Raghvendar Kumar

Raghvendar Kumar

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31/01/2025

माउंटेन मैन को जन्मदिन पर सादर नमन ।

नाम दशरथ मांझी, जन्म 14 जनवरी 1934, घर, विहार के गया जिला के गेहलौर मे है। दशरथ मांझी को लोग आज माउंटेन मैन के नाम से जानते है। एक तरफ इनकी कहानी सुन आखो से पानी आती है तो दुसरी ओर प्रेरणास्रोत भी है।

सन् 1959 की बात है। दशरथ मांझी की पत्नी फगुनिया,दशरथ मांझी के लिए एक छोर से दूसरे छोर पर पहाडो पर अपने पति के‌ लिए खाना ले कर जा रही थी। जाने के क्रम में ठोकर लगी और पहाड़ के दर्रे में गिर कर घायल हो गई । नज़दीकी शहर लगभग 55-60 किलोमीटर दूर था, इलाज के लिए शहर लेजाते समय,ज्यादा दूरी होने के कारण,ससमय इलाज के अभाव मे दशरथ मांझी की पत्नी फगुनिया देवी की मौत हो गई ।

फगुनिया के मौत ने दशरथ मांझी के दिल को झकझोर दिया। उनके मन मे बार-बार एक द्वंद्व उठने लगा,आज‌ यह पहाड़ नही होता तो मेरी फगुनिया ज़िंदा होती,फगुनिया के मौत के बाद दशरथ मांझी ने मन ही मन प्रण‌ लिया / दृढ़ निश्चय किया कि अब इस पहाड का सीना चीर‌ कर ही दम लेंगे। इस पहाड़ की वजह से मेरी फगुनिया की तरह अब दुसरा मौत नही होगा।

दशरथ मांझी अपने संकल्प पुरा करने के लिए पहाड का सीना चीरने चल पडे । परन्तु बहुत गरीब परिवार के होने के कारण उनके पास छेनी हथौड़ा खरीदने तक का‌ पैसा नही था और इधर पहाड का सीना भी चीरना था । उनके घर एक बकरी थी उसे बेच कर छेनी हथौड़ा का इंतजाम किया और पहाड को तोडना चालू कर दिए। इस असंभव काम को देख लोगो ने खिल्ली उडाना चालू कर दिया। लोग कहने लगे की देखो फगुनिया के प्यार मे पगला गया है। कुछ दिन बाद लोग उन्हें पागल कह कर पुकारने लगे। लोगों को यह नही पता था कि उनका यह पागलपन हर सवेरा एक इतिहास रचने‌ की ओर बढ रहा है। असंभव काम को 22 वर्षों मे दशरथ मांझी ने संभव कर दिखाया। उन्होंने ने 55-60 किलोमीटर की दुरी को, पहाड को बीचों बीच से लगभग 360 फुट लम्बा और लगभग 30 फुट चौडा काट कर 55-60 किलोमीटर की दुरी को महज 12-15 किलोमीटर कर दिखाया।

ऐसे ही नही दशरथ मांझी के नाम पर स्कूल, रोड,अस्पताल और चौक चौराहो के साथ-साथ उनके जीवन पर आधारित द माउंटेन मैन फिल्म भी बनी। उसके पीछे लगभग 8030 दिन का कडी मेहनत और दृढ़ संकल्प है।

फगुनिया का प्यार और दशरथ मांझी के मानवतावादी सोच, दृढ़ संकल्प ने,आज तक के सारे कहानी को फीका कर दिया। चाहे शाहजहाँ की याद मे ताज महल बनवाया गया हो,या रामसेवक रैदास के द्वारा मंदिर,औरंगजेब के द्वारा मकबरा बनवाया गया हो,या पत्नी के लिए हजारों जान लेने की कहानी सुनी हो। फगुनिया के प्यार और दशरथ मांझी के संकल्प ने सबको फीका कर दिया।

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