RJ VLOGS
RJ VLOGS
#बात_बिहार_की
09/09/2024
पहले हर घर में ये अगीठी और मिट्टी की दुधहांडी देखने को मिल जाता था। जिसमे सारा दिन दूध गर्म होता रहता था। जिसमे ये बर्तन रखा है यानि आग जलती है उसे अगेठा कहते है, जिस बर्तन में दूध गर्म होता है उस मिट्टी के बर्तन को दूधहड़ी कहते है।
कुछ लोग अंगीठी कहते हैं परन्तु ये अगीठी नहीं अगेठा है । हमारी तरफ ये अगेठा ही कहा जाता है ।
जिसमे कोयला का प्रयोग होता है गैस चूल्हा के आने से पहले जिस पर भोजन बनता था उसे अगीठी कहते थे। इस अगीठी और अगेठा की एक और बहन होती है जिसमे हमेशा आग दबाई रहती थी उसे बोरसी कहते है। अक्सर प्रसूती कक्ष के बाहर बोरसी में आग जलाकर रखते है प्रसूति कक्ष में जच्चा बच्चा के पास जाने वाला शख्स उस आग पर पहले पैर सेकता था उसके बाद अंदर जाता था।
अब लोगों ने पशु पालना कम कर दिया है। अब तो एकाध लीटर दूध खरीद लिया जाता है जिसे गैस चूल्हे पर बस उबालकर ऱख लिया जाता है।
जब इस अगेठे में सारा दिन दूध औटता था तो उस दूध का रंग ऐसे हो जाता था जैसे आपके मावे का रंग होता है। ये दूध और इस दूध में पड़ी मलाई का जो स्वाद होता था उसका मुकाबला कोई कर ही नहीं सकता है।
सारा दिन दूध औटने के बाद रात में सोने से पहले दही जमाई जाती थी। सर्दियों में इसी अगेठे में दही जमाया जाता था ताकि गरमाहट पाकर दही अच्छी जमे। दही जमा कर ऊपर से ढक्क्न लगा दिया जाता था ये ढक्कन भी अगेठे की तरह ही चिकनी मिट्टी का बना होता। उस ढक्कन को पिहाना कहते थे।इस दूध में यदि पानी न मिलाया गया हो और दिन भर औटा कर दही बनाई जाय तो इतनी बढ़िया दही बनती थी कि कलछी से निकाल थाली में कलछी रखने पर कलछी का आकार बना रहता था। इतनी गाढ़ी होती थी।
पहले के समय में कहते थे - हमरे यहां ऐसी दही बनती है की अगोछे (गमछा ) में बांध कर साथ लिए जाव!
दही जमाने के बाद दूधहड़ी में लगकर सूखा दूध सुतुही (सीप )से करोय (खुर्च )लिया जाता था। इसे करोनी या खुरचुनी कहते थे इसका स्वाद भी बेमिसाल होता था।
इस तरह से गर्म होकर लाल रंग का दूध, दही या मट्ठा सब बेहद स्वादिष्ट होता था।
हमारे यहां सुबह का सारा दूध यू ही दिन भर गर्म करके दही बनाया जाता था और रात के दूध को सिर्फ एक उबाल देकर उसे खाया, पिया जाता था बचने पर यही सुबह चाय के लिये प्रयोग होता था।
आप सबको यदि सबको तस्वीर देखकर, पोस्ट पढ़कर कुछ याद आया हो तो कॉमेट करके अवश्य बताये।
पोस्ट पसंद आयी हो तो लाइक, शेयर अवश्य करें।
04/09/2024
बिहारी भोजन, खास तौर पर देहाती भोजन, 'लुप्तप्राय प्रजाति' की श्रेणी में आता दिख रहा है। दाल-चावल सबसे आसान और पौष्टिक रेसिपी मानी जाती है। सिंपल दाल-चावल बनाकर अगर इसके साथ बिहार स्टाइल में बनी सरसों के स्वाद वाली चटनी जिसमें रतालू (हिंदी: सूरन/जिमीकंद या ओल की.चटनी ,करोंदे का अचार ,आमड़ा अचार - बना ले तो इसका स्वाद बढ़ जाएगा।
28/08/2024
#स्वर्ण_मंदिर_अमृतसर का हृदय माना जाता है। यह #सिख_धर्म का सबसे पवित्र नगर है स्वर्ण मंदिर आध्यात्मिक रूप से सिख धर्म का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। यह 1883 और 1920 के दशक के बीच सिंह सभा आंदोलन और 1947 और 1966 के बीच पंजाबी सूबा आंदोलन का केंद्र बन गया। 1980 के दशक की शुरुआत में, गुरुद्वारा भारत सरकार और जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व वाले कट्टरपंथी आंदोलन के बीच संघर्ष का केंद्र बन गया। गुरुद्वारे की इमारत में कई बार नई-नई चीज़ें जोड़ी गईं, जिसमें फ़र्श पर संगमरमर लगाया जाना शामिल है. भारत के सिख साम्राज्य (1799-1849) के संस्थापक, महाराजा रणजीत सिंह ने गुरुद्वारे का ऊपरी फ़्लोर 750 किलो शुद्ध सोने से मढ़वाया था.
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the public figure
Website
Address
Buxar
802101