था. इस मैसेज पर उसकी दोस्त मीनाक्षी ने जवाब दिया था- “मुझे तुम्हारी चिंता है, तुकटुक. मैं तुमसे प्यार करती हूं.बहुत प्यार करती हूं. मैं तुम्हारे साथ हूं.”
हालांकि, ट्विशा शर्मा का अपनी दोस्त मीनाक्षी को कॉल कभी नहीं आया. अगले दिन, दो महीने की गर्भवती 31 वर्षीय ट्विशा भोपाल स्थित अपने घर में फांसी पर लटकी हुई मिली. यह उनका अपनी दोस्त को भेजा गया आखिरी संदेश था, जिसमें उसने मीनाक्षी से शादी न करने की गुजारिश की थी. नोएडा की रहने वाली और भोपाल के वकीलों और एक सेवानिवृत्त जज के परिवार में शादी करने वाली ट्विशा 12 मई को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गई थी.
रविवार को ट्विशा के परिवार ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और दिल्ली के एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की. उन्होंने अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया और कहा कि वे ऐसा तभी करेंगे जब उन्हें ट्विशा की मौत के पीछे का सच पता चल जाएगा. परिवार ने ट्विशा के पति और ससुराल वालों पर लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक शोषण का आरोप लगाया है और कहा है कि वे जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं. परिवार ने यह भी मांग की है कि पोस्टमार्टम के लिए ट्विशा के शव को उचित तरीके से संरक्षित किया जाए और कहा कि उन्हें मौजूदा जांच पर विश्वास नहीं है.
इंडिया टुडे के मुताबिक ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी क्योंकि वे एक प्रतिनिधिमंडल के साथ व्यस्त थे, लेकिन उन्होंने उनके ओएसडी से बात की. उन्होंने दावा किया कि ओएसडी ने पुलिस जांच में कमियों को स्वीकार किया है. नवनीधि शर्मा ने यह भी कहा कि परिवार ने ट्विशा के शव को -4 डिग्री सेल्सियस पर संरक्षित करने का अनुरोध किया है, 4-5 डिग्री सेल्सियस पर रखने से शव सड़ सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह आरोपियों के इशारे पर किया जा रहा है और कहा कि परिवार तापमान कम करने के निर्देश के लिए फिर से अदालत का रुख करेगा.
22/05/2026
नौ बार गया था -वो पिता।
आठ बार समझाने। नौवीं बार उसका शरीर लाने।
30,000 की पायल। चार दिन पहले ही खरीदी थी। सास के लिए।
17 मई।
रात के 12 बजकर 27 मिनट।
पड़ोसी ने सुना एक धमाके की आवाज।
सोचा ट्रांसफॉर्मर फटा होगा।
ट्रांसफॉर्मर नहीं फटा था।
दीपिका नागर गिरी थी।
24 साल।
बीएड पास।
तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी।
दिसंबर 2024 में दुल्हन बनी।
उस रात से पहले
एक जिंदगी थी।
उसके पिता ने उसे पढ़ाया।
रोका नहीं।
कहा 'पढ़, जितना पढ़ना है।'
फिर उधार लिया।
10 लाख नकद दिए।
गाड़ी दी।
सोने के जेवर दिए।
शादी पर करीब एक करोड़ खर्च किया।
और फिर भी
फॉर्च्यूनर मांगी गई।
51 लाख और मांगे गए।
हर त्योहार पर कुछ और मांगा गया।
हर बार दीपिका के घर आने पर
उसके हाथ में कुछ न कुछ होना जरूरी था।
और जब नहीं था
तो वो घर नर्क बन जाता था।
17 मई की दोपहर को
दीपिका ने पिता को फोन किया।
रो रही थी।
कांप रही थी।
कह रही थी
मुझे मारा जा रहा है।
संजय नागर दौड़े।
रिश्तेदारों को लेकर गए।
समझाया।
शांत कराया।
घर लौट आए।
आधे घंटे बाद
फोन आया।
'दीपिका गिर गई।
शारदा हॉस्पिटल ले जा रहे हैं।'
20 किलोमीटर दूर का अस्पताल।
पास के अस्पताल छोड़कर।
जब संजय नागर पहुंचे
बेटी नहीं थी।
पोस्टमार्टम में निकला —
ब्रेम में खून का थक्का।
स्पलीन फटी हुई।
लीवर और किडनी फटे हुए।
नाक और मुंह से खून।
चेहरे पर नील।
कोहनियों पर, जांघ पर, सीने पर चोटें।
और डॉक्टर्स ने एक बात और कही
कुछ चोटें मृत्यु से पहले की थीं।
यानी
गिरने से पहले भी
कुछ हो रहा था।
वो क्या था
यह सोचकर
सांस रुक जाती है।
अमृता प्रीतम ने लिखा था
'कहानी लिखने वाला बड़ा नहीं होता।
बड़ा वह है
जिसने कहानी अपने जिस्म पर झेली है।'
दीपिका ने कोई कहानी नहीं लिखी।
उसने झेली।
चुपचाप।
अकेले।
हर उस रात
जब घर में अंधेरा था
और बाहर कोई नहीं था।
मेरी भी एक बेटी है ज्ञानवी
वह कभी-कभी मुझसे पूछती है
'पापा, दुल्हन क्यों बनते हैं?'
मैं उसे क्या जवाब दूं?
कि बेटी
दुल्हन बनना
दुनिया की सबसे खूबसूरत बात है।
लेकिन
कुछ घरों में
दुल्हन एक इंसान नहीं
एक सौदा होती है।
जहां उसकी हंसी नहीं
उसका हिसाब रखा जाता है।
यह जवाब मैं उसे नहीं दे सकता।
क्योंकि वो अभी सात साल की है।
क्योंकि अभी उसे
सिर्फ यह पता होना चाहिए
कि दुनिया अच्छी है।
पर मुझे पता है
यह दुनिया अभी उतनी अच्छी नहीं है।
एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट
6 मई 2026 को जारी हुई।
2024 में भारत में 5,737 दहेज मौतें।
यानी
हर दिन 16 दीपिकाएं।
और इनमें से कितनों को इंसाफ मिला?
कंविक्शन रेट-
सिर्फ 11 से 17 प्रतिशत।
यानी
हर 100 में से
83 से 89 आरोपी
छूट जाते हैं।
मरना आसान है इस देश में।
इंसाफ़ पाना बहुत मुश्किल।
ट्विशा शर्मा।
दीपिका नागर।
दोनों पढ़ी-लिखी।
दोनों नई दुल्हन।
दोनों ने मदद मांगी।
दोनों को किसी न किसी ने
'सब्र रखो' कहा।
और दोनों
चली गईं।
संजय नागर आज कहते हैं
'मैंने उसे सब्र रखने को कहा।
मैं बहुत गलत था।'
यह एक बाप का बयान नहीं है।
यह एक बाप का टूटना है।
वो टूटना
जो कभी जुड़ता नहीं।
आपके घर में
कोई एक लड़की जरूर है।
जो त्योहार पर आती है
और पहले से थोड़ी और चुप होती जा रही है।
जो 'सब ठीक है' कहती है
पर आंखें कुछ और कहती हैं।
जो हंसती है पर हंसी में वो रंग नहीं होता
जो पहले था।
उससे आज
बस इतना पूछो
'सच में कैसी हो?'
और जब वो जवाब दे
तो सुनो।
सिर्फ सुनो।
सिर्फ 'सब्र रखो' 'शुरुआती दिन हैं' कह कर छोड़ न दो।
बस सुनो।
शायद वो बस यही चाहती हो
कि कोई एक बार
सच में सुने।
रितिक गिरफ्तार है।
मनोज गिरफ्तार है।
पूनम गिरफ्तार है।
बाकी पांच आरोपी
अभी भी फरार हैं।
जांच जारी है।
पर
दीपिका नहीं है।
#दहेजप्रथा #बेटीबचाओ #मानसिकस्वास्थ्य
21/05/2026
दोस्तों बताओ इस डिश का नाम क्या है 🫶
20/05/2026
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