Aniket
���कलमकार��� कविता नही भावना लिखता हूँ।
05/08/2023
हम तुम्हें खोजते,
नही तो करते क्या ?
हमने जाना तभी
ज्यों तुमसे मिलना हुआ
कि हृदय के किसी
कौने में जीवित है
प्रेम।
23/07/2023
स्वयं की तलाश है।
निज प्राण की आहुतियां चल रही निज प्राण में
सुख समूचे है समिधा, होम है लोचन का जल
रथ व्यथा का मैं लिए और सारथी है स्वप्न सब
ढूंढने निकला हूं मैं तुमको अखिल ब्रह्मांड में
@अनिकेत दुबे "गुरुजी"
बसंत के संयोग से लेकर
पतझड़ के वियोग तक
का क़िस्सा है बरसात का मौसम
गौर करो तो पाओगे
कितनी वेदना है गरजने है
तड़कती हुई दामिनी
उदाहरण है टूटते
संबंध की
कभी झर लगाकर
बरसने लगती है
जैसे बरस रहे हो
किसी वियोगी के नैन
कभी बरसती है रुक रुक कर
जैसे छुपा रही हो अपनी पीड़ा
पर नयन छलकजाते है
नदियां उफान पर होती है
जैसे वेदना की बाढ़ आ ही गई हो।
बढ़ने लगता है जलाशयों का स्तर
जैसे बढ़ती है पीड़ा धीरे धीरे।
ये बरसात प्रेम में वियोग की
पहचान है।
जो बताती है प्रेम में वियोग
की कहानी
और बरसने लगती है नयन से।
टप टप टप
@अनिकेत दुबे "गुरुजी"
21/06/2023
भाल चंदन सोहे अभिमान है,
शिखा बामन को होए विधान है।
17/06/2023
आदिगुरु भगवान शंकर के आदेश पर माता शारदा एवम् जगतपिता भगवान भूतनाथ की सेवा की सेवा के अत्यंत मंगल अवसर पर आप सभी सादर आमंत्रित है के अनावरण समारोह में यह संस्था गुडवर्क का अहोभाग्या है की संस्था अब भगवती माई की सेवा में लग गई है, एक संस्थापक एवम् अध्यक्ष के रूप में इससे गर्व की क्या बात हो सकती है की स्वयं बाबा महाकाल एवम् माता भगवती की सेवा का नित्य अवसर मिले।
vikashshukl
05/06/2023
ये आंखों बंजर हो गई, ख़्वाब संजोए जो हमनें,
भरी बरसात में भी हम, बूंद बूंद पानी को तरसे।
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