GIO Rajasthan
AN EFFORT TO PREPARE GIRLS TO ABORT MISCONCEPTIONS AND RECONSTRUCT THE SOCIETY ACCORDING TO THE REVEALED GUIDANCE FROM OUR CREATOR..
20/03/2026
*The Month of Self Purification ~ Ramadan*
Day - 29
17/03/2026
*The Month of Self Purification ~ Ramadan*
Day - 25
✨ यह दुआ हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने यह उस वक़्त मांगी थी जब उनसे जन्नत में ग़लती हो गई थी।
*▪️गुनाह के बाद फ़ौरन रुजूअ*
यह दुआ सिखाती है कि इंसान से ग़लती हो जाए तो मायूस न हो बल्कि फ़ौरन अल्लाह की तरफ़ पलट आए, मोमिन की सिफ़त है कि वह गुनाह पर इसरार नहीं करता बल्कि फ़ौरन तौबा करता है।
*▪️आजिज़ी*
दुआ में इंसान अपनी कमज़ोरी और मोहताजी ज़ाहिर करता है कि वह अल्लाह के बिना कुछ नहीं।
*▪️अपने नफ़्स को क़ुसूरवार ठहराना*
हज़रत आदम ने शैतान या किसी और को इल्ज़ाम नहीं दिया न ही गुनाह करके अड़े रहे बल्कि कहा "हमने अपने ऊपर ज़ुल्म किया"। यह हक़ीक़ी तौबा की निशानी है।
*▪️अल्लाह की मग़फ़िरत के बिना निजात नहीं*
इस दुआ में बंदा इकरार करता है कि अगर अल्लाह माफ़ न करे तो इंसान ख़सारे में पड़ जाता है।
*▪️तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है*
यह दुआ हमें सिखाती है कि चाहे इंसान से कितनी ही बड़ी गलती हो जाए, अल्लाह की तरफ सच्ची तौबा करे तो अल्लाह क़ुबूल फ़रमा लेता है।
17/03/2026
*The Month of Self Purification ~ Ramadan*
Day - 24
رَبِّ لَا تَذَرْنِي فَرْدًا وَأَنتَ خَيْرُ الْوَارِثِينَ*
_ऐ मेरे रब! मुझे अकेला न छोड़, और तू सबसे बेहतर वारिस है।_
(الأنبیاء: 89 — Qur'an)
▪️मायूसी मोमिन की शान नहीं
हज़रत ज़करिया (अलैहि०)बहुत ज़्यादा उम्र के हो चुके थे और ज़ाहिर तौर पर औलाद की कोई उम्मीद नहीं थी, फिर भी उन्होंने बुढ़ापे में अल्लाह से दुआ की। इससे मालूम होता है कि मोमिन को अल्लाह से उम्मीद कभी ख़त्म नहीं करनी चाहिए।
▪️अल्लाह बंदे के दिल की तन्हाई भी जानता है
बंदा जब अपनी तन्हाई और ज़रूरत अल्लाह के सामने रखता है तो अल्लाह ज़रूर उसकी हाजत पूरी करता है।
▪️असल सहारा सिर्फ़ अल्लाह है
इस दुआ में बंदा यह एतराफ़ करता है कि हक़ीक़ी मददगार और मालिक सिर्फ़ अल्लाह है, इसी लिए आख़िर में फ़रमाया: “और तू सबसे बेहतर वारिस है।”
▪️अल्लाह का फ़ैसला बेहतरीन होता है
इस जुमले में यह भी इशारा है कि अगर अल्लाह औलाद दे तो भी ख़ैर है और न दे तो भी वही बेहतर फ़ैसला करने वाला है, क्योंकि वही सबसे बेहतर वारिस है।
▪️दुआ कभी ज़ाया नहीं जाती
हज़रत ज़करिया (अलैहि०) की यह दुआ अल्लाह ने क़ुबूल फरमाई और उन्हें बुढ़ापे में हज़रत यहया जैसा बेटा अता फ़रमाया। इससे मालूम होता है कि सच्ची दुआ अल्लाह के यहाँ ज़रूर क़ुबूल होती है।
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