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09/02/2024

*जिनको नहीं पता उनके लिए*

जवाहरलाल नेहरू की अदूरदर्शी और मूर्खताओं की सज़ा, जो हम आज तक भुगत रहे हैं।

१. कोको आइसलैंड: 1950 में नेहरू ने भारत का 'कोको द्वीप समूह' (Google Map location 14.100000, 93.365000) बर्मा को गिफ्ट दे दिया। यह द्वीप समूह कोलकाता से 900 KM दूर समंदर में है। बाद में बर्मा ने यह द्वीप समूह चीन को दे दिया, जहाँ से आज चीन भारत पर नजर रखता है।

२. काबू वैली मणिपुर: नेहरू ने 13 जनवरी 1954 को भारत के मणिपुर प्रांत की काबू वैली मित्रता के तौर पर बर्मा को दी। काबू वैली का क्षेत्रफल लगभह 11,000 वर्ग किमी है और कहते हैं कि यह कश्मीर से भी अधिक खूबसरत है।

आज बर्मा ने काबू वैली का कुछ हिस्सा चीन को दे रखा है। चीन यहां से भी भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देता है।

३. भारत नेपाल विलय: 1952 में नेपाल के तत्कालीन राजा त्रिभुवन विक्रम शाह ने नेपाल के भारत में विलय का प्रस्ताव नेहरू के सामने रखा।

लेकिन नेहरू ने ये कहकर उनकी बात टाल दी कि इस विलय से दोनों देशों को फायदे की बजाय नुकसान ज्यादा होगा। यही नहीं, इससे नेपाल का पर्यटन भी खत्म हो जाएगा।

जबकि असल वजह ये थी की नेपाल जम्मू कश्मीर की तरह विशेष अधिकार के तहत अपनी हिन्दू राष्ट्र की पहचान को बनाये रखना चहता था जो की नेहरू को मंजूर नही थी

४. सुरक्षा परिषद स्थायी सीट: नेहरू ने 1953 में अमेरिका की उस पेशकश को ठुकरा दिया था, जिसमें भारत को सुरक्षा परिषद (United Nations) में स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल होने को कहा गया था। नेहरू ने इसकी जगह चीन को सुरक्षा परिषद में शामिल करने की सलाह दे डाली। चीन आज पाकिस्तान का हम दर्द बना हुआ है। वह पाक को बचाने के लिए भारत के कई प्रस्तावों को सुरक्षा परिषद में नामंजूर कर चुका है।

हाल ही उसने आतंकी मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के भारतीत प्रस्ताव को कई बार वीटो किया है।

५. जवाहरलाल नेहरू और लेडी मांउटबेटन: लेडी माउंटबेटन की बेटी पामेला ने अपनी किताब में लिखा है कि नेहरू और लेडी माउन्टबेटन के बीच अंतरंग संबंध थे। लॉर्ड माउंटबेटन भी दोनों को अकेला छोड़ देते थे। लोग मानते हैं कि ऐसा कर लॉर्ड माउंटबेटन ने जवाहरलाल नेहरू से अनेक राजनैतिक निर्णय करवाए थे जिनमें कश्मीर में युद्ध विराम व सयुंक्त राष्ट्र के हस्ताक्षेप का निर्णय भी शामिल है।

६. पंचशील समझौता: नेहरू चीन से दोस्ती के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक थे। 1954 में उन्होंने चीन के साथ पंचशील समझौता किया और तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में मान्यता दे दी। 1962 में इसी चीन ने भारत पर हमला किया और चीन की सेना इसी तिब्बत से भारत की सीमा में दाखिल हुई।लेख के लिए 8527524513 को सेवकर मिस्डकॉल करें

८. 1962 भारत चीन युद्ध: चीनी सेना ने 1962 में भारत को हराया था। हार के कारणों को जानने के लिए भारत सरकार ने ले. जनरल हेंडरसन और कमान्डेंट ब्रिगेडियर भगत के नेतृत्व में एक समिति बनाई थी।

दोनों अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में हार के लिए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया था।

रिपोर्ट के अनुसार चीनी सेना जब अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम तक अंदर घुस आई थी, तब भी नेहरू ने हिंदी चीनी भाई भाई का नारा लगाते हुए भारतीय सेना को चीन के खिलाफ एक्शन लेने से रोके रखा। परिणाम स्वरूप हमारे कश्मीर का लगभग 14000 वर्ग किमी भाग पर चीन ने कब्जा कर लिया।

इसमें कैलाश पर्वत, मानसरोवर और अन्य तीर्थ स्थान आते हैं।

भारत का सही इतिहास जानना आपका हक़ है।

03/01/2024

कांग्रेस की दिली इच्छा थी कि कतर में हमारे 8 पूर्व सैनिक मर जाये। लेकिन कतर ने मोदी प्रभाव में वह सजा स्थगित कर दी और अब तक कांग्रेस के किसी भी नेता ने प्रसन्नता जाहिर नही की है।

एक साल पहले हमारे 8 रिटायर्ड जवानो को कतर पुलिस ने कतर में ही गिरफ्तार किया था। उन्हें जासूसी के मामले में मौत की सजा सुनाई गई, इस पर प्रियंका गांधी, राहुल गांधी जैसे लोगो ने मोदीजी की विदेश नीति पर चुटकी ली थी। इन्हें सैनिकों के लिये दुख नही था अपितु खुशी थी कि अब मोदी को टारगेट करेंगे।

लेकिन इस साल जैसे ही मोदीजी कतर के अमीर से मिले उन्होंने सजा स्थगित करवा दी। अब इन 8 जवानों को भारत लाया जाएगा और यहाँ की जेल में रखकर भारतीय कानून अनुसार कार्रवाई होगी। जेल में रखना पड़ेगा क्योकि यही वो संधि है जो भारत कतर ने आपस मे हस्ताक्षरित की हुई है।

लेकिन जैसे ही इनकी सजा रुकी कांग्रेस ने चुप्पी साध ली, अरे भाई मोदीजी को श्रेय मत दो लेकिन प्रसन्नता तो अभिव्यक्त कर सकते हो। मगर आप देखना जैसे ही इन्हें भारत लाकर भारत की जेल में डाला जाएगा तब ये आपको मिस गाइड करने आ जाएंगे।

ये उस समय बोलेंगे की मोदीजी ने पूर्व सैनिकों को जेल में डाल दिया। जबकि हम सब जानते है कि कतर के साथ हमारी प्रत्यर्पण संधि की शर्त ही यही है।

इतना दुष्ट विपक्ष हमारे पास है, गिद्ध भी सिर्फ मरी हुई लाशें खाता है किसी के मरने की प्रार्थना नही करता। जब ये कांग्रेसी सत्ता में थे तो पाकिस्तानी सैनिक भारत मे घुसकर हेमराज का सिर काटकर ले गए थे। एक समय आज है की हमारे पूर्व सैनिकों को कोई विदेशी धरती पर भी नही मार पा रहा है।

बाकी मोदीजी धन्य है, हमने हमेशा भारत को दूसरे देशों के आगे समर्पण करते देखा है लोहा मनवाते पहली बार देख रहे है।

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