Prism Tutorials
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01. भारत में रेल लाइन बिछाने का श्रेय किसे प्राप्त है?
उत्तर-लार्ड डलहौजी
02. भारत में रेलवे जोनों तथा रेलवे डिवीजनों की संख्या कितनी हैं?
उत्तर-17 रेलवे जोन तथा 67 डिवीजन
03. भारतीय रेलवे का स्थायी शुभंकर क्या हैं?
उत्तर-भोलू ( गार्ड के रूप में गज, हरी बत्ती वाली लालटेन उठाए )
04. भारत में सबसे पहली ट्रेन कब और कहाँ चली थी?
उत्तर-16 अप्रैल, 1853 को, मुम्बई एवं ठाणे के मध्य
05. भारतीय रेलवे में सबसे बड़ी आमदनी का जरिया क्या हैं?
उत्तर- माल भाड़ा
06. भारतीय रेलवे का प्रशासन व संचालन किसके पास हैं?
उत्तर- रेलवे बोर्ड
07. भारतीय रेलवे में लगभग कितने लाख नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं?
उत्तर- 13.28 लाख नियमित कर्मचारी
08. भारत में कर्मचारियों की भर्ती हेतु कितने रेलवे भर्ती बोर्ड हैं?
उत्तर- 19
09. रेलवे बजट को सामान्य बजट से किस वर्ष अलग किया गया?
उत्तर-1924 में
10. भारत में भूमिगत रेल कहाँ चलती हैं?
उत्तर-कोलकाता, दिल्ली व बंगलुरू
भारत सल्तनत काल के वंश और संस्थापक क्रमानुसार
(Trick)
मध्यकालीन भारत के सल्तनत काल के वंश क्रमानुसार
TRICK-"गुल खिले तुम शायद लोगे"
1.गुल - गुलाम वंश(1206-1290)
2.खिले - खिलजी वंश(1290-1320)
3.तुम - तुगलक वंश(1320-1398)
4.शायद -सैय्यद वंश(1398-1451)
5.लोगे -लोदी वंश(1451-1526)
इन वंशो के संस्थापक क्रमानुसार-
TRICK-"कुमारी जरीना गोरी ने खिर बनाई"
1.कुमारी-कुतुबुद्दीन ऐबक (गुलाम वंश)
2.जरीना-जलालुद्दीन खिलजी (खिलजी वंश)
3.गोरी-गयासुद्दीन तुगलक (तुगलक वंश)
"ने-silent"
4.खिर-ख़िज्र खाँ (सैय्यद वंश)
5.बनाई-बहलोल लोदी (लोदी वंश)
बाबर के द्वारा लङे गए प्रमुख युद्ध
TRICK-"पान खा घर चल"
1.पान - पानीपत का प्रथम युद्ध
2.खा - खानवा का युद्ध
3.घर - घाघरा का युद्ध
4.चल - चन्देरी का युद्ध
*Economics** क्या आप जानते हैं?
=>तेजड़िया और मंदड़िया
=>तेजड़िया :-
- शेयर बाजार के हालात बताते समय इन शब्दों का प्राय इस्तेमाल होता है. जो व्यक्ति स्टॉक की कीमतें बढ़ाना चाहता है उसे तेजड़िया कहते हैं.
=>मंदड़िया :-
जो व्यक्ति स्टॉक की कीमतें गिरने की आशा जताकर किसी वस्तु को भविष्य में देने का वायदा करके बेचता है उसे मंदड़िया कहते हैं.
व्यापारिक फसलें"
०--० व्यापारिक फसल या वाणिज्यिक फसल (cash crop). उन फसलों को कहते हैं कमाई के लिए ही उगाई जाती हैं.
०--० किसान जिन्हें बेचकर धन कमाना चाहता है. किसान ऐसी फसलों के अधिकांश हिस्से को बेचता है.
०--० इनमें मूंगफली, सरसों, तिल, अलसी, अरण्डी व सूर्यमुखी, गवार जैसी तिलहनी फसलों के साथ साथ गन्ना, चुकंदर, जूट, मेस्टा, सन, कपास, तम्बाकू, चाय आदि को शामिल किया जा सकता है.
०--० अब फल सब्जियों की फसलों को भी इसमें रखा जा सकता है.
०--० मोटे तौर पर यह वे फसलें होती हैं जिन्हें आसानी से बाजार में बेचा जा सकता है. जैसे नरमा कपास, गेहूं, धान, गवार आदि.
- इसके अलावा किसान आमतौर पर इन फसलों को पशुओं के चारे आदि के लिए इस्तेमाल नहीं करता. यानी इन्हें सिर्फ बेचने के लिए ही उपजाई जाती हैं.
०--० हालांकि इसके उपउत्पादों का इस्तेमाल वह कर सकता है. जैसे गवार के बीज बाजार में बेचे जाते हैं जबकि उसकी तूड़ी, नीरे का इस्तेमाल किसान अपने पशुधन के लिए कर सकता है.
असफलता का डर (Fear of Failure).
क्या जरुरत है ये सोचने की :-"कहीं ऐसा न हो जाये",
क्योँ न आज से ये सोचें :- "ज्यादा से ज्यादा क्या होगा".
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मित्रों पहले समझते हैं डर को और इसके दुष्परिणाम को, इस डर ने हमें कितना खोखला बना दिया है, देखते हैं ......
1) हमें तैरने में डर लगता है, कहीं डूब न जाएँ - इसलिए आजतक हमें तैरना नहीं आया.
2) हमें पढ़ाई से डर लगता है, कहीं fail न हो जाएँ - इसलिए आजतक हम अच्छे student नहीं बन पाये.
3) हमें office में नये तरीके को आजमाने में डर लगता है, कहीं Boss नाराज न हो जाए - इसलिए हम बहुत अच्छे employee नहीं बन पाए.
4) हमें कार, स्कूटर चलाने में डर लगता है, कहीं accident न हो जाए - इसलिए हमें आजतक कार, स्कूटर चलानी नहीं आई.
5) हमें स्कूल, कॉलेज, ऑफिस के function में stage में आने में डर लगता है, कहीं लोग मजाक न उड़ाएं - इसलिए आजतक हर function में हम छिप कर बैठते हैं.
6) हमें खाना बनाने या खाने में नया experiment करने में डर लगता है, कहीं ख़राब बन गया तो घरवाले क्या कहेंगे - इसलिए आजतक हमने खाने में कुछ नया नहीं सीखा.
7) हमें competitive exam देने में डर लगता है, कहीं fail हो गए तो लोग क्या कहेंगे - इसलिए आजतक अच्छी नौकरी की तलाश कर रहे हैं.
8) कोई नया काम या business करने में डर लगता है, कहीं पैसा डूब गया तो - इसलिए आजतक सारे business plan दिमाग में ही धक्के खा रहे हैं.
9) किसी भी काम में risk लेने का डर, कहीं काम ख़राब हो गया तो मेरे पीछे मेरे बीबी, बच्चों का क्या होगा - इसलिए आजतक कभी risk ही नहीं लिया.
10) हम खेलेंगे नहीं या अपने बच्चे को खेलने नहीं भेजेंगे, क्योँकि कहीं चोट न लग जाये - इसलिए न खुद और न हमारा बच्चा अच्छे खिलाडी हैं.
11) मित्रों इसी तरह के हजारों प्रश्न हमारे दिमाग में चलते रहते हैं ......
सार :- मित्रों इस डर की वजह से अपनी जिंदगी में "अपने सोचे हुए काम न कर पाना जन्म देता है - अपने अंदर धीरे धीरे उठते हुए तूफान को", जो एक दिन निराशा (frustration) में तब्दील हो जाता है, जिससे आगे चलकर हम चीड़-चिड़े हो जाते हैं और धीरे धीरे हर किसी से अपने को काटने की कोशिस करते है और कई बार तो हम Depression में भी चले जाते हैं.
मित्रों अब ऊपर वाले examples में सबसे पहले मन में सोचिये कि सबसे ज्यादा बुरा क्या होगा.
हम ये सोचने की जगह कि " कहीं ऐसा न हो जाये", अगर हम ये सोचेंगे कि "ज्यादा से ज्यादा क्या होगा" तो मानिये मित्रों हम कभी भी निराश नहीं होंगे, देखते है कैसे :-
1) ज्यादा से ज्यादा हम वाकई डूब जायेंगे.
2) ज्यादा से ज्यादा हम वाकई क्लास में fail हो जायेंगे.
3) ज्यादा से ज्यादा Boss हमें नौकरी से निकाल देगा.
4) ज्यादा से ज्यादा हमारा सही में accident हो जायेगा.
5) ज्यादा से ज्यादा लोग हमारा मजाक ही तो उड़ाएंगे.
6) ज्यादा से ज्यादा लोग हमारे बनाये खाने की बुराई ही तो करेंगे.
7) ज्यादा से ज्यादा हम Competitive exam में fail हो जायेंगे.
8) ज्यादा से ज्यादा हमारा सारा पैसा डूब जायेगा.
9) क्या कभी हमारे परदादा ने risk नहीं लिया, उन्होंने अगर कभी Risk लिया तो क्या पूरा खानदान खत्म हो गया, नहीं न .....
10) ज्यादा से ज्यादा हमें चोट ही तो लगेगी.
सार :- मित्रों ज्यादा से ज्यादा सोच लेने से कोई ज्यादा से ज्यादा थोड़े ही हो जाता है, पर हमारे अंदर का डर खत्म हो जाता है क्योँकि हम ज्यादा से ज्यादा worst के लिए तैयार हो जाते हैं और उस काम को करने की शुरुआत हो जाती है. बस मित्रों पहले कदम ही की तो जरुरत है जिंदगी चलाने के लिए..हमें सिर्फ और सिर्फ अपने सोचने के अंदाज को बदलना है, फिर देखिये हमारी जिंदगी कैसे चमत्कार करती है.
मित्रों आज 12 जनवरी, स्वामी विवेकानंद जी का जन्मदिन, National Youth Day भी है.
अपना भारत देश बहुत ही युवा देश है. हमारी 65% जनसंख्या 25 वर्ष से कम आयु की है और आजकल कम उम्र के बच्चों में depression वाली बहुत समस्याएँ सुनने को मिलती हैं, इसलिए हमें चाहिए कि हम लोग मिलकर हमेशा उनकी हौसला अफजाई करते रहें, क्योँकि इसी युवा पीढ़ी ने अपने भारत को एक नयी ऊंचाइयों तक ले कर जाना है, बुजुर्गों के आशीर्वाद और Experience के साथ साथ.
विवेकानंद जी ने भी कहा था :-
Stand Up, Be Bold, Be Strong ......
Strength is Life, Weakness is Death.
मित्रों क्या जरुरत है ये सोचने की :-
"कहीं ऐसा न हो जाये",
क्योँ न आज से ये सोचें :-
"ज्यादा से ज्यादा क्या होगा".
20/01/2016
Basic Geography** Environment*लगभग प्रत्येक एग्जाम में पूछे जाते हैं इनसे प्रश्न)
=>"पृथ्वी पर जलवायु प्रदेश"
=>उष्ण कटिबंध क्षेत्र क्या है?
- सौर मंडल की वर्तमान व्यवस्था में पृथ्वी पर सूर्य की किरणें विषुवत रेखा से लेकर उत्तर में कर्क रेखा तक और दक्षिण में मकर रेखा तक लंब रूप में पड़ा करती हैं। अतः इन रेखाओं का मध्य क्षेत्र उष्ण कटिबंध में पड़ता है।
=>शीतोष्ण कटिबंध क्षेत्र :-
मकर रेखा से अंटार्कटिक रेखा तक और कर्क रेखा से आर्कटिक रेखा तक के क्षेत्र शीतोष्ण कटिबंध में पड़ता हैI
=>शीत कटिबंध क्षेत्र :-
जबकि आर्कटिक रेखा से उत्तरी ध्रुव तक तथा अंटार्कटिक रेखा से दक्षिणी ध्रुव तक का क्षेत्र शीत कटिबंध में पड़ता है।
***वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पृथ्वी पर मुख्यतः सात जलवायु प्रदेश पाये जाते हैं, जिन सबको कई उप भागों में भी वर्गीकृत किया जा सकता है।
ये सात मुख्य जलवायु निम्नलिखित हैं ––
१. टुंड्रा जलवायु : पृथ्वी पर 65 डिग्री से 90 डिग्री अक्षांशों के बीच उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुव में यह जलवायु पायी जाती है।
- मुख्यतः उत्तरी कनाडा, युरेशिया के आर्कटिक क्षेत्र और अंटार्कटिक क्षेत्र में इस तरह की जलवायु मिलती है।
०-० गरमी की ऋतु यहां बहुत छोटी और जाड़े की ऋतु लंबी होती है। गरमी में तापमान मात्र 10 डिग्री सेल्सियस और जाड़े में औसतन 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तक तापमान चला जाता है।
०-० जाड़े की ऋतु में सूर्य के नहीं निकलने से यहां रात रहा करती है। जाड़े में बर्फ की आंधी चला करती है।
०-० वर्षा कम होती है और जो भी होती है, हिमपात के रूप में।
Note:- बर्फ से ढके रहने के कारण यहां वनस्पति प्रायः नहीं पायी जाती है।
२. शीतोष्ण जलवायु : यह जलवायु उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्ध में 25 डिग्री से 60 डिग्री अक्षांशों के बीच पायी जाती है।
०-० पश्चिमी यूरोपीय देश, उत्तरी कैलिफोर्निया, दक्षिणी चिली, न्यूजीलैंड, टासमानियां आदि जगहों पर यह जलवायु समशीतोष्ण किस्म की है, जबकि महादेशों के पूर्वी भाग में कर्क रेखा के उत्तर और मकर रेखा के दक्षिण में गरम शीतोष्ण और चीनी जलवायु किस्म की जलवायु मिलती है।
०-० ठीक इसके पश्चिम में महादेशीय किस्म की और उसके बाद ध्रुवीय प्रदेश की ओर शीतोष्ण किस्म की जलवायु पायी जाती है।
०-० किस्म–किस्म के कोणाधारी वन इन क्षेत्रों में पाये जाते हैं। जिनके पत्ते जाड़े में प्रायः झड़ जाते हैं।
३. भूमध्यसागरीय जलवायु : औसतन 30 डिग्री से 45 डिग्री अक्षांशों के बीच उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में मुख्यतः भूमध्यसागरीय तट, दक्षिणी कैलिफोर्निया, दक्षिणी आस्ट्रेलिया, नेटाल, उत्तरी चिली आदि जगहों पर यह जलवायु पायी जाती है।
०-० हालांकि, यहां की जलवायु समशीतोष्ण किस्म की ही है, लेकिन गरमी की ऋतु शुष्क और जाड़े की ऋतु वर्षावाली होती है।
०-० इस क्षेत्र की दूसरी विशेषता यह है कि यहां विभिन्न प्रकार के फलों के छोटे–छोटे पेड़ पाये जाते हैं।
४. उष्ण मरूस्थलीय जलवायु : औसतन 20 डिग्री से 35 डिग्री अक्षाशों के मध्य उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्ध में महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर यह जलवायु पायी जाती है।
०-० सहारा, कालाहारी, पश्चिमी आस्ट्रेलिया, थार, कोलेरेडो, आटाकामा, अरब आदि क्षेत्रों में यह जलवायु मिलती है।
०-० गरमी में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। दैनिक तापांतर अधिक रहने से चट्टानों का विखंडन यहां अधिक होता है।
०-० नाममात्र की वर्षा होने से वनस्पति यहां प्रायः नगण्य है।
५. मानसूनी जलवायु : भारत, बांगलादेश, मियांमार, दक्षिणी चीन, फिलिपीन आदि क्षेत्रों में यह जलवायु पायी जाती है।
०-० वर्षा यहां अधिकतर पर्वतीय किस्म की होती है, जो मुख्यतः मानसून काल में ही होती है।
०-० अधिक वर्षा और अधिक गरमी रहने के कारन यहां पतझड़ वन पाये जाते हैं।
६. सवाना जलवायु : विषुवतरेखीय क्षेत्र में महाद्वीपों के पूर्वी भाग में वर्षा अपेक्षाकृत कुछ कम होती है, फलतः सवाना जलवायु पायी जाती है।
०-० विषुवतीय क्षेत्र में रहने के कारण यहां जाड़ा नहीं पड़ता है।
०-० इस जलवायु में बड़े पेड़ कम और घास अधिक पायी जाती हैं।
७. विषुवतरेखीय जलवायु : 0 डिग्री से 10 डिग्री उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के मध्य महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में यह जलवायु पायी जाती है।
०-० सालभर उच्च तापमान यहां रहता है। यहां जाड़ा नहीं पड़ता है।
०-० वर्षभर संवहनीय वर्षा से 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा हो जाती है।
०-० यही कारण है कि यहां घने, लंबे और सदाबहार वन पाये जाते हैं।
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