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19/09/2024
22/04/2022
ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व
ज्योतिष में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग आदि का कारक माना जाता है। शुक्र वृषभ और तुला राशि का स्वामी होता है और मीन इसकी उच्च राशि है, जबकि कन्या इसकी नीच राशि कहलाती है। शुक्र को 27 नक्षत्रों में से भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। ग्रहों में बुध और शनि ग्रह शुक्र के मित्र ग्रह हैं और तथा सूर्य और चंद्रमा इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं। शुक्र का गोचर 23 दिन की अवधि का होता है अर्थात सूर्य एक राशि में क़रीब 23 दिन तक रहता है।
ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह का मनुष्य जीवन पर प्रभाव
शारीरिक रूपरेखा एवं स्वभाव - हिन्दू ज्योतिष में शुक्र ग्रह जिस व्यक्ति के लग्न भाव में होता है वह जातक रूप-रंग से सुंदर होता है। उसका व्यक्तित्व विपरीत लिंग के व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है। शुक्र के प्रभाव से वह दीर्घायु होता है और स्वभाव से वह मृदुभाषी होता है। लग्न में शुक्र व्यक्ति को गायन, वादन, नृत्य, चित्र कला के प्रति रूचि पैदा कराता है। शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति काम-वासना, भोग विलास संबंधी चीज़ों को अधिक प्राथमिकता देता है। जिस जातक की कुंडली में शुक्र प्रथम भाव में स्थित होता है वह चित्रकार, गायक, नर्तक, कलाकार, अभिनेता आदि बनता है।
बली शुक्र - बली शुक्र व्यक्ति के वैवाहिक जीवन को सुखी बनाता है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम की भावना को बढ़ाता है। वहीं प्रेम करने वाले जातकों के जीवन में रोमांस में वृद्धि करता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में शुक्र मजबूत स्थिति में होता है वह व्यक्ति जीवन में भौतिक सुखों का आनंद लेता है। बली शुक्र के कारण व्यक्ति साहित्य एवं कला में रुचि लेता है।
पीड़ित शुक्र - पीड़ित शुक्र के कारण व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में परेशानियाँ आती हैं। पती-पत्नि के बीच मतभेद होते हैं। व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता आती है और वह भौतिक सुखों के अभाव में जीता है। यदि जन्म कुंडली में शुक्र कमज़ोर होता है तो जातक को कई प्रकार की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। पीड़ित शुक्र के प्रभाव से बचने के लिए जातकों को शुक्र ग्रह के उपाय करने चाहिए।
रोग - कमज़ोर शुक्र के कारण जातक की कामुक शक्ति कमज़ोर होती है। इसके प्रभाव से व्यक्तियों को किडनी से संबंधित बीमारी होने का ख़तरा रहता है। व्यक्ति को आँखों से सबंधित वहीं स्त्री जातकों के लिए शुक्र गर्भपात का कारण बनता है।
कार्यक्षेत्र - ज्योतिष में शुक्र ग्रह कोरियोग्राफी, संगीतकार, पेंटर, फैशन, डिज़ाइनिंग, इवेंट मैनेजमेंट, कपड़ा संबंधी व्यवसाय, होटल, रेस्टोरेंट आदि का कारक है।
शुक्र की दोनों राशियो का महत्व
शुक्र की दो राशियां हैं - वृष और तुला. वृष राशि स्थिर स्वभाव की राशि है और तुला राशि चर स्वभाव की राशि है हालांकि दोनों ही शुक्र की राशियां हैं परन्तु दोनों के स्वभाव और जीवनचर्या में काफी अंतर है. आइए जानते हैं इन दो राशियों के बारे में...
शुक्र की पहली राशि वृष
- यह राशि खूबसूरती और सौंदर्य की राशि मानी जाती है
- यह आकर्षण और बुद्धिमता की राशि है
- चन्द्रमा इस राशि में सबसे ज्यादा मजबूत होता है
- इस राशि के लोग प्रशासन शिक्षा और सौंदर्य के क्षेत्र में खूब सफलता पाते हैं
- इनको शुरुआत में काफी संघर्ष करना पड़ता है
- परन्तु तीस वर्ष के बाद ये खूब सफलता पा जाते हैं
- इनको सांस, कान नाक गले और सरदर्द की समस्या हो जाती है
वृष राशि वालों को सफलता के लिए क्या करना चाहिए?
- अपने जिद्दी स्वभाव और क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए
- भावनात्मक समस्याओं से बचना चाहिए
- करियर में बार बार के परिवर्तन से बचना चाहिए
- जहाँ तक संभव हो पूर्णिमा का व्रत रखना चाहिए
- शिव जी की यथाशक्ति उपासना करनी चाहिए
- हरे और नीले रंग का प्रयोग करना चाहिए
- सलाह लेकर पन्ना या नीलम पहनना चाहिए
शुक्र की दूसरी राशि तुला
- यह राशि ग्लेमर की राशि मानी जाती है
- इस राशि के पास संतुलन साधने की कला होती है
- शनि इस राशि में सबसे मजबूत होता है और सूर्य सबसे कमजोर
- इस राशि के लोग कला, संगीत, शिक्षा और फैक्ट्री इंडस्ट्री के क्षेत्र में खूब सफलता पाते हैं
- इस राशि के लोग करियर को लेखर खूब भटकते हैं
- फिर बाद में सफलता पा जाते हैं
- जन्मस्थान से दूर जाकर इनको खूब सफलता मिलती है
तुला राशि वालों को सफलता के लिए क्या करना चाहिए ?
- मन की चंचलता से बचना चाहिए
- प्रेम और विवाह के मामलों में सावधानी रखनी चाहिए
- काम टालने और समय की बर्बादी से बचना चाहिए
- शनि देव की यथाशक्ति पूजा करनी चाहिए
- एक लोहे का छल्ला जरूर धारण करना चाहिए
- नीले और सफ़ेद रंग का खूब प्रयोग करना चाहिए
- सलाह लेकर नीलम या हीरा पहनना चाहिए।
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