Kuldeep Saini

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30/06/2025
Photos from Kuldeep Saini's post 24/06/2025

आषाढ मास कृष्ण पक्ष #त्रयोदशी संवत् २०८२ मॉ॓ #गंगा दर्शन एवं #स्नान, मॉ॓ #सुरेश्वरी देवी, श्री #दक्षेश्वर महादेव मंदिर #कलखल, श्री #बल्केश्वर महादेव मंदिर, एवं #सुरेश्वर महादेव मंदिर #दर्शन एवं #जलाभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
।।।हर हर महादेव जी।।।
।।।जय माता दी जी।।।
।।।हर हर गंगे।।।
।।।जय मॉ॓ भारती।।।

Photos from Kuldeep Saini's post 13/04/2025

श्री #बिल्वकेश्वर महादेव जी, मॉ॑ #सुरेश्वरी देवी जी दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
।। हर हर महादेव जी।।
।। जय माता दी जी।।
।। जय मॉ॑ भारती।।

श्री बिल्वकेश्वर महादेव जी ......

हरिद्वार के पास ही बिल्व पर्वत पर वो स्थान है जहाँ
बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर, स्थित है। एक पौराणिक कथा
हरिद्वार में स्थित बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर अपनी शांत वातावरण और पौराणिक महत्व के लिए जाना जाता है।
मान्यता है कि माता पार्वती ने यहां घोर तपस्या की थी। उन्होंने बिल्व वृक्ष के नीचे तपस्या की थी, इसलिए इस स्थान का नाम बिल्वकेश्वर पड़ा। माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां प्रकट हुए थे।
स्वयंभू शिवलिंग: मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है, यानी यह प्राकृतिक रूप से बना है।
शांत वातावरण: मंदिर शांत और प्राकृतिक वातावरण में स्थित है, जो भक्तों को ध्यान और आध्यात्मिक अनुभव के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।
गौरी कुंड: मंदिर के पास ही गौरी कुंड स्थित है, जो माता पार्वती से जुड़ा हुआ है।
धार्मिक आस्था: यह मंदिर शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।
शांति का स्थान: मंदिर का शांत वातावरण भक्तों को ध्यान और आध्यात्मिक अनुभव के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।
पौराणिक महत्व: मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं इसे और अधिक खास बनाती हैं।
आध्यात्मिक अनुभव: शांत वातावरण में भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है।
पौराणिक महत्व: मंदिर की पौराणिक कथाएं इसे और अधिक खास बनाती हैं।
प्रकृति के बीच शांति: मंदिर प्राकृतिक वातावरण में स्थित है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। शिवलिंग: मंदिर का मुख्य आकर्षण स्वयंभू शिवलिंग है।
गौरी कुंड: माता पार्वती से जुड़ा यह कुंड भी देखने लायक है। मंदिर का प्रांगण: मंदिर का प्रांगण शांत और सुंदर है।
बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। यह मंदिर शांति और आध्यात्मिकता का स्थान है

मॉ॑ सुरेश्वरी देवी जी ..........

सुरेश्वरी देवी का यह मंदिर राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के शांत जगंलो में स्थित है। सुरेश्वरी मंदिर हरिद्वार में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर देवी दुर्गा और देवी भगवती को समर्पित है। घने जंगलो में सिध्पीठ माँ सुरेश्वरी देवी सूरकूट पर्वत पर स्थित है। मंदिर का बड़ा ही पौराणिक महत्व है।

सुरेश्वरी मंदिर हरिद्वार में स्थित एक प्राचीन मंदिर है । यह मंदिर देवी दुर्गा और देवी भगवती को समर्पित है । इस मंदिर को सिध्पीठ के रूप में भी माना जाता है। हरिद्वार से सात किमी की दुरी पर रानीपुर के घने जंगलो में सिध्पीठ माँ सुरेश्वरी देवी सूरकूट पर्वत पर स्थित है। मंदिर का बड़ा ही पौराणिक महत्व है , इस मंदिर की गणना प्रसिद्ध सिध्पीठो में की जाती है , जिसका उल्लेख स्कन्दपुराण के केदारखंड में भी मिलता है। इस मंदिर कि यह मान्यता है कि श्रधा भाव से आकर दर्शन करने वालो के भक्तो के कष्टों को माँ सुरेश्वरी देवी सहज दूर कर देती है। पुत्र की कामना करने वालो को पुत्र और धन की कामना करने वालो को धन , मोक्ष चाहने वालो को मोक्ष प्राप्ति कर कृपा प्रसाद देने वाली माँ सुरेश्वरी देवी के दर्शन करने के लिए श्रधालुओ की भीड़ का तांता लगे रहता है।जनश्रुति के अनुसार कहा जाता है कि माँ सुरेश्वरी के दर्शन करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह भी मान्यता है कि माँ सुरेश्वरी देवी के दर्शन से चर्म रोगी एवम् कुष्ठ रोगी निरोगी हो जाते है। नवरात्रि में अष्टमी , नवमी और चतुर्दशी के दिन माँ के दर्शन का विशेष महत्व है , कहा जाता है कि इस दिन देवता भी माँ भगवती के दर्शन करने के लिए आते है।

चन्द्रवंशी राजा रजी के पुत्र से पराजित और स्वर्ग लोग से निष्कासित भयभीत इंद्र ने देवगुरु बृहस्पति के परामर्श से इसी स्थल पर माँ भगवती की स्तुति की थी अर्थात इस मंदिर की मान्यता यह कि जब देवराज इंद्र राजा रजी के पुत्र से भयभीत होकर छुप गए तब बृहस्पति गुरु ने उन्हें विष्णु भगवान की स्तुति करने को कहा , भगवान विष्णु की स्तुति करने के बाद विष्णु जी ने कहा ” जो शक्ति है माया , तुम्हारी रक्षा कर सकती है , तुम उन्ही कि शरण में जाओ , वही मेघ रूप में वर्षा करती है , सूर्य रूप में तपती है , वायु रूप में शोषण करती है। देवराज इंद्र की स्तुति से प्रसन्न होकर माँ भगवती नें इसी स्थान पर इंद्र को दर्शन दिए थे। नवरात्र में हजारों लोग माता के दर्शनों को मंदिर आकर पूजा अर्चना करते है।

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