IPTA Rajasthan
Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from IPTA Rajasthan, Performing Arts, 73, piyush path, Jaipur.
13/12/2024
*प्रसिद्ध रंगकर्मी रणबीर सिंह की याद में 1-3 दिसंबर तक " रंग-रणबीर स्मृति नाट्य उत्सव खेला का आयोजन किया गया*
जयपुर। संस्था "इप्टा जयपुर" द्वारा प्रसिद्ध रंगकर्मी रणबीर सिंह की याद में 1 से 3 दिसंबर तक " रंग-रणबीर स्मृति नाट्य उत्सव खेला रविन्द्र मंच के स्टूडियो थिएटर में खेला गया । जिसका उद्घाघाटन राजस्थान के प्रसिद्ध वरिष्ट नाट्य निर्देशक , राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व छात्र रहे,एवं राजस्थान विश्वविद्यालय के ड्रामा डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी रहे डॉ रवि चतुर्वेदी ने इस समारोह का उद्धघाटन किया तथा स्व रणबीर सिंह के व्यक्तिव एवं कृतित्व पर अपने विचार रखे।जिनका रणबीर सिंह के साथ रहने का एक बहुत लंबा अनुभव है।
स्व. रणबीर सिंह प्रदेश के जानेमाने नाट्य रंगकर्मी के साथ लेखक, इतिहास कार भी थे।उन्होंने कई नाटकों का लेखन तथा कई नाटकों रूपांतरण भी किया।साथ ही राजस्थान के रंगमंच में योगदान को बडे रूप में देखा जाए तो एक लंबी सूची है। शुरआती दौर में रविन्द्र मंच के मैनेजर रहे उसके बाद राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के दो बार उपाध्यक्ष रहे। इसके बाद मोरोशिश सरकार के सांस्कृतिक सलाहकार भी रहे।नाट्य अध्ययन के लिए कई वर्षों तक रूस,जर्मनी,फ्रांस,इंग्लैंड,अमेरिका, बांग्लादेश,नेपाल,लेटविया,अर्जेंटीना,इत्यादि देशों में यात्रा की। आज भी उनका प्रसिद्ध नाटक "हाय मेरा दिल" के शो देश में 2000 अधिक नाट्य मंचन हो चुका है जो कि एक रिकॉर्ड है। दर्जन से आदि नाटकों का लेखन किया है पारसी रंगमंच पर बहुत बड़ा काम किया है जो उल्लेखनीय है। जयपुर के "मॉडर्न थिएटर" ग्रुप की स्थापना का श्रेय उनको जाता है। संस्कृत नाटकों पर शोध किए। इनसाइक्लोपीडिया पीडिया ऑफ वर्ल्ड एंड एशियन थिएटर पर किताब लिखी। थिएटर कोट्स पर बुक लिखी ।रॉयल एशियाटिक ऑफ द ग्रेट बिर्टेन एंड आयरलैंड के फैलो रहे।इतिहास में उन्होंने " द हिस्ट्री ऑफ शेखावत, रणथंभोर फोर्ट,वंशावली ऑफ द रूलर्स ऑफ आमेर एंड जयपुर,हिस्ट्री ऑफ पृथ्वी राज ख्यात,इत्यादि किताबों पर शोध कर किताबें लिखी। 1985 में राजस्थान में "इप्टा" की स्थापना की तथा राजस्थान के प्रथम अध्यक्ष बने। 2012 में राष्ट्रीय इप्टा के अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में जयपुर के जवाहर कला केंद्र के लिए संविधान बनाने में बहुत बड़ा योगदान रहा।92 में राष्ट्रीय इप्टा का अधिवेशन कराने में बड़ा योगदान था जिसमें देश के जाने माने रंगकर्मी, साहित्यकार,लेखक,पेंटर इत्यादि जयपुर के रविन्द्रमंच पर चार दिन तक इकट्ठे हुए। अनेकों विद्यार्थी जयपुर रंगमंच के लिए तैयार किए। कई वर्षों तक राजस्थान विश्वविद्यालय के ड्रामा डिपार्टमेंट में गेस्ट फैकल्टी के रूप में सेवाएं देते रहे। उनका लिखा अंतिम नाटक "अमृत जल" का स्वयं निर्देशन किया हुआ "ओम शिवपुरी नाट्य समारोह में मंचन किया। ऐसे अनेकों कार्यों की एक लंबी फेहरिस्त है और ऐसे अनेकों अनगिनत काम है जिनको संग्रह किया जा रहा है जो अभी तक सामने नहीं आए हैं। उनके महत्वपूर्ण योगदान को कला जगत में रंगमंच पर और इतिहास में न नकारा नही जा सकता है।
अध्यक्ष संजय विद्रोही ने बताया कि इनके 70 साल तक निस्वार्थ भावना से किए गए कला जगत इस महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए राजस्थान सरकार व भारत सरकार को एक ज्ञापन देगी जिसमें इनको मरणोपरांत पश्चात *केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी और पदम श्री अवॉर्ड से नवाजा जाए।* इसके लिए पूरे प्रदेश एक अभियान चलाया जाएगा।
संस्था इप्टा जयपुर ने स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिए प्रतिवर्ष " *रंग- रणबीर स्मृति नाट्य उत्सव भी किया* जाएगा, जिससे नए युवा नाट्य निर्देशकों को एक प्लेटफॉर्म प्रदान हो सके।
इस अवसर पर 01 दिसंबर को विभांशु वैभव लिखित तथा अभिषेक मुद्गल द्वारा निर्देशित "महारथी" नाटक खेला गया। नाटक महारथी ,सूर्य पुत्र कर्ण के जीवन पर आधारित नाटक वर्तमान समाज में व्याप्त जातिवाद और असमानता पर तीखा प्रहार किया गया है । नाटक देखने पर समाज को यह संदेश देता है कि समाज के कोई भी व्यक्ति की काबिलियत और उसके किए निरंतर संघर्ष को जाति और उसके स्थिति के आधार पर न परखा जाए। जिस तरह से वर्तमान समाज में आपस में जातियों को बांटकर,भेदभाव फैलाकर, शूद्र और नीच समझने का प्रचलन,आदि तरीकों से समाज के व्यक्ति का मूल्यांकन किया जाता है ,यह नाटक देश के सामने कई प्रश्न खड़े करता है। निर्देशक ने बेहतरीन तरीके से इस नाटक को डिजाइन करके तथा अभिनेताओं ने शारीरिक अंग संचालन का प्रभाव प्रस्तुत कर नाटक के दर्शकों को स्थिर भाव से बांधे भी रखता है। दूसरी ओर प्रकाश व संगीत संयोजन का सुंदर तकनीकी समावेश नाटक को और भव्य बना देता है ।निर्देशक ने फिजिकल फॉर्म में कलाकारों द्वारा कल्लरिपयुटु और छउ नृत्य के मूवमेंट्स का प्रयोग कर नाटक के प्रत्येक दृश्य को रोचक बनाया है।
02 दिसंबर को दूसरा नाटक डॉ शंकर शेष लिखित तथा हेमराज सिंह व विशाल द्वारा निर्देशित "फंदी" नाटक खेला गया। यह नाटक पिछले 50 सालों से देश के कोने कोने में अलग अलग भाषाओं में इसका मंचन किया जा रहा है। वैसे तो तीन पात्रों का नाटक है और कथ्य और शिल्प की दृष्टि से देखा जाए तो प्रयोगशील नाटक है लेकिन इप्टा जयपुर द्वारा नए तरीके से अभिव्यक्त करने की कोशिश की।इस नाटक में फंदी द्वारा अभिनीत किए गए कई पात्रों को निर्देशक हेमराज और विशाल ने 9 पात्रों को वास्तविक रूप से मंच प्रदान किया है। नौ पात्रों को अभिनय कराने से नाटक का मानवीय पक्ष बहुत और मजबूत तरीके से उभर कर आता है।दोनो नए निर्देशकों ने कलाकारों के साथ बहुत ही में उम्दा मेहनत की है ।
नाटक 50 साल पहले लिखा गया था तभी से समाज के समक्ष "इच्छा मृत्यु" पर विचार करने के लिए कहता आया है,लेकिन आज भी सवाल ज्यों का त्यों ही खड़ा है। क्या कानून मनुष्य के लिए है..? या मनुष्य, कानून के लिए है। क्या समाज में " इच्छा मृत्यु " पर बात होनी चाहिए..? ऐसे कई अनगिनत सवाल कानून के नियमों को मानवीय संवेदनाओं के स्तर रखकर नए सिरे से परिभाषित करने की क्या आज जरूरत है..? नाटक का पात्र फंदी अपने बीमार कैंसर से पीड़ित पिता के इलाज करा पाने के के दौरान घर,जमा पूंजी सब बिक जाते है, पत्नी और बच्चे छोड़कर चले जाते है,रिश्ते नाते अनजान बन जाते है फिर भी पिता को होने वाला दर्द ज्यादा और लगातार बना रहता है ।अंत में बेटा हार जाता है और पिता की इच्छा के अनुसार अपने पिता का गला घोंट देता है।
नाटक आज भी यह सवाल उठाता है कि आजादी की बाद भी एक आम आदमी के लिए महंगी होती मेडिकल सुविधाएं, सरकारी मेडिकल सुविधाएं सब खोखली और झूठे वायदे नज़र आते है। आज भी यह तमाम सुविधाएं सरकारी कागजों पर होती है लेकिन धरातल पर दूर दूर तक आम आदमी से आज भी दूर है।
समाज के बदलते हुए परिवेश में निर्देशक/लेखक, समाज और सरकार से यही पूछना चाह रह है कि कानून के नियमों को परिस्थितियों के अनुसार क्या नहीं बदलना चाहिए..?
नाटक में कलाकारों ने उम्दा अभिनय किया है।मंच सज्जा ने प्रभावित किया।
और तीसरे अंतिम दिन अंतिम प्रस्तुति 0,3 दिसंबर को डॉ शंकर शेष लिखित तथा विशाल द्वारा निर्देशित "आधी रात के बाद" नाटक खेला गया। नाटक में लेखक ने सामाजिक मुद्दे, भू अधिग्रहण, काला बजारी, गरीबी,न्याय व्यवस्था पर कटाक्ष किया है।
समाज के अंदर आज भी आम आदमी, न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया में उलझने से दूर भगाता है, क्योंकि उम्मीद की किरण उसे धुंधली नजर आती है जटिल और पक्षपाती होने के कारण प्रभुत्व वर्ग अपनी गलतियों से बच जाता है तथा गरीब और असहाय व्यक्ति हमेशा पिसता रहता है।
नाटक "आधी रात के बाद" में चोर जो कि समाज के असल अपराधी को पत्रकार की हत्या का राज बताने जज के घर में घुसता है। उसे पता है उसने इसका राज पुलिस को बता दिया तो उसकी हत्या हो सकती है इसलिए वो जज के घर में जानबुझ कर घुसकर सच्चाई को सामने लाने के लिए अपने सवालों को, जज के सामने रखता है।जिसमें वह न्याय व्यवस्था की कई खामियों को उजागर करता है जिससे जज प्रभावित हो जाता है। नाटक के संवाद इतने कसे हुए हैं कि दर्शक को बांधे रखता है।
नाटक का कथ्य बहुत मजबूत है। अभिनय क्षमता दृष्टि से और कलाकारों को और मेहनत की जरूरत थी। मंच सज्जा और प्रकाश सज्जा प्रभावित करती है।
यह दोनों नाटक युवा रंग निर्देशकों द्वारा इप्टा जयपुर की प्रस्तुति थी। इप्टा जयपुर हमेशा से युवा रंगनिर्देशकों को "इप्टा प्लेटफॉर्म" प्रदान करती आई जो कि एक सराहनीय कदम है।
यह नाट्य खेला उत्सव *कला,साहित्य,एवं संस्कृति पुरातत्व विभाग तथा हम ख्यालों संगठनों ,मित्रों के सहयोग से रविन्द्र मंच के मिनी थिएटर में खेला गया*
संजय विद्रोही
05/11/2023
आप सभी का इंतज़ार रहेगा 07 नवम्बर को शाम 7 बजे रविंद्र मंच जयपुर के स्टूडियो थियेटर में
आप सभी आमंत्रित हैं 💐🙏
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the establishment
Telephone
Website
Address
73, Piyush Path
Jaipur