Manoj Kumar Sharma
Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Manoj Kumar Sharma, Financial service, 101 Partap Khand, vishwakarma nagar, Delhi.
ज्ञान चर्चा
महापुरुषों का गलत चित्रण करते हम
चर्चा में आया तो सबने ये ही बताया कि भगवान वाल्मीकि पहले वो डाकू थे फिर वो नारद जी के सम्पर्क में आये तो साधु बन गये।
आप देखे की एक महान ऋषि के साथ ये जोड़ना, ऐसे ही भगवान कृष्ण के साथ चोर जोड़ना, भगवान महाशिव के साथ गांजा का और भांग का सेवन जोड़ना,
सन्त तुलसीदास जी के साथ जोड़ना की उनकी पत्नी ने दुत्कारा तो वो संत बने । जबकि वो 5 वर्ष की अवस्था से ही संतो के संसर्ग में थे।
ऐसा नही लगता हम अपने भगवानों के साथ ऐसा कह कह कर सामने वाले को उनका नकारात्मक पहलू बताते है।
आप कभी अपने माता का परिचय ऐसे करा सकते है कि पहले ये गलत थी अब देवी बन गई क्योंकि ये मेरी माँ है या आप अपने पिता का परिचय ऐसे करा सकते है कि पहले ये छंटे हुये बदमाश थे लेकिन अब प्रोफ़ेसर है। या कोई आपके सामने उनके बारे में ऐसा परिचय दे सकता है।
नही दे सकता न आप दे सकते है आप उसे मरने मारने पर उतारू हो जायेंगे। पर जैसे ही आपके महान पुरुषों, देवी देवताओं के बारे में पूछा जाये तो आप ही शुरू हो जाते है। आपको अपने माता पिता की तरह ही उनका भी अच्छा पक्ष रखना चाहिये। क्या आप सोच भी सकते है कि जो हमारे पूजनीय है वो इतने बुरे हो सकते है। ये सब कुछ वर्षों में हमारे पूजनीय महापुरुषों और देवताओं के साथ जोड़ दिया गया ।
हमारे कथावाचक भी रस ले लेकर इसको आगे बढ़ाते गये। तो अब जो युवा पीढ़ी है उसको दूसरे पक्ष वाले ये बाते कह कर उसका मजाक उड़ाते है। और हमे भी पूरा ज्ञान न होकर उसे ही ठीक बताने लगते है।
इसलिये हमे हमेशा अपने महापुरुषों, देवी देवताओं, ऋषि मुनियों की ऐसी कहानियों को नही बोलना है उन्होंने जो अच्छे कर्म किये है सिर्फ उनको बताना है। जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने गीता सुनाई सर्वप्रथम सूर्य को , ऐसे ही भगवान वाल्मीकि ने रामायण लिखी, भगवान शिव आदि देव है। सन्त तुलसीदास जी महान संत है जिन्होंने रामचरित मानस जैसा पूजनीय ग्रथ हमे दिया। स्वामी विवेकानंद ऐसे सन्त है जिन्होंने शिकागो में जाकर धर्म का झंडा बुलंद किया। बुरी बाते बताने का सामने वाला हमारे सामने साहस भी न कर पाये। अब ऐसा वातावरण बनाना है।
मंनोज शर्मा "मन"
ज्ञान चर्चा
बाढ़ के बाद भी पानी की कमी
चर्चा में आया कि पहले जब वर्षा होती थी तो गांव के बाहर तालाब और गांव के अंदर कुँए होते थे। और एक गांव दूसरे गांव से 2 से तीन किलोमीटर पर होता था। ये कुँए और तालाब पूरे वर्ष भरे रहते थे। और एक तालाब से दूसरे तालाब की दूरी 2 किलोमीटर की होने से ये उतनी दूरी तक जल का स्तर बनाये भी रखते थे। तो किसी भी जगह आप बीच मे खोदो तो पानी दस से बीस फुट तक निकल आता था।
पर जैसे जैसे शहरीकरण बड़ा। पगडंडिया सड़के हो गई। सड़को के किनारे फुटपाथ हो गये। तालाब और कुँए लुप्त हो गये। वर्षा का पानी सड़को से नालियों और नालियों से नाले में और फिर नदियों में , नदियों से समुंदर में।
मतलब कही भी पानी का संग्रहण नही।
पानी का दोहन जारी रहा। जमीन में खेती के लिये ट्यूबेल, घरों में समर्सिबल, जानवरो को नहाने के लिये तालाब की जगह मोटर चला कर पानी बहाना। घरों में पीने से ज्यादा मशीनों में पानी लगना, फ़्लैश में पानी का बहाना।
इन सबसे पानी का ज़मीन में स्तर 300 फुट तक दिल्ली में और तमिलनाडु में 2000 फुट तक चला गया है। कई क्षेत्र सूखा ग्रस्त हो चुके है। दिल्ली तो खासकर अपने पड़ोसी राज्यो पर निर्भर है। उनके पास जब तक है दे रहे है उनको भी जब नही मिलेगा तो वो भी हाथ खड़े कर देंगे।
लेकिन जिसने अभी से कम पानी मे अपनी जरूरते पूरी कर ली वो तो आगे भी अपना समय निकाल लेगा। पर जिसको सुबह शेव बनाने में नल खुला छोड़ना, मोटर चला कर टँकी से बहता पानी का पता न चलना, फलेश में अत्यधिक पानी का उपयोग करना। उसको बहुत ही दिक्कत आने वाली है। अभी कुछ समय पहले हमारी क्रिकेट टीम विदेश गई थी तो होटल में उनको एक बाल्टी पानी दे दिया गया कि नहाने और धोने के लिये यही है। बाकी खरीद कर लेना है। तो सोचिये अभी तो दिल्ली में फ्री मिल रहा है फ्री के चक्कर मे पानी को मत बहाइये।
उसकी कद्र कीजिये उतना ही प्रयोग करे जितनी जरूरत हो। फव्वारे की जगह बाल्टी में पानी लेकर नहाये। संग्रहण करे ताकि भविष्य की पीढ़ी भी आपकीं तरह इसका उपयोग कर सके।
जल है तो जीवन है।।
मनोज शर्मा "मन"
आंटी के हाथ की रसमलाई का आनंद
रोज़ की तरह आज शनिवार की शाम को मैं और मेरे मित्र अशोक रेहानी जी शाम की सैर को निकले चिल्ड्रन पार्क की और। हल्की हल्की वर्षा हो रही थी। आगे थोड़ा गये तो तेज़ हो गई। अपनी बाइक मोड़ी वापस की और तो देखा हरीश जी अपने आफिस में बैठे थे अकेले थे। हमारा टहलने का समय शाम 6 से 7 होता है। हम उनके आफिस में बैठ गये ।वार्तालाप शुरू हुआ तभी वहां से भेलपुरी वाला निकला। हरीश जी ने तीन पत्ते बनवाये उनका आनंद लिया । अब साढ़े छह बजे थे। आधा घण्टा बाकी था।
मैंने गुरमुख जी को फोन मिलाया वो वही आफिस के पास था। उन्होंने कहा घर पर हूँ। मैंने कहा हम आ रहे है। घर पहुँचे। वैसे गुरमुख जी हमारी शाखा के सबसे सक्रिय बुजुर्ग है। वो जितने दिन भी भारत मे होते है समय से शाखा पहुँच जाते है। उनका एक पुत्र गुरदीप है उनकी एक बहु और एक पोता और चार पुत्रियां है। गुरदीप ऑस्ट्रेलिया में है। तो गुरमुख सिंह जी भी ऑस्ट्रेलिया और भारत मे दोनो जगह आते जाते रहते है। उनके पुत्र, बहु का व्यवहार भी बहुत ही बढ़िया है। और पोता तो बहुत ही चुलबुल नटखट है दादी का प्यारा।
हम जैसे ही घर पहुँचे बाहर हल्की हल्की बारिश हो रही थी। गुरमुख जी बिना पगड़ी के थे। आंटी जी के भी पैर की उंगली में कुछ चोट लग गई थी। नही तो ये दम्पत्ति रोज़ हमारे साथ वही टहलने जाती है। दोनो के चेहरे पर मुस्कराहट थी। गुरमुख जी ने पगड़ी बांधनी शुरू कर दी। आंटी फटाफट आज अपने हाथों की बनाई रस मलाई ले आई थी। और साथ मे कलाकंद भी।
गजब का स्वाद था। गुरमुख जी ने बताया अभी तुम्हारी आंटी तुम्हे ही याद कर रही थी। कह रही थी ये कलाकंद और ये रसमलाई मंनोज के आफिस में दे आओ। अभी कह ही रही थी कि आपका फोन आ गया। मैंने कहा मुझे भी कुछ लगा और मैं भी आ गया। फिर मैंने रसमलाई का आनंद लेने लगा। वो मुझे इसके बनाने की विधि बता रही थी। कैसे उन्होंने बनाई। मैं रसमलाई का आनंद भी ले रहा था उनकी बातें भी सुन रहा था वो बहुत ही प्यार से रसमलाई और कलाकंद बनाने की विधि बता रही थी। कलाकंद भी अच्छी बनी हुई थी। एक पीस उसका भी खाया।
फिर गुरमुख जी अपने हाथों से चार कप ग्रीन टी लेमन फ्लेवर में बना कर लाये। मैने कहा गुरमुख जी भी बना लेते है तो आंटी जी ने मुस्करा कर कहा वैसे कर लेते है लेकिन आज मेरे चोट लगी है तो कर भी रहे है। चाय आ चुकी थी। चाय भी गजब थी। दोनो दम्पत्ति बाते कर रहे थे प्रसन्न थे हमारे आने पर । अब सात बज चुके थे। आफिस से फोन भी आने लगे थे पर न उनका दिल भरा था न हमारा ।
थोड़ी सी नमकीन भी चखकर आंटी और उनमें अपने माता पिता का स्वरूप देखता हुआ उन्हें प्रणाम कर मैं भावों में डूबा वहां से चल पड़ा। मेरी माता भी कुछ मीठा बनाती थी तो वो भी मेरे लिये अलग से रखती थी कि मंनोज को ये अच्छी लगती है।
मंनोज शर्मा "मन"
ज्ञान चर्चा
मदन लाल ढींगरा
स्वतंत्रता की लड़ाई में ऐसे नाम जो हंसते हंसते फांसी पर झूल गये। ऐसा ही एक नाम था मदन लाल ढींगरा जिनका जन्म 18 फरवरी, 1883 को हुआ।
इन्होंने एक कार्यक्रम में 1 जुलाई 1909 को कर्जन वाइली इंडियन नेशनल एसो. के वार्षिक उत्सव में पहुँचा था इनके शरीर मे देखते ही देखते पांच गोलियां दाग दी थी। और इनका काम तमाम कर दिया था।
इन पर मुकद्दमा चला और फांसी की सजा हुई और इन्होंने हंसते हंसते मात्र 26 वर्ष की उम्र में 17 अगस्त को फांसी के फंदे को चूमा और अमर हो गये।
शहीदों की चिंताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले।
वतन पे मरने वालों का यही निशाँ होगा।।
मंनोज शर्मा "मन"
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
101 Partap Khand, Vishwakarma Nagar
Delhi
110095