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05/09/2024
कैंसर के उपचार के लिए नया ऊष्मा-आधारित दृष्टिकोण कीमोथेरेपी की खुराक को कम कर सकता है।
शोधकर्ताओं ने प्रभावी चुंबकीय हाइपरथर्मिया-आधारित कैंसर थेरेपी के लिए उप-इष्टतम खुराक पर हीट शॉक प्रोटीन 90 निरोधक (एचएसपी90i) के साथ अल्ट्रा-छोटे चुंबकीय नैनो कणों (MDs) के संयोजन का उपयोग किया है। यह तकनीक जरूरी कीमोथेरेपी खुराक को कम करके प्रभावी उपचार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है। यह एक ऐसी सहायक चिकित्सा के रूप में काम करती है जो दुष्प्रभावों को कम करती है।
दुनिया भर में कैंसर की दर बढ़ने के साथ, उपचार की नई विधियां जरूरी हो गई हैं। कीमोथेरेपी और सर्जरी जैसे पारंपरिक उपचारों में दवा प्रतिरोध और गंभीर दुष्प्रभावों सहित कई पहलु जुड़े हुए हैं। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, हम नैनो थेरेपी जैसे अभिनव उपचार विकसित कर रहे हैं, जिसके दुष्प्रभाव कम हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी), मोहाली के वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि चुंबकीय अतिताप आधारित कैंसर थेरेपी (एमएचसीटी) के साथ हीट शॉक प्रोटीन 90 (एचएसपी90) के अवरोधक 17-डीएमएजी का उपयोग करने वाली संयोजन रणनीति से युक्त संयोजन थेरेपी से ऊष्मा आधारित कैंसर उपचार की प्रभावशीलता में सुधार हो सकता है।
अंतर-ट्यूमर इंजेक्शन के माध्यम से पशु मॉडलों के उपचार के परिणामस्वरूप यह बात सामने निकल कर आई कि चूहे के ग्लियोमा मॉडल में ज्यादातर ग्लियोमा कोशिका की मौत हुई है और 8 दिनों के भीतर प्राथमिक और द्वितीयक ट्यूमर स्थलों पर ट्यूमर निरोधी दर क्रमशः 65 प्रतिशत और 53 प्रतिशत तक पहुंच गई।
एसीएस नैनो में प्रकाशित विधि कम चीरफाड वाली है और इसके दुष्प्रभाव कम भी कम हैं। रिसर्च टीम ने दिखाया है कि एमएनपी, जब एक वैकल्पिक चुंबकीय क्षेत्र (एएमएफ) के संपर्क में आते हैं, तो ट्यूमर से प्रभावी रूप से लड़ सकते हैं। यह संयुक्त चुंबकीय हाइपरथर्मिया और कीमोथेरेपी (एमएचसीटी) दृष्टिकोण कीमोथेरेपी की आवश्यक मात्रा को कम कर सकता है, जिससे उपचार सुरक्षित और अधिक प्रभावी हो जाता है। इसके अतिरिक्त, यह थेरेपी द्वितीयक ट्यूमर साइट पर अतिरिक्त खुराक की आवश्यकता के बिना ट्यूमर का इलाज कर सकती है, जिससे अत्यधिक प्रभावी तरीके से कैंसर का उपचार हो जाता है।
नई चिकित्सा के नैदानिक अनुप्रयोग को साकार करने के लिए व्यापक वैश्विक शोध की आवश्यकता है, ताकि संभावित रूप से एक सहायक या वैकल्पिक कैंसर चिकित्सा विकसित हो सके। यह अध्ययन अधिक कुशल और सहनीय कैंसर विरोधी उपचारों का मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे लाखों रोगियों को पर्याप्त लाभ मिलता है और हाइपरथर्मिया-आधारित उपचारों के लिए नई राह दिखाता हैं।
इस चुनौती का समाधान करने के लिए, डॉ. दीपिका शर्मा के नेतृत्व में रिसर्च टीम ने एचएसपी90 की भूमिका की जांच की, जो एक ऐसा जीन है जो बेहद गर्मी होने पर सक्रिय हो जाता है। 17-डीएमएजी दवा का उपयोग करके एचएसपी90 को रोककर, उनका उद्देश्य कोशिकाओं की गर्मी से होने वाले नुकसान को कम करना था।
इस उन्नत चिकित्सा का एक प्रमुख लाभ प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित करने की इसकी क्षमता में निहित है, जो कैंसर के खिलाफ शरीर की प्राकृतिक रक्षा को बढ़ाता है।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह उपचार साइटोकाइन स्राव के माध्यम से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय करता है, जिससे इसके ट्यूमर-रोधी प्रभाव और अधिक बढ़ जाते हैं।
साभार ।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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