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06/08/2021

दैनिक समाचार डाइजेस्ट
IAS PCS News and Articles
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, एमएसएफ रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 4 प्रतिशत पर बरकार रखा है.

आरबीआई के गवर्नर शशिकांत दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने मौद्रिक नीति के मामले में उदार रुख बनाये रखने का निर्णय किया है. हमारे कदम का उद्देश्य वृद्धि को गति देना और अर्थव्यवस्था में संकट को दूर करना है. आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है.

Reserve Bank of India keeps repo rate unchanged at 4%, maintains accommodative stance pic.twitter.com/fAhHBio4OR

रेपो रेट: भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, रेपो रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4 प्रतिशत रहेगा. रेपो रेट वह दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है.

रिवर्स रेपो रेट: रिवर्स रेपो रेट भी बिना किसी बदलाव के साथ 3.35 फीसदी पर रहेगा. यह वह दर होती है जिसपर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है.

एमएसएफ रेट: एमएसएफ रेट बिना किसी बदलाव के 4.25 फीसदी रहेगा. आरबीआई ने पहली बार वित्त वर्ष 2011-12 में सालाना मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में एमएसएफ का जिक्र किया था.

बैंक रेट: बैंक रेट वह दर है जिस पर आरबीआई व्यापारिक बैंको को प्रथम श्रेणी की प्रतिभूतियों पर कर्ज प्रदान करता है. बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पहले की तरह ही 4.25 फीसदी है.

आरबीआई के मुताबिक साल 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. जो कि उसके पहले के अनुमान के अनुसार है. अर्थव्यवस्था में रिकवरी के संकेत को देखते हुए ही आरबीआई ने ब्याज दरों में कटौती से दूरी बनाई है. हालांकि आरबीआई गवर्नर ने अर्थव्यवस्था में असमान रिकवरी पर चिंता जताई है. वहीं कुछ सेक्टर में उम्मीद के अनुसार रिकवरी नहीं हो रही है.

आरबीआई गवर्नर ने पॉलिसी का घोषणा करते हुए कहा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है. ऐसे में हमें सतर्क रहने की जरूरत है. खास तौर से तीसरी लहर पर सतर्क रहना होगा. आज की मौद्रिक समीक्षा नीति पर कमेटी के 6 सदस्यों में से 5 सदस्यों ने रेपो रेट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं करने के पक्ष में अपना मत दिया.

आरबीआई ने ब्याज दर में किसी भी तरह का बदलाव ना करके किसी भी तरह के अर्थव्यस्था में बदलाव से बचने की कोशिश की है. देश में कोरोना संक्रमण का खतरा पूरी तरह नहीं टला है. कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका तेज है. वैक्सीनेशन की रफ्तार में तेजी के साथ अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा रही है.

23/05/2018

महत्वपूर्ण जानकारी ➡️ Exam Oriented
➖➖➖सविनय अवज्ञा आंदोलन➖➖➖
• 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के बाद, गांधीजी ने सरकार को कई मांग सौंपे और उन्हें चेतावनी दी कि इन मांगों को स्वीकार न करने की स्थिति में वे आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर हो जाएँगे।

• चूंकि सरकार ने उनके प्रस्ताव का कोई जवाब नहीं दिया, इसलिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार को कोई कर नहीं देने, सैन्य व्यय के खिलाफ तथा नमक कर के विरोध के कार्यक्रम, के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया।

• 12 मार्च 1930 को, गांधीजी गुजरात में अपने 79 सहयोगियों के साथ नमक कानून तोड़ने के लिए समुद्र के दांडी तट की ओर बढ़े। यह साबरमती आश्रम से 200 मील दूर था और पैदल दांडी पहुंचने में 24 दिन लग गए थे।

• इस यात्रा में सरदार पटेल उनके साथ हो गए थे। वे 5 अप्रैल 1930 को वह वहां पहुंचे और 6 अप्रैल 1930 को सुबह की प्रार्थना के बाद, उन्होंने समुद्र किनारे पर नमक बनाना शुरू कर दिया। इस प्रकार उन्होंने नमक कानून तोड़ा।

• सुभाष चंद्र बोस ने उनके दांडी मार्च की तुलना नेपोलियन के पेरिस मार्च और मुसोलिनी के रोम मार्च के साथ की।

सविनय अवज्ञा आंदोलन के कार्यक्रम:

(i) भारतीयों को नमक कानून तोड़ना चाहिए।

(ii) विदेशी कपड़े का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

(iii) शराब की दुकानों को लूटा जाना चाहिए और बंद किया जाना चाहिए।

(iv) सरकारी कर्मचारी द्वारा काम नहीं करना चाहिए।

(v) छात्रों को सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार करना चाहिए।

• 5 मई 1930 को गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया।

• आंदोलनोंकारियों ने इस कार्यक्रम में 'कोई कर नहीं अभियान' को शामिल कर लिया।
Brought to you by Ram Kumar Jha

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