Manish Kumar
I am a Social worker ,working for Poor Child education.
10/08/2025
आख़िरी ख़त
राहुल और प्रिया कॉलेज में पहली बार मिले थे।
पढ़ाई के दिनों में उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।
बारिश के दिनों में एक ही छतरी, लाइब्रेरी में चुपके से किताब के पन्नों के बीच चॉकलेट,
और स्टेशन पर आख़िरी ट्रेन तक बातें करना—ये सब उनकी यादों का हिस्सा बन गया।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
प्रिया के घर वालों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी।
राहुल ने बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रिया ने सिर्फ़ इतना कहा—
"प्यार सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं है… कभी-कभी किसी को दूर से खुश देखना भी प्यार होता है।"
शादी के दिन, राहुल स्टेशन पर बैठा था।
जेब में एक छोटा-सा लिफ़ाफ़ा था—उसका आख़िरी ख़त।
उसने ख़त में लिखा था—
"प्रिया, मैं तुम्हें कभी खोना नहीं चाहता था, लेकिन तुम्हारी ख़ुशी मेरे प्यार से बड़ी है।
जब भी बारिश होगी, समझ लेना, मैं तुम्हारे पास हूँ… बस नज़र नहीं आता।"
बरसों बाद, प्रिया अपने बच्चों के साथ बारिश में खड़ी थी।
उसने आसमान की तरफ़ देखा, होंठों पर हल्की मुस्कान और आँखों में आँसू थे…
क्योंकि उसे पता था, राहुल ने अपना वादा निभाया है।
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