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26/05/2026
अखिल विश्व गायत्री परिवार
25/05/2026
अखिल विश्व गायत्री परिवार (Akhil Vishva Gayatri Pariwar - AWGP) एक विशाल वैश्विक आध्यात्मिक और सामाजिक संगठन है। यह केवल एक धार्मिक संस्था नहीं है, बल्कि मानव जीवन को उत्कृष्ट बनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक व्यापक आंदोलन है, जिसे 'विचार क्रांति अभियान' कहा जाता है।
यहाँ गायत्री परिवार का एक विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. स्थापना और संस्थापक
संस्थापक: गायत्री परिवार की स्थापना युगऋषि परम पूज्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी (1911-1990) और उनकी सहधर्मिणी वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी ने की थी।
आचार्य जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के उत्थान और 'युग निर्माण' के लिए समर्पित कर दिया।
2. मुख्यालय (Headquarters)
इसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय 'शांतिकुंज' (Shantikunj), हरिद्वार (उत्तराखंड) में स्थित है। यह एक विशाल आश्रम है, जो आध्यात्मिक जागृति, नैतिक शिक्षा और सामाजिक प्रशिक्षण का केंद्र है।
इसके अलावा मथुरा में 'तपोभूमि' और 'ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान' (वैज्ञानिक आध्यात्मवाद पर शोध केंद्र) भी इसके प्रमुख केंद्र हैं।
3. मुख्य दर्शन और नारे (Core Philosophy)
गायत्री परिवार का पूरा दर्शन इन दो वाक्यों पर टिका है:
"मनुष्य में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण" (Awakening divinity in human beings and descent of heaven on earth)।
"हम बदलेंगे - युग बदलेगा, हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा।"
4. प्रमुख उद्देश्य (युग निर्माण योजना)
गायत्री परिवार मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम करता है:
व्यक्ति निर्माण (Individual Development): ध्यान, गायत्री मंत्र के जप, स्वाध्याय (अच्छे साहित्य का अध्ययन) और संयम के माध्यम से व्यक्ति के चरित्र को सुधारना।
परिवार निर्माण (Family Development): घर में प्रेम, संस्कार और शांति का माहौल बनाना। 'बाल संस्कार शाला' के माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कार डालना।
समाज निर्माण (Social Development): समाज से कुरीतियों को मिटाना और एक स्वस्थ, शिक्षित व जागरूक समाज की स्थापना करना।
5. गायत्री परिवार के प्रमुख सामाजिक कार्य
चूंकि आप 'नशा मुक्त विश्व' पेज चलाते हैं, आपको यह जानकर खुशी होगी कि गायत्री परिवार के 'सप्त सूत्रीय आंदोलन' (7-point movement) में नशा मुक्ति एक बहुत बड़ा हिस्सा है:
व्यसन मुक्ति (De-addiction): गायत्री परिवार दशकों से तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चला रहा है। इसके तहत रैलियां, कार्यशालाएं और संकल्प पत्र भरवाए जाते हैं।
कुरीति उन्मूलन: दहेज प्रथा, मृत्युभोज, और जातिवाद जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करना।
पर्यावरण संरक्षण: बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण (तरुमित्र अभियान) और जल संरक्षण।
नारी सशक्तिकरण: महिलाओं को शिक्षा, स्वावलंबन और धार्मिक कर्मकांड (जैसे महिलाओं द्वारा यज्ञ कराना) का अधिकार देकर सशक्त बनाना।
वैज्ञानिक आध्यात्मवाद: विज्ञान और धर्म के बीच समन्वय स्थापित करना।
भारतीय संस्कृति का प्रसार: यज्ञ और सोलह संस्कारों (जैसे विद्यारंभ, पुंसवन, नामकरण) को वैज्ञानिक तरीके से जन-जन तक पहुँचाना।
6. वैश्विक उपस्थिति
आज भारत के हर राज्य, जिले और गाँव के अलावा दुनिया के 80 से अधिक देशों में गायत्री परिवार की शाखाएं (शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ और चेतना केंद्र) मौजूद हैं। इसके करोड़ों सक्रिय स्वयंसेवक (जिन्हें 'परिजन' कहा जाता है) निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में लगे हुए हैं।
निष्कर्ष:
गायत्री परिवार सिर्फ पूजा-पाठ की संस्था नहीं है, बल्कि यह "वैज्ञानिक आध्यात्म" पर आधारित एक जीवन जीने की कला सिखाता है। यह लोगों को अंधविश्वास से निकालकर सही ज्ञान, कर्म और सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
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