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02/05/2023

छिन्नमस्ता जंयती 2023
कब है छिन्नमस्ता जंयती
दस महाविद्या में छठा स्वरूप मानी जाने वाली मां छिन्नमस्ता की जयंती इस साल कब मनाई जाएगी और क्या है उनकी पूजा विधि और महत्व? देवी के इस दिव्य स्वरूप की पूजा के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़ें ये लेख.
मां छिन्‍नमस्‍ता की पूजा विधि एवं मंत्र

हिंदू धर्म में दस महाविद्या में से एक मां छिन्नमस्ता की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि देवी के इस दिव्य स्वरूप की पूजा करने पर साधक की मनोकामना बहुत जल्दी पूरी होती है। मां छिन्नमस्ता को माता काली का ही एक स्वरूप माना गया है। माता के भक्त उन्हें ‘छिन्नमस्ता’ या फिर ‘छिन्नमस्तिका’ के नाम से बुलाते हैं। बहुत से लोग उन्हें ‘प्रचण्ड चण्डिका’ के नाम से भी पूजते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार वैशाख मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि को माता की जयंती मनाई जाती है जो कि इस साल 04 मई 2023 को पड़ेगी। आइए मां छिन्नमस्ता की पूजा विधि और धार्मिक महत्व के बारे में जानते हैं।

मां छिन्नमस्ता की कथा
हिंदू मान्यता के अनुसार एक बाद माता पार्वती अपनी सहयोगी जया और विजया के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने के लिए जाती हैं, जहां पर उन्हें समय गुजरने का ध्यान नहीं रहता है। मान्यता है कि बहुत समय बीत जाने के बाद जब माता की सहयोगियों को भूख से तड़पने लगीं तो मांं पार्वती अपराधबोध हुआ और उन्होंने खुद अपना गला काट लिया, जिसके बाद उनके धड़ से तीन अलग-अलग खून की धाराएं निकलीं। जिसे पीने के बाद उनके सहयोगी जया और विजया की भूख शांत हुई। उस दिन के बाद से माता के कटे हुए सिर की पूजा की जाने लगी।

कहां है मां छिन्नमस्ता का धाम
हिंदू धर्म में सभी प्रकार के ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं से बचाने और सुख, संपदा और संतान का सुख दिलाने वाली मां छिन्नमस्ता देवी का पावन धाम झारखंड राज्य में रांची से तकरीबन 80 किमी की दूरी पर रजरप्पा स्थान पर है। तकरीबन 6000 साल से ज्यादा पुराना माता का यह मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। माता का यह मंदिर तंत्र-मंत्र की साधना के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।

मां छिन्नमस्तिका का मंत्र:-
शक्ति की साधना में मंत्र का बहुत ज्यादा महत्व है। ऐसे में छिन्नमस्ता जयंती के दिन देवी के इस दिव्य स्वरूप की पूजा करते समय उनके महामंत्र का जप जरूर करें। मां छिन्नमस्ता की पूजा का पुण्य फल पाने के लिए आप
‘ॐ हूं ॐ’ अथवा
‘ॐ वैरोचन्ये विद्महे छिन्नमस्तायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।। मंत्र का जप करके उनसे मनचाहा आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

14/04/2023

सूर्य ग्रहण एक दिवसीय साधना

यक्षिणी शाबर मंत्र साधना : एक दिवसीय यक्षिणी साधना

मित्रो के लिए में आज यहा यक्षिणी शाबर मंत्र साधना लेकर आया हु। पिंगला यक्षिणी की साधना और प्रमोदा यक्षिणी साधना दोनों साधना में आज आपको देने वाला हु दोनों की सिद्धि कैसे होती हे वो सब विधि आपको बताने वाला हु,
तो चलिए विस्तार से जानते हे यक्षिणी शाबर मंत्र साधना के बारे में और उसके विधि विधान के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे.
यक्षिणियाँ भी मनुष्येतर जाति की प्राणी हैं। ये यक्ष जाति के पुरुषों की पत्नियाँ हैं और इनमें विविध प्रकार की शक्तियाँ सन्निहित मानी जाती हैं। विभिन्न नामबारिणी यक्षिणियाँ विभिन्न शक्तियों से सम्पन्न हैं- ऐसी तान्त्रिकों को मान्यता है। अतः विभिन्न कार्यों की सिद्धि एवं विभिन्न अभिलाषानों को पूति के लिए तंत्र शास्त्रियों द्वारा विभिन्न यक्षिणियों के साधन की क्रियाओं का प्राविष्कार किया गया है । यक्ष जाति यूँकि चिरंजीवी होती है, अतः पक्षिणियाँ भी प्रारम्भिक काल से अब तक विद्यमान हैं और वे जिस साधक पर प्रसन्न हो जाती हैं , उसे अभिलषित वर अथवा वस्तु प्रदान करती हैं
पिंगला यक्षिणी साधना
मंत्र
............................

साधना विधि
अर्ध रात्री काल के उपरान्त इस मन्त्र का 50000 जप मन्त्र- जाप की संख्या पूर्ण हो जाने पर “पिंगला यक्षिणी’ प्रसन्न होकर साधक के पास आती है । उस समय निर्भय होकर सम्पूर्ण रात्रि उसके साथ समागम करे। स्थित न रहे तो वह प्रसन्न होकर साधक को इच्छित वस्तुएँ प्रदान करती है।
प्रमोदा यक्षिणी साधना
मंत्र................
साधना विधि
रात्रि को उठकर इस मन्त्र का प्रतिदिन 10000 जप करे। इस प्रकार एक मास तक साधन करने से ‘प्रमोदा यक्षिणी’ प्रसन्न होकर साधक को निधि प्रदान करती है ।
इस तरह साधक यक्षिणी शाबर मंत्र साधना करके यक्षिणी की सिद्धि हासिल कर सकता हे और अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकता है।

12/04/2023

साल का पहला सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल 2023, गुरुवार को लग रहा है. आईए जानते हैं सूर्य ग्रहण का समय, सूतक काल:-
20 अप्रैल 2023 गुरुवार को साल का पहला सूर्य ग्रहण सुबह 7 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर इसकी समाप्ति होगी. इस सूर्य ग्रहण की अवधि 5 घंटे 24 मिनट की होगी, हालांकि ये सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और न ही भारत में रहने वाले लोगों पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा. वैशाख अमावस्या पर इस बार एक ही दिन में तीन सूर्य ग्रहण दिखेंगे, जिसे वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड सूर्य ग्रहण का नाम दिया है

दोस्तों सूर्य ग्रहण मे वशीकरण मंत्र surya grahan vashikaran mantra हो या कोई और मंत्र उसका जाप करना बहुत अधिक प्रभावी होता है।और इसी वजह से सूर्य ग्रहण मे बहुत से लोग मंत्र का जाप करते हैं। कई सारे वशीकरण मंत्र ऐसे हैं जिनको आप सूर्य ग्रहण के अंदर जाप कर सकते हैं।

‌‌‌सूर्य ग्रहण के दिन कई प्रकार के टोटकों का भी प्रयोग किया जाता है।ऐसा माना जाता है कि यह इस दिन बहुत अधिक प्रभावी होते हैं।

सूर्य ग्रहण के दिन पके हुए भोजन मे कुश रखदेने से भोजन शुद्ध बना रहता है उस पर बुरा प्रभाव नहीं होता है।

‌‌‌सूर्य ग्रहण के समाप्त होने के बाद कुछ लोग शमी का पेड़ भी लगाते हैं ।ऐसा माना जाता है कि यह धन दौलत और घर के अंदर सुख शांति को लाने के लिए बहुत ही उपयोगी होता है।‌‌‌
इसके अलावा प्यापार और कैरियर के अंदर सफलता मिलती है।
शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य ग्रहण की अशुभ छाया से बचने के लिए आदित्य ह्दय स्तोत्र का जाप करना चाहिए.
जिनकी कुंडली में सूर्य ग्रह कूपित हो उन्हें इस दिन सूर्य अष्टकम स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
इससे सूर्य मजबूत होता है और व्यक्ति के आत्मविश्वास, मान-सम्मान, बल में वृद्धि होती है.
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी सूर्य ग्रहण के दौरान काफी उपयोगी माना जाता है। इससे नौकरी के अंदर तरक्की मिलती है।और यदि कोई नौकरी पहले से ही लगा है तो उसकी आय मे बढ़ोतरी होती है।
‌‌‌घर के अंदर सूर्य ग्रहण के दिन श्री यंत्र की स्थापना करना अच्छा माना जाता है।ऐसा करने से माता लक्ष्मी की क्रपा प्राप्त होती है और सुख संपति मिलती है।

‌‌‌जब सूर्य ग्रहण हो तो गेहूं चने और तिल को दान के लिए रख लेना चाहिए और उसके बाद जब ग्रहण पूरा हो जाए तो उसके बाद इनको किसी को दान मे दे सकते हैं।ऐसा करने से मान सम्मान मिलता है।

‌‌‌सूर्य ग्रहण के समय सभी को अपने ईष्ट देवता के मंत्र का मन ही मन जाप करना चाहिए और यदि आप बीज मंत्र का जाप करते हैं तो यह काम करेगा ।

‌‌‌आपको बतादें कि सूतककाल के अंदर स्नान करना जरूरी होता है।इसके अलावा स्नान करने के बाद ही देवताओं की पूजा करनी चाहिए ।
ग्रहण के दौरान आप दीपक जलाकर गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप निरंतर करते रहना चाहिए ।

जिस जातक की कुंडली में सूर्य उच्च हो तो उससे लाल वस्तुओं का दान नही करना चाहिए। ऐसे जातक अन्न, वस्त्र, फल, पीली मिठाई आदि का दान कर सकते हैं।

सूर्य ग्रहण के दौरान आपको किसी भी पौधे को नहीं छूना चाहिए और घर के खाने के अंदर आपको तुलसी के पत्ते डाल देना चाहिए ।

सूर्य ग्रहण वशीकरण मंत्र :-
आपको नीचे दिया गया वशीकरण मंत्र का 1008 जाप करना है।और फिर चार लौंग आपको लेने हैं और मंत्र का 108 बार अभिमंत्रित करें फिर उनको जिसको वश मे करना हो उनको खिलादें । ऐसा करने से प्रचंड़ वशीकरण होता है।
पू़री विधि दी गई है जिसको करना है वही मंत्र के लिए सम्पर्क करे मंत्र का दीक्षा शुल्क रहेगा हमारा संपर्क सूत्र व what's up no. है। 074049 49592

22/03/2023

तंत्र का वास्तविक अर्थ:-
भाग 1
सनातन धर्म में हजारों विद्याओं और साधनों का वर्णन मिलता है। साधनों से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। व्यक्ति सिद्धियां इसलिए प्राप्त करना चाहता है या तो वह सांसारिक लाभ प्राप्त करना चाहता है। या फिर आध्यात्मिक लाभ ।
मूल रूप से साधना के चार प्रकार माने जा सकते हैं जो इस प्रकार हैं।
1. तंत्र साधना
2. मंत्र साधना
3. यंत्र साधना
4. योग साधना
चारों ही साधना के अनेक उप प्रकार होते हैं। सवाल यह है कि तंत्र साधना क्या है। तंत्र विद्या साधना या तंत्र शास्त्र का नाम सुनते ही लोगों में भय उत्पन्न हो जाता है ।माना जाता है कि यह कोई भयानक विद्या या अघोरियों की साधना होगी लेकिन ऐसा नहीं है ।अघोर साधना अलग होती है । और तंत्र साधना अलग तंत्र मंत्र यंत्र में तंत्र को सबसे पहले रखा गया है। तंत्र एक रहस्यमई विद्या है।सनातन धर्म के साथ ही बौद्ध और जैन धर्म में भी इस विद्या का प्रचलन है

तंत्र विद्या के विशेष रहस्य:- तंत्र में शरीर महत्वपूर्ण है साधारण अर्थ में तंत्र तन से मंत्र का अर्थ मन से यंत्र का अर्थ किसी वस्तु या मशीन से होता है। तंत्र का एक अलग से अर्थ व्यवस्था से होता है तंत्र मानता है कि हम शरीर में हैं यह एक वास्तविकता है भौतिक शरीर ही हमारी सभी कार्यों का एक केंद्र है अतः इस शरीर को हर तरह से तृप्त और स्वस्थ रखना जरूरी है ।इस शरीर की क्षमता को बढ़ाना जरूरी है। इस शरीर से ही अध्यात्म को साधा जा सकता है। और योग भी यही कहता है आप यह नहीं जानते होंगे तंत्र का मांस मदिरा और संभोग का किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं है जो व्यक्ति इस तरह के घोर कार्य में लिप्त हैं वह कभी तांत्रिक नहीं बन सकते और तंत्र को इसी तरह के लोगों ने बदनाम कर रखा है तांत्रिक साधना का मूल उद्देश्य सिद्धि से साक्षात्कार करना है इसके लिए अंतर्मुखी होकर साधना की जाती है तंत्र उल्लेख ग्रंथों में है तंत्र को मूलतः शैव, आगम शास्त्रों से जोड़कर देखा जा सकता है लेकिन इसका मूल अर्थ अथर्ववेद में पाया जाता है तंत्र शास्त्र तीन भागों में विभक्त है
1.आगम तंत्र
2.यामल तंत्र
3.मुख्य तंत्र
आगम में शवागम, रूद्रागम, भैरवागम प्रमुख है।
वाराही तंत्र के अनुसार जिसमें सृष्टि ,प्रलय, देवताओं की पूजा, सत्य कर्म के साधन ,पुशचरण ,षट्कर्म साधना और चार प्रकार के ध्यान योग का वर्णन उसे आगम कहते हैं ।
जिसमें सृष्टि तत्व, ज्योतिष ,नित्यक्रम, सूत्र व भेद और युग धर्म का वर्णन हो उसे यामल कहते हैं ।
इसी प्रकार जिसमें सृष्टि, भय, मंत्र, निर्माण ,
तीर्थ आश्रम ,धर्म, कल्प, ज्योतिष संस्थान, व्रत कथा शोच-अशोच, स्त्री- पुरुष लक्षण ,राज धर्म ,दान धर्म ,युग धर्म, व्यवहार तथा आध्यात्मिक नियमों का वर्णन हो वह मुख्य तंत्र कहलाता है
वाराही तंत्र के अनुसार तंत्र के नौ लाख शलोको में से एक लाख श्लोक भारत में हैं तंत्र साहित्य विस्मृति के चलते विनाश और उपेक्षा का शिकार हो गया है अब तंत्र शास्त्र के अनेक ग्रंथ लुप्त हो चुके है।

आगे जानने के लिए जुड़े रहो Deep swami page से बाकी कल बताया जाएगा!

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