RPSC Exam Gk
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'CET (स्नातक) परीक्षा'
सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं।
नेगेटिव मार्किंग नहीं है, इसलिए सभी प्रश्न करें।
औरंगज़ेब ने शाहजहाँ का दिल तोड़ा
औरंगज़ेब ने इसके बाद आगरा के किले में क़ैद अपने पिता शाहजहाँ को एक तोहफ़ा भिजवाया.
इटालियन इतिहासकार निकोलाओ मनूची ने अपनी किताब स्टोरिया दो मोगोर में लिखा, "आलमगीर ने अपने लिए काम करने वाले एतबार ख़ाँ को शाहजहाँ को पत्र भेजने की ज़िम्मेदारी दी. उस पत्र के लिफ़ाफ़े पर लिखा हुआ था कि औरंगज़ेब, आपका बेटा, आपकी ख़िदमत में इस तश्तरी को भेज रहा है, जिसे देख कर उसे आप कभी नहीं भूल पाएंगे. उस पत्र को पा कर तब तक बूढ़े हो चले शाहजहाँ बोले, भला हो ख़ुदा का कि मेरा बेटा भी तक मुझे याद करता है. उसी वक्त उनके सामने एक ढ़की हुई तश्तरी पेश की गई. जब शाहजहाँ ने उसका ढक्कन हटाया तो उनकी चीख़ निकल गई, क्योंकि तश्तरी में उनके सबसे बड़े बेटे दारा का कटा हुआ सिर रखा हुआ था."
क्रूरता की इंतहा
मनूची आगे लिखते हैं, "ये दृश्य देख कर वहाँ मौजूद औरतें ज़ोर ज़ोर से विलाप करने लगीं. उन्होंने अपने सीने पीटने शुरू कर दिए और अपने ज़ेवर उतार कर फेंक दिए. शाहजहाँ को इतना ज़बर्दस्त दौरा पड़ा कि उन्हें वहाँ से दूसरी जगह ले जाना पड़ा. दारा का बाकी का धड़ तो हुमायूँ के मकबरे में दफ़नाया गया लेकिन औरंगज़ेब के हुक्म पर दारा के सिर को ताज महल के प्राँगड़ में गाड़ा गया. उनका मानना था कि जब भी शाहजहाँ की नज़र अपनी बेगम के मक़बरे पर जाएंगी, उन्हें ख़्याल आएगा कि उनके सबसे बड़े बेटे का सिर भी वहाँ सड़ रहा है.
★📝📚 सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल ★📝📚
• मोहनजोदड़ो – लरकाना जिला, सिंध प्रांत( पाकिस्तान)
• चन्हुदडो – सिंध प्रांत (पाकिस्तान)
• बनावली – हिसार( हरियाणा)
• कालीबंगा – हनुमानगढ़( राजस्थान)
• लोथल – अहमदाबाद ( गुजरात)
• धौलावीरा–कच्छ(गुजरात)
• सुरकोटड़ा – कच्छ ( गुजरात)
• सुत्कांगडोर – बलूचिस्तान (पाकिस्तान)
• रंगपुर – काठियावाड़ ( गुजरात)
• रोपड़–पंजाब(भारत)
• बुर्जहोम – कश्मीर
• राखीगढ़ी – हिसार (हरियाणा)
17/09/2024
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*🔺Note :* ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर 2024,
17/09/2024
17/09/2024
राजपूत समाज की बेटी प्रिया ने बनाया भारत का मान
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बहन को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं 🙏
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-बाबर को बाग लगवाने का बड़ा शौक था।
उसने फारसी प्रेरणा से बागे बहिश्त का रिवाज भारत में शुरू किया।
🔹 भारत में पहला मुगल बाग बाबर ने आगरा में लगवाया जिसे रामबाग (आराम बाग या बागे-गुल अफशां, जिसकी आगे चलकर नूरजहां ने मरम्मत करवाई और इसलिए उसे 'बाग-ए-नुरअफशां नाम दिया गया) कहा जाता है। बाबर के शव का प्रारम्भिक दफन स्थल यही बाग था।
🔹- आगरा में ही बाबर द्वारा निर्मित एक अन्य बाग है 'बाग-हस्त बिहिश्त' जो यमुना के बाएं तट पर स्थित है।
- बाबर द्वारा चारबाग की तर्ज पर जो एकदम शुरुआती बाग लगवाए गये उनमें से एक था 'बागे-फतह' जो फतेहपुर सीकरी में झील और पहाड़ियों (रिज) के बीच स्थित है। इसका निर्माण 1527 में खानवा के युद्ध में विजय की स्मृति में किया गया था। बाग के इसी नाम से अकबर को आगे चलकर नगर का नाम फतेहपुर सीकरी रखने की प्रेरणा प्राप्त हुई।
🔸- बाबर का एक और भी लम्बा चौड़ा चारबाग, यानि 'बागे-नीलोफर' / लोटसगार्डन (कमल-उद्यान) आज भी धौलपुर (राजस्थान) में स्थित है।.......
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🔸🔸 अशोक के अभिलेखों में कुल 4 लिपियों का प्रयोग हुआ है- ब्राह्मी, खरोष्ठी, अरामाइक तथा ग्रीक (यूनानी) ।
खरोष्ठी, अरामाइक तथा ग्रीक लिपि का प्रयोग कुछ वृहत् (दीर्घ) शिलालेखों तथा कुछ लघु शिलालेखों पर मिलता है
जबकि अधिकांश शिलालेखों, सभी स्तम्भ लेखों तथा सभी गुहालेखों में ब्राह्मी लिपि का ही प्रयोग हुआ है।
अशोक के अभिलेखों की भाषा 'प्राकृत' (अर्द्ध मागधी या जानपदीय) थी। क्योंकि यह तात्कालीन आमजन की भाषा थी।
🔸खरोष्ठी लिपि का प्रयोग :- मानसेहरा तथा शाहबाजगढ़ी से प्राप्त वृहत् (दीर्घ) शिलालेखों में हुआ है।
🔸अरामाइक लिपि का प्रयोग :- लघमान (लम्पक-पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित) से प्राप्त 2 लघु शिलालेख तथा तक्षशिला (पाकिस्तान-रावलपिण्डी के निकट) से प्राप्त 1 लघु शिलालेख में हुआ है।
🔸द्विभाषिक लिपि का प्रयोग :- 'शर-ए-कुना' (कंधार से प्राप्त) लघु शिलालेख में 'ग्रीक' (यूनानी) तथा 'अरामाइक लिपियों' का एक साथ प्रयोग हुआ है।
इसका प्रकाशन सर्वप्रथम 'ईस्ट एण्ड वेस्ट' नामक पत्रिका में 1958 ई. में उमबर्टो सिरैटो ने किया। कांधार तथा लघमान के निकट 'पुल-ए-दुरूत' 'प्राकृत- अरामाइक' द्विभाषिक अभिलेख भी मिले हैं। एरंगुडी (कुसुल-आन्ध्रप्रदेश) एकमात्र अभिलेख हैं,
जिसमें खरोष्ठी तथा ब्राह्मी दोनों लिपियों का प्रयोग एक साथ मिलता हैं। खरोष्ठी लिपि का उद्गम आरामाइक लिपि (ईरान) से हुआ है।
ब्राह्मी लिपि बायें से दायें जबकि खरोष्ठी लिपि दायें से बायें (उर्दू की तरह) लिखी जाती है। मास्की, उद्देगोलम, निठुर तथा गुर्जरा से प्राप्त प्रथम लघु अभिलेखों में 'अशोक' का व्यक्तिगत नाम मिलता है। अशोक के अभिलेख 457 स्थानों पर पाये गये हैं तथा कुल अभिलेखों की संख्या 150 है।
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16/09/2024
1st grade teacher vacancy jald hi
ये वकील हमेशा काले रंग का कोट ही क्यों पहनते है ..?
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