Kattar Hindu Unity
Being Aware Of Hindu Religion ऋषियों के खून से जन्मा मुनियों के तप से रक्षित हूं मैं
योग की शक्ति हूं हां मै हिंदू हूं।
साधारणतः आजकल सनातनधर्मावलम्बी कहलानेवाले तो बड़ी संख्या में पाये जाते हैं परन्तु वस्तुतः धर्ममें श्रद्धा और विश्वास रखने वाले बहुत कम हैं तथा शास्रोक्त पथ का अनुसरण करनेवाले तो बिरले ही हैं। अनेक लोग तो धर्ममें प्रेम रखना दूर रहा उसको उपहास और घृणा की दृष्टिसे देखते हैं और पुराने चालके भाइयोंको पोंगापंथी, कूड़ापंथी, लकीरके फकीर, इत्यादि आख्यान देकर अनाचार तथा कदा-चार एवं दुराचारको प्रोत्साहन देने में गर्व अनुभव करते हैं। यह देशके भविष्यके लिये बड़े ही खेद का विषय है। "स्व' स्वं चरित्रां शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्वमानवाः" ऐसा कहकर मनु महाराज ने संसारके सारे देशों को ललकार कर कहा था कि भारतके आदर्श को देखते हुए सब कोई अपना चरित्र निर्माण करे, और आज उसी देशका ऐसा अधःपतन कि धर्म की उपेक्षा फैशन समझा जाने लगे ! 'किमाश्चर्यमतः परम्' ? हाँ, यह मैं माननेके लिये प्रस्तुत हूं कि परिस्थितिके परिवर्त्तनसे कहीं-कहीं हमारी रहन-सहन और चालचलनके परिवर्त्तन की आवश्यकता है। पर, इसका तात्पर्य यह नहीं कि इस पुण्यभूमिके समस्त प्राचीन रत्नोंको मूल्यहीन समझकर ठुकरा दिया जावे और समुद्रपारके चमकीले और भड़कीले काचोंको अपनाया जावे ।
—पंडित दिपक शर्माSहम्
20/04/2025
भगवद् गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां उन 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रहों में शामिल हैं, जिन्हें 17 अप्रैल तक यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में जोड़ा गया है, जिससे कुल उत्कीर्ण संग्रहों की संख्या 570 हो गई है।
28/03/2025
🌱 हिन्दुनव वर्ष कि हार्दिक शुभकामनायें🌱 नवरात्रि प्रारम्भ होने वाली है प्रसादी भण्डारे व ब्याह का सीजन शुरू हो गया हैं, भोजन हेतु हमारे द्वारा अधिकांश प्लास्टिक पत्तल आदि (डिस्पोजल)के जहर से बचाने के लिए, देशी पत्तल व मिट्टी के कुल्हड़ का उपयोग फिर आरंभ कर सकते है जो बिल्कुल प्रकृति के अनुरूप होगा...
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में 2000 से अधिक वनस्पतियों की पत्तियों से तैयार किये जाने वाले, पत्तलों औरbha उनसे होने वाले लाभों के विषय में पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान उपलब्ध है, पर मुश्किल से पाँच प्रकार की वनस्पतियों का प्रयोग हम अपनी दिनचर्या में करते हैं।
आमतौर पर केले की पत्तियो में खाना परोसा जाता है...प्राचीन ग्रंथों में केले की पत्तियों पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है....आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियों का यह प्रयोग होने लगा है.....
1. पलाश के पत्तल में भोजन करने से, स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है...।
2. केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है..।
3. रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है...पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी, इसका उपयोग होता है। आमतौर पर लाल फूलों वाले पलाश को हम जानते हैं, पर सफेद फूलों वाला पलाश भी उपलब्ध है.... इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासीर (पाइल्स) के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है...।
4. जोडों के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल उपयोगी माना जाता है, पुरानी पत्तियों को नयी पत्तियों की तुलना मे अधिक उपयोगी माना जाता है।
5. लकवा (पैरालिसिस) होने पर, अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलों को उपयोगी माना जाता है।
अन्य लाभ
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है।
2. न पानी नष्ट होगा।
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा।
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे।
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी।
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक ऑक्सीजन भी मिलेगी।
7. प्रदूषण भी घटेगा।
8. सबसे महत्वपूर्ण : झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है एवं मिटटी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है।
9. पत्तल बनाने वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा।
10. सबसे मुख्य लाभ-नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा और अन्ततः जल प्रदूषण बढ़ाएगा!
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