RSS INDIA
Bharat ko vishvguru Bnana Having identified this goal, the Sangh created a method of work in consonance with that ideal.
22/08/2016
Every organ of our body and our mind is filled with only one feeling- we must serve our Hindu society. We are sure that we have the blessings of God. We are determined to work for the protection of our nation, our dharma and our culture. There is absolutely no fault or sin in the goal that we have kept in our mind.
Since our work is for the entire Hindu society, we should never neglect or oppress any member of the society. We must behave with equal affection to all Hindu brothers, without any feeling of inferiority or superiority.
31/07/2016
मुंशी प्रेमचंद भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं। वे एक सफल लेखक, देशभक्त नागरिक, कुशल वक्ता, ज़िम्मेदार संपादक और संवेदनशील रचनाकार थे।
ग़रीबी से लड़ते हुए प्रेमचन्द ने अपनी पढ़ाई मैट्रिक तक पहुँचाई। जीवन के आरंभ में ही इनको गाँव से दूर वाराणसी पढ़ने के लिए नंगे पाँव जाना पड़ता था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य, पर्सियन और इतिहास विषयों से स्नातक की उपाधि द्वितीय श्रेणी में प्राप्त की थी। बाहर से बिल्कुल साधारण दिखने वाले प्रेमचन्द अन्दर से जीवनी-शक्ति के मालिक थे।
प्रेमचन्द ने शोषितवर्ग के लोगों को उठाने का हर संभव प्रयास किया। हिन्दी में प्रेमचंद की कहानियों का एक संग्रह बम्बई के एक सुप्रसिद्ध प्रकाशन गृह, हिन्दी ग्रन्थ-रत्नाकर ने प्रकाशित किया। यह संग्रह ‘नवनिधि’ शीर्षक से निकला और इसमें ‘राजा हरदौल’ और ‘रानी सारन्धा’ जैसी बुन्देल वीरता की सुप्रसिद्ध कहानियाँ शामिल थीं। उन्होंने गोदान जैसे कालजयी उपन्यास की रचना की जो कि एक आधुनिक क्लासिक माना जाता है। उन्हें अपने जीवन काल में ही उपन्यास सम्राट की पदवी मिल गयी थी। उन्होंने कुल 15 उपन्यास, 300 से कुछ अधिक कहानियाँ, 3 नाटक, 10 अनुवाद, 7 बाल-पुस्तकें तथा हज़ारों पृष्ठों के लेख, सम्पादकीय, भाषण, भूमिका, पत्र आदि की रचना की।
सन् 1931 के आरम्भ में ग़बन प्रकाशित हुआ था। 16 अप्रैल, 1931 को प्रेमचंद ने अपनी एक और महान रचना, कर्मभूमि शुरू की। यह अगस्त, 1932 में प्रकाशित हुई। प्रेमचंद के पत्रों के अनुसार सन् 1932 में ही वह अपना अन्तिम महान उपन्यास, गोदान लिखने में लग गये थे, यद्यपि ‘हंस’ और ‘जागरण’ से सम्बंधित अनेक कठिनाइयों के कारण इसका प्रकाशन जून, 1936 में ही सम्भव हो सका। अपनी अन्तिम बीमारी के दिनों में उन्होंने एक और उपन्यास, ‘मंगलसूत्र’, लिखना शुरू किया था, किन्तु अकाल मृत्यु के कारण यह अपूर्ण रह गया।
29/07/2016
RSS Swayamsevaks are helping people to get out of the Traffic Jam in Gurugram. Food, medicines and drinking water also were distributed to people.
28/07/2016
RSS Swayamsevaks reached in for rescue works after brook water entered houses at Mandali Area, Shivamogga, Karnataka.
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