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22/08/2019
शरीर में चक्र होते हैं या नहीं?
प्रश्न है कि क्या चक्र हमारे शरीर में विद्यमान हैं?
इस विषय पर बहुत से लोगों का कहना है कि चक्र जैसी कोई भी बनावट हमारे शरीर में नहीं है।
हमारे ऋषि मुनियों द्वारा उल्लेखित बहुत सी बातों को आधुनिक पाश्चात्य विज्ञान द्वारा प्रारम्भ में स्वीकार नहीं किया गया। जैसे जैसे उनकी समझ को विस्तार मिला और उन्होंने अपने सोचने का नजरिया बदला तो नव वैज्ञानिकों द्वारा बहुत से उपकरण तैयार किये और विश्व में हमारे प्राचीन विज्ञान की बातों की पुष्टि हुई। जैसे त्वचा की परतों के बारे में आयुर्वेद कहता है कि मानव शरीर की त्वचा की 7 (सात) परत (Layers) हैं। आधुनिक विज्ञान अभी 5 (Five) ही समझ पाया है।पिछली सदी में हमारा आधुनिक विज्ञान त्वचा की केवल एक परत ही बताते एवं जानते थे। धीरे धीरे उन्होंने आधुनिक मशीनें तैयार कीं और आज ५ परत तक उनको समझ है।
शरीर के चारों ओर दिव्य आभामंडल बनने के बारे में जिसको “औरा” कहा जाता है को पहले किसी व्यक्ति विशेष को ज्यादा प्रभावशाली दिखाने के लिए यह आभामंडल चित्रों और गाथाओं में बताया जाता रहा होगा ऐसा कहा जाता था। आज आधुनिक विज्ञान द्वारा उसके फोटो खींचने के उपकरण बनाये और यह सिद्ध हो गया कि यह केवल कपोल कल्पना नहीं है अपितु पूर्णतया सत्य पर आधारित है।
दक्षिण में पैर करके सोना गलत है यह बाद में पश्चिम ने स्वीकार किया और वहां के वैज्ञानिकों ने माना कि पृथ्वी भी एक चुम्बक (Magnet) है और मानव शरीर एवं मस्तिष्क पर इसका विपरीत प्रभाव होता है ।
हम लोग कण कण में यहाँ तक कि पेड़ पौधों में भी आत्मा का निवास है यह प्रारम्भ से ही मानते रहे थे परन्तु पाश्चात्य विज्ञान इसको नहीं मानता था। डॉ. (सर) जगदीश चन्द्र बासु , भारतीय वैज्ञानिक द्वारा एक यन्त्र क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किया और इस से विभिन्न उत्तेजकों के प्रति पौधों की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया।
इस तरह से इन्होने सिद्ध किया कि वनस्पतियों और पशुओं के ऊतकों (Cells) में काफी समानता है। पेड़ पौधों में भी आत्मा है। यह भी जीवित प्राणी की तरह व्यवहार करते हैं।
इस प्रकार के बहुत सारे उद्धरण हैं जिनको बताया जा सकता है।
पाश्चात्य सभ्यता की अच्छाई है कि जब तक वह अपने मस्तिष्क द्वारा विकसित विचारधारा से बनने वाले उपकरणों से प्रमाणित ना कर लें तब तक किसी बात पर ज्यादा भरोसा नहीं करते हैं। यह उचित भी है। यही कारण है कि पाश्चात्य में भौतिकता में बहुत उन्नति हुई है।
यदि नव विज्ञान द्वारा चक्रों को प्रमाणित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके पास उसको प्रमाणित करने योग्य उपकरण नहीं हैं तो इसका यह अर्थ नहीं है कि चक्र नहीं हैं। जिस मार्ग से वह लोग आ रहे हैं उनके पास दिव्य चेतना नहीं है। उनको केवल और केवल भौतिकता की समझ है और उसी समझ के कारण उनके उपकरणों द्वारा एक विशिष्ट स्थिति (Level) के बाद परीक्षण करना संभव ही नहीं है।
इसको ऐसे भी समझा जा सकता है कि जो व्यक्ति किसी कारण से अँधा ही पैदा हुआ हो तो उसको रंगों के बारे में समझाना तो व्यर्थ है परन्तु फिर भी रंग हैं। विश्व में तो इसी प्रकार से जो लोग चक्रों को किसी भी प्रकार से अपने जीवन में प्रयुक्त कर रहे हैं उनको पता है कि चक्रों का लाभ है। जिन्होंने इसको प्रयोग एवं अनुभव करके नहीं देखा वह चक्रों को मानें या न मानें परन्तु चक्र तो हैं।
ऋषि मुनियों ने जो भी लिखा है वह अंदर से समझ कर लिखा है। अपने अनुभव से लिखा है इसीलिए जब आधुनिक शरीर शास्त्र /विज्ञान अपने यंत्रों से देखना चाहता है कि कहाँ हैं इड़ा,पिंगला,सुषुम्ना और 72000 नाड़ियाँ तो आधुनिक यंत्रों द्वारा कुछ समझ में नहीं आता। अभी तक आधुनिक विज्ञान अपने यंत्रों को उन्नत करने की कोशिश में है जिससे कि वह इन रहस्यों को समझ सके।
हम समझतें हैं कि उनको भी हमारे पुरातन विज्ञान पर पूर्ण विश्वास है कि यह सब सही है। जैसे आपने योग को विश्व में अपना उच्च स्थान बनाते हुए देखा कि कैसे कम समय में योग द्वारा सम्पूर्ण विश्व द्वारा आत्मसात किया जा रहा है। योग का मूल लक्ष्य चक्रों को ही ऊर्जीकृत करना है।
जैसे-जैसे हम योग के आसन, प्राणायाम एवं अन्य क्रियाएँ करना शुरू करते हैं तो हम केवल शरीर को ठीक और रोगमुक्त रखने का विचार ध्यान में रखते हैं परन्तु योग को हम सबने यदि गहराई से समझा तो हम देखेंगे कि योग द्वारा हम सभी चक्रों को स्वच्छ एवं ऊर्जीकृत कर उसी का लाभ ले रहे हैं।
यदि कोई व्यक्ति योग से लाभ ले रहा है तो वह उन सभी चक्रों को ही ठीक कर रहा है। अलग अलग चक्रों को ठीक करने के लिए विधियां है। आधुनिक विज्ञान ने योग से पहले और बाद में क्या-क्या शारीरिक सकारात्मक अंतर आते हैं, को अपनी मशीनों से देखा और समझा है।
चक्रों के ऊपर उनका ज्ञान कम है पर उस पर बहुत लोग काम कर रहे हैं। उनका यह प्रयास प्रशंसनीय है और विश्व को चक्र विज्ञान को समझाने में सहायक होगा । भविष्य में चक्र पद्धति (Chakra Therapy) एक स्वस्थ एवं निर्दोष समाज को जन्म देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और मानवता के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
और "आमोद" आपके लिए प्रस्तुत कर रहा है, विश्व मे सर्वप्रथम और एकमात्र "चक्रा थेरपी" पर आधारित औषधियाँ।
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धन्यवाद
आयुर्वेद का चमत्कार, ख़राब नाभि का इलाज़ औषधि द्वारा
हमारे ऋषि-मुनियों का,आजीवन स्वस्थ रहने का रहस्य
हम सभी बचपन से सुनते आ रहे है जब हमारी घर के बड़े बुजुर्ग लोग कहते थे की ज्यादा वजन एकदम मत उठाओ वरना "नाभि उतर जाएगी" या "धरन पे जाएगी"।
दोस्तों यह बात केवल एक कहावत नही है बल्कि स्वस्थ रहने की वो शर्त है जिसे हम भुलते जा रहे हैं। आज के समय में लगभग ३५ वर्ष की उम्र के बाद ज्यादातर लोग किसी न किसी रोग की चपेट में आ ही जाते है या तेज़ी से किसी न किसी रोग की और बढ़ रहे होते हैं, न तो आधुनिक चिकित्सा पद्दति हमें स्वस्थ रख पा रही है और ना ही पुरानी आयुर्वेद।
जिसके मुख्य कारण है हमारे ऋषि-मुनियों के उस चिकित्सा विजान को भुला देना जिसके अपना कर हमारे पूर्वज १०० वर्ष से ऊपर की स्वस्थ आयु प्राप्त करते थे।
हमारे स्वस्थ रहने का वो रहस्य छुपा है हमारी नाभि में। आइये जानते है कैसे:
नाभि हमारे शरीर का केंद्र है। माँ के गर्भ में हमारे जीवन और शरीर की उत्पत्ति माँ की नाभि से जुड़कर हमारी नाभि के बनने से शुरू होती है। जन्म के पश्चात माँ की नाभि से अलग होने के बाद हमारी ऊर्जा केंद्र भी हमारी नाभि ही रहती है जो की सूर्य की भांति हमारे शरीर के सभी अंग-प्रत्यंगों में ऊर्जा का संचार और नियंत्रण करती है।
आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में उपस्थित 72000 नाड़ियों की उदगम स्थल भी हमारी नाभि ही होती है। अचानक झटका लगने या मुख्य रूप से आज के भाग-दौड़ भरे जीवन की कारण हमारा नाड़ी तंत्र प्रभावित होता है और उसमे विकार आने लगते है जिसके कारण हमारी नाभि, जो की हमारे सम्पूर्ण नाड़ी तंत्र का केंद्र होती है वह क्षुब्ध होकर अपनी जगह से अव्यवस्थित हो जाती है। इसी को आम बोलचाल की भाषा में नाभि का हटना या खिसकना कहा जाता है।
हमारे ऋषि-मुनियों के इस प्राचीन विज्ञान को भूलने के कारण हमारा किसी न किसी प्रकार की बीमारी से रोगग्रस्त होना निश्चित हो जाता है और सभी प्रकार के रोगो की जड़ का इलाज़ करने की बजाय हम रोग के लक्षणों को ठीक करने में लग जाते हैं। इसलिए ही, न तो आधुनिक चिकित्सा पद्दति और न ही आयुर्वेद हमें पूरी तरह स्वस्थ कर पा रहा है।
समानयता लोगों के केवल इतना ही पता होता है की यदि रोगी को अकारण पेट में दर्द अथवा दस्त हो और किसी भी उपचार से लाभ नहीं हो रहा हो तो उनका ध्यान नाभि के तरफ जाता है, परन्तु नाभि के असंतुलित (हटने या खिसकने) होने के अन्य अनेक लक्षण होते हैं।
उनमे से कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. सुबह एक बार मे पेट साफ ना होना
2. रात में नींद ना आना या दिमाग़ में अनियंत्रित विचारों
का चलते रहना
3. कुछ भी खाने के बाद पेट मे “गैस” या “एसिड”
बनना
4. हाथ-पेरो और कमर आदि मे अकारण दर्द रहना
5. अकारण शरीर में थकावट रहना और उर्जा की कमी
रहना
6. काम मे मन ना लगना, चिड़चिड़ापन रहना
7. एकाग्रता की कमी
8. भूख कम लगना या सामान्य से अधिक लगना
9. अकारण मोटा होना या कोशिशों के बावजूद पतला
ना होना या किसी तरह वजन घटाने के बाद भी,
पुनः तेज़ी से दोबारा वजन बड़ जाना
10. अकारण बार बार बीमार होना
11. अकारण चिंता या तनाव मे रहना
12. या ऐसा कोई भी अन्य लक्षण जिसको आप सामान्य
से अलग महसूस करते हो
13. सभी प्रकार के टेस्ट और रिपोर्ट्स सामान्य आना
और इस के कारण रोग को समझने में भ्रमित होना
14. सटीक औषधियों के प्रयोग करने पर भी रोग में
आपेक्षित आराम न आना
15. रोग मे आराम आने के बाद फिर से वही रोग बार
बार पुनः होना
16. एक रोग के इलाज़ के साथ साथ अन्य रोगों भी शुरू
होना
उपरोक्त प्रस्तुत लक्षणों का मूल प्रारंभिक कारण निश्चित रूप से नाभि का अव्यवस्थित होना ही होता है
हमारे इस ऊर्जा के केंद्र को व्यवस्थित रखने और करने के लिए आज तक मुख्य रूप से हमारे समक्ष कुछ प्रचलित विधियों जैसे:
1. मालिश द्वारा
2. झटके द्वारा
3. लोटा-दिया द्वारा और
4. पैर के अंघूठे में कला धागा बांध कर आदि उपलब्ध हैं।
परन्तु नाभि को केवल "औषधि" द्वारा अपनी जगह पर व्यवस्थित करना अभी तक चिकित्सकों के लिए एक कल्पना ही थी।
हमें गर्व है की अब आपके समक्ष, विश्व में पहली बार, हमारे हमारे ऋषि-मुनियों के विज्ञान को पुनर्जागृत करके "नाभि चक्र" औषधि के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
एक ऐसी अद्बुद्ध औषधि जो मात्र 10 मिनट में हमारी नाभि (नाभि चक्र) को बैलेंस (Balance), अलाइन (Align) और एक्टिवेट (Activate) कर देती है।
आप नाभि चेक करने के किसी भी प्रचलित तरीके के प्रयोग से मार्ट १० मिनट में औषधि के रिजल्ट की पुष्टि भी कर सकते हैं।
आप स्वयं देखेंगे की अन्य नाभि के व्यवस्थित होने के बाद आपके किसी भी रोग के लिए चल रही औषधियों का प्रभाव पहले से कई गुना अधिक होना आरम्भ हो जाएगा और आप किसी भी रोग से पूर्ण स्वस्थ होने की दिशा में बढ़ चलेंगें।
और अधिक जानकारी के लिए आप हमसे कॉल अथवा व्हाट्सप्प के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।
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