NavDesign Porta Cabins

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Photos from NavDesign Porta Cabins's post 16/04/2026

Galvanized Steel Cargo Container with
1year Warranty.
Water-proof, air-tight.

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NavDesign Porta Cabins

03/04/2026

" बापाच्या जीवावर जगायला नशीब लागतं,
पण आपल्या जीवावर....
बापानं थाट करून मिरवायला खरं भाग्य लागतं.”
#बापपेज

02/04/2026

घर के सबसे आम अप्लायंसेज में से एक, फ्रिज के पीछे का यह विज्ञान वाकई कई लोगों को नहीं पता होता, और वे अनजाने में हर महीने अपने ही पैसों की बर्बादी कर बैठते हैं। हालांकि "दोगुना" बिजली पीना एक चरम स्थिति (Worst-case scenario) है, लेकिन बिजली की खपत में 30% से 50% तक का भारी उछाल बिल्कुल असली बात है!
इसके पीछे का असली विज्ञान और 'थर्मोडायनामिक्स' (Thermodynamics) की इंजीनियरिंग कुछ इस तरह काम करती है:

हीट एक्सचेंज का नियम (Heat Exchange): विज्ञान के अनुसार, फ्रिज असल में अंदर 'ठंडक' पैदा नहीं करता, बल्कि वह आपके खाने की 'गर्मी' को सोखकर उसे बाहर फेंकता है। यह काम फ्रिज के पीछे या नीचे लगी 'कंडेनसर कॉइल्स' (Condenser Coils) और उसका दिल यानी 'कंप्रेसर' (Compressor) करता है।

हवा का 'गला घोंटना' (Choking the Airflow): जब आप फ्रिज को दीवार से बिल्कुल सटाकर (चिपकाकर) रख देते हैं, तो बाहर निकली हुई उस भयंकर गर्मी को उड़ने (Dissipate होने) की जगह नहीं मिलती। हवा का संचार (Ventilation) रुक जाने से पीछे का हिस्सा एक 'ओवन' की तरह गर्म होने लगता है।

कंप्रेसर की 'ओवर-वर्किंग' (Compressor Overload): इस रुकी हुई भयंकर गर्मी की वजह से, मशीन को फ्रिज के अंदर का तापमान ठंडा रखने के लिए बहुत ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। जो कंप्रेसर थोड़ी-थोड़ी देर में रुककर आराम करता है, वह बिना रुके घंटों चलता रहता है। इससे न सिर्फ आपका बिजली का बिल आसमान छूने लगता है, बल्कि बार-बार ओवरहीट होने से आपके महंगे फ्रिज की लाइफ (उम्र) भी आधी हो जाती है!

असली उपाय: हमेशा अपने फ्रिज और दीवार के पीछे कम से कम 2 से 4 इंच (5-10 सेंटीमीटर) की दूरी जरूर छोड़नी चाहिए, ताकि मशीन खुलकर "सांस" ले सके!

02/04/2026

पिताजी के जाने के बाद…
ज़िंदगी अचानक बड़ी नहीं होती,
बल्कि जिम्मेदारियाँ अचानक भारी हो जाती हैं।

वो छत, जो हर तूफान से बचाती थी,
एक दिन खामोशी से हट जाती है…
और तब समझ आता है कि “बाप” होना क्या होता है।

सच तो ये है
उनके जाने का दर्द सिर्फ उनकी कमी का नहीं होता,
बल्कि अपनों के बदलते व्यवहार का भी होता है।
जो कभी अपने लगते थे,
वही धीरे-धीरे पराये लगने लगते हैं…
और तब दिल पूछता है
जब अपनों में अपनापन ही ना रहे,
तो फिर किस काम के अपने…?

पहले हर परेशानी में एक सुकून था
“पापा हैं ना…”
आज वही परेशानी सामने होती है,
लेकिन वो सुकून कहीं खो चुका होता है।
पिताजी के जाने के बाद
आँसू कम और खामोशी ज़्यादा होती है…
क्योंकि इंसान रोना नहीं,
अंदर ही अंदर सब सहना सीख जाता है।
लेकिन इसी सच्चाई में एक ताकत भी छुपी होती है
उनकी दी हुई सीख, उनका संघर्ष,
और उनका वो भरोसा,
जो आज भी हमें टूटने नहीं देता।
शायद इसलिए…
पिताजी चले जाते हैं,
पर उनका हौसला कभी नहीं जाता। ❤️
#बापपेज

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