Manish Kumar

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28/05/2026

लोग कहते है पैसा कुछ नहीं होता..!!

जरूरत पड़ने पर किसी से मांग कर .!!

देखो तब पता चलेगा पैसा क्या होता है..!!!

Manish Kumar

21/05/2026

**सैन्य छावनी |** दुनिया के सबसे ऊँचे और ठंडे युद्ध क्षेत्र, सियाचिन ग्लेशियर में शून्य से नीचे के तापमान और कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सेना के दो जुड़वां जैसे जांबाज सपूतों को आज पूरा देश नमन कर रहा है। सैन्य परिसर में कतार में रखे दो बिस्तरों पर इन दोनों वीर जवानों के पार्थिव शरीर लेटे हुए थे, जिनके सीने पर भारत की आन-बान और शान का प्रतीक 'तिरंगा' लिपटा हुआ था। उनके पैरों के पास सफेद और लाल फूलों के बड़े चक्र और जलती हुई अगरबत्तियाँ रखी थीं।**सैन्य छावनी |** दुनिया के सबसे ऊँचे और ठंडे युद्ध क्षेत्र, सियाचिन ग्लेशियर में शून्य से नीचे के तापमान और कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सेना के दो जुड़वां जैसे जांबाज सपूतों को आज पूरा देश नमन कर रहा है। सैन्य परिसर में कतार में रखे दो बिस्तरों पर इन दोनों वीर जवानों के पार्थिव शरीर लेटे हुए थे, जिनके सीने पर भारत की आन-बान और शान का प्रतीक 'तिरंगा' लिपटा हुआ था। उनके पैरों के पास सफेद और लाल फूलों के बड़े चक्र और जलती हुई अगरबत्तियाँ रखी थीं।
इस विदाई वेला में दोनों शवों के पास घुटनों के बल बैठीं परिवार की महिलाएँ और माताएँ असीम दुख से बिलख रही थीं। अपनी आँखों में आँसू लिए लेकिन सीने में एक गहरा गर्व छिपाए ये माताएँ अपनी संतानों के अंतिम दर्शन कर रही थीं। ताबूतों के दोनों ओर हरी बेरी टोपी पहने सेना के जवानों की दो कतारें खड़ी थीं, जिन्होंने अपने हाथ जोड़कर और सिर झुकाएर अपने इन जांबाज साथियों को अपनी मूक श्रद्धांजलि अर्पित की। पृष्ठभूमि में खड़े ग्रामीण और सैन्य ट्रक इस बात के गवाह थे कि इन बेटों की शहादत को यह कृतज्ञ राष्ट्र कभी नहीं भूलेगा।
> **नोट:** यह एक पूर्णतः काल्पनिक स्टोरी है। इस चित्र और कहानी का किसी वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है।
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इस विदाई वेला में दोनों शवों के पास घुटनों के बल बैठीं परिवार की महिलाएँ और माताएँ असीम दुख से बिलख रही थीं। अपनी आँखों में आँसू लिए लेकिन सीने में एक गहरा गर्व छिपाए ये माताएँ अपनी संतानों के अंतिम दर्शन कर रही थीं। ताबूतों के दोनों ओर हरी बेरी टोपी पहने सेना के जवानों की दो कतारें खड़ी थीं, जिन्होंने अपने हाथ जोड़कर और सिर झुकाएर अपने इन जांबाज साथियों को अपनी मूक श्रद्धांजलि अर्पित की। पृष्ठभूमि में खड़े ग्रामीण और सैन्य ट्रक इस बात के गवाह थे कि इन बेटों की शहादत को यह कृतज्ञ राष्ट्र कभी नहीं भूलेगा।
> **नोट:** यह एक पूर्णतः काल्पनिक स्टोरी है। इस चित्र और कहानी का किसी वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है।
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21/05/2026

पढ़ाई से कमजोर नहीं थे जनाब बस हालातो ने हमे ... ここ

काबिल होने से पहले कमाने पर मजबूर कर दिया. 😭😭🙏🙏😭

Manish Kumar

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