Pappu Kumar

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निजी घर के अंदर कथित जातिसूचक गाली पर SC/ST Act नहीं लगेगा, जब तक घटना “Public View” में न हो — सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court of India ने SC/ST Act से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कथित जातिसूचक शब्द किसी निजी घर के अंदर कहे गए हों और घटना ऐसी जगह न हुई हो जहां आम लोग देख या सुन सकें, तो इसे SC/ST Act के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।

📌 क्या है मामला?
मामले में आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के खिलाफ घर के अंदर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस आधार पर SC/ST Act के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। आरोपी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि कथित घटना किसी सार्वजनिक स्थान या “public view” में नहीं हुई थी।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख
अदालत ने कहा कि SC/ST Act के तहत अपराध बनने के लिए केवल जातिसूचक शब्द कहना पर्याप्त नहीं है। यह भी जरूरी है कि

घटना public view में हुई हो
यानी ऐसी जगह पर जहां अन्य लोग मौजूद हों या घटना को देख-सुन सकें
निजी घर के अंदर हुई कथित घटना अपने आप इस कानून के दायरे में नहीं आएगी

📜 कानूनी आधार
SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत अपमान या धमकी से जुड़े अपराधों में “public view” की शर्त महत्वपूर्ण है। अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय के लोगों को सार्वजनिक अपमान और सामाजिक उत्पीड़न से बचाना है, लेकिन इसके लिए घटना का सार्वजनिक रूप से घटित होना आवश्यक है।

📂 कोर्ट का निष्कर्ष
👉 कथित घटना निजी घर के अंदर हुई थी
👉 यह साबित नहीं था कि घटना सार्वजनिक नजर या सुनवाई में आई
👉 इसलिए SC/ST Act के तहत कार्रवाई जारी रखना उचित नहीं था

अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर मामले में दर्ज कार्रवाई को रद्द कर दिया।

📢 कानूनी महत्व
✔️ SC/ST Act में “public view” की शर्त को फिर स्पष्ट किया
✔️ निजी विवाद और सार्वजनिक अपमान के बीच अंतर बताया
✔️ आपराधिक कार्रवाई के लिए आवश्यक कानूनी तत्वों पर जोर

📚 Case Title: X v. State ( SC/ST Act – Public View Requirement, Supreme Court )

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